Saturday, 16 December 2017, 9:00 AM

समीरा विर्मश

सर्वांगिण विकास हो...

Updated on 27 July, 2016, 13:35
सर्वांगिण विकास हो... बच्चे राष्ट्र की अमूल्य धरोहर एवं भावी संसाधन होते हैं। बच्चे किसी भी समाज या राष्ट्र का भव्यिय होते हैं। राष्ट्र के भावी निर्माण के लिए आज के बच्चे के विकास के लिए अवसर प्रदान करना समाज व राष्ट्र की नैतिक जिम्मेदारी है। सरकार द्वारा बचपन को बचाने... आगे पढ़े

प्राकृतिक पर्यावरण ...

Updated on 27 July, 2016, 13:34
प्राकृतिक पर्यावरण ... पर्यावरण शब्द का निर्माण दो शब्दों परि+आवरण से मिलकर हुआ है। 'परिÓ अर्थात् चारो तरफ तथा आवरण का अर्थ है घेरा अर्थात् प्राकृति में जो भी हमारे चारो ओर है वायु, जल, मृदा, पेड़-पौधे, प्राणी आदि सभी पर्यावरण के  अंग है। बढ़ती जनसंख्या व औद्योगिकरण के कारण 'ईको सिस्टमÓ... आगे पढ़े

आईएसएसएन नबंर ISSN 2395-082X

Updated on 10 August, 2015, 13:13
आईएस.एस.एन. संस्था द्वारा समीरा पत्रिका को उसके अच्छे कार्य करने पर  उन्हें आईएसएसएन नबंर ISSN 2395-082X  देकर सम्मानित गया किया। ... आगे पढ़े

...जल संकट...

Updated on 28 July, 2015, 12:19
मनुष्य चाहे कितना भी विकास कर ले, परंतु प्रकृति पर मानव का वश नहीं चल सकता। हम उसे नष्ट कर सकते है, कर भी रहे हैं मगर जब प्रकृति अपने रौद्र रूप में आती है तब मानव सिर्फ विलाप करता है। प्राकृतिक आपदाएं प्राकृतिक कम मानव निर्मित अधिक होती है। कुछ... आगे पढ़े

पर्यावरण शिक्षा...

Updated on 4 April, 2013, 12:34
पर्यावरण शब्द का निर्माण दो शब्दों परि+आवरण से मिलकर हुआ है। 'परिÓ अर्थात् चारो तरफ तथा आवरण का अर्थ है घेरा अर्थात् प्राकृति में जो भी हमारे चारो ओर है वायु, जल, मृदा, पेड़-पौधे, प्राणी आदि सभी पर्यावरण के  अंग है। बढ़ती जनसंख्या व औद्योगिकरण के कारण 'ईको सिस्टमÓ में असंतुलन... आगे पढ़े

बेटियां शक्तिशाली बनें...

Updated on 4 April, 2013, 12:32
यूं तो दिन के समय भी महिलाएं खुद को सुरक्षित नहीं मान सकतीं लेकिन रात के समय उनके साथ होने वाली बलात्कार और छेड़छाड़ जैसी आपराधिक वारदातें और अधिक बढ़ जाती हैं। महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करवाने में हमारे पुलिसिया तंत्र की असफलता किसी से छिपी नहीं है। हाल... आगे पढ़े

...सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने की लड़ाई...

Updated on 4 April, 2013, 12:30
 महिला दिवस तब तक बेमानी है, जब तक  महिलाएं अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत है।  बार-बार सरकार यह दावा कर रही महिलाओं के अधिकारों के लिए बहुत से कानून बना दिए है, मगर  देश के बहुत से राज्यों में राज्य सरकारों की इच्छाशक्ति के कारण उनका लाभ महिलाओं तक नहीं... आगे पढ़े

लाखों बेनाम बच्चियों के लिए भी दुआएं...

Updated on 4 April, 2013, 12:28
फलक के साथ जो हुआ, वह इस देश में रोज किसी न किसी बच्ची के साथ होता है। यूं तो देश में हर दिन कई नवजात बच्चियां मार दी जाती हैं लेकिन एक दो साल की बच्ची को इतनी बेरहमी से मौत की दहलीज पर लाकर छोड़ देना बेहद दर्दनाक... आगे पढ़े

मनमोहन सिंह जी: कुपोषण की समस्या राष्ट्रीय के शर्म की बात

Updated on 4 April, 2013, 12:27
एक ओर हमारे शासक वर्ग देश को 'सुपरपॉवरÓ बनाने का दावा कर रहे है वहीं दूसरी ओर भूख व कुपोषण पर रिपोर्ट जारी करते हुए प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी ने पछतावे के स्वर में कहा कि 'कुपोषण की समस्या राष्ट्रीय के शर्म की बात हैÓ। भोजन का अधिकार, जैसा... आगे पढ़े

आईये भ्रष्टाचार मुक्त भारत देश की ओर कदम बढ़ाये...

Updated on 4 April, 2013, 12:23
भ्रष्टाचार राष्ट्र का कोढ़ है। भ्रष्टाचार प्रशासन की एक प्रमुख समस्या बन गया है। भ्रष्टाचार को मिटाने और दूर करने के लिए विभिन्न देशों में समय-समय पर अनेक कदम उठाये गये है। स्वीडन में सर्वप्रथम 1809 में संविधान के अन्तर्गत 'ओम्बुड्समैनÓ की स्थापना की गयी। सन् 1967 के मध्य तक ओम्बुड्समैन... आगे पढ़े

नारी की उन्नति या अवनति पर ही राष्ट्र की उन्नति...

Updated on 4 April, 2013, 12:22
25 नवम्बर 1960 को डोमिनिकन गणराज्य के तानाशाह की विरोधी तीन मीराबेल बहनों की उनकी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर कू्ररतापूर्वक हत्या कर दी गई थी। उनकी ही याद में 25 नवम्बर को महिला हिंसा विरोधी दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1999 के दिसम्बर महीने में एक प्रस्ताव के... आगे पढ़े

हे अग्नि, अब तुम करो आह्वान...

Updated on 4 April, 2013, 12:21
पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में मान लिया जाता है कि औद्योगिक उत्पादन की क्षमता सीमाहीन है और इसके अंधाधुंध प्रसार से कोई सामाजिक समस्या पैदा नहीं होगी। यह विचार पश्चिमी देशों की उपभोक्ता वादी संस्कृति से ही हमें मिला था, लेकिन अब पश्चिम के अधिकांश वैज्ञानिक और चिंतक भी यह मानने लगे... आगे पढ़े

बिटियां...

Updated on 4 April, 2013, 12:20
हमारे पुराणों में नारी को देवी का दर्जा देते है, भगवान शिव को अद्र्धनारीश्वर कहते है, पर समाज स्त्रियों को पुरुषों के बराबर तो क्या उसके मानसी का भी दर्जा देने को तैयार नहीं है। आज के परिवेश में देखें तो 'कन्या जन्मÓ पाप के समान है, देहज सामाजिक अपराध... आगे पढ़े

वो वतन बेंचकर मुस्कुराते रहे...

Updated on 4 April, 2013, 12:19
ऊंचे पदों पर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासनिक सुधार आयोग की ओर से वर्ष 1967 में लोकपाल की स्थापना का सुझाव आया था। 1969 में उसे लोकसभा ने पारित भी कर दिया,  इस दौरान छोटी-बड़ी कुल चौदह कोशिशें की गयीं। आठ बार सरकारी विधेयक के रूप में और... आगे पढ़े

एक और आतंकवाद....

Updated on 4 April, 2013, 12:15
पुन: देश की आर्थिक राजधानी पर आतंकवाद ने अपना जोर दिखाये, अनेकों बेगुनाह भारतीय इसके शिकार हुए आखिर कब तक देशवासी इस प्रकार की हिंसा का शिकार होते रहेंगे? आतंक के कारण स्पष्ट है, देश के विकास को बाधित करना है, इसके पीछे पड़ोसी देशों का हाथ है, उन्होंने पैसे... आगे पढ़े

भ्रष्टाचार मुक्त समाज व राष्ट्र का निर्माण...

Updated on 4 April, 2013, 12:14
अन्ना हजारे सेवा-निवृत्त सैनिक जिन्होंने 1965 के युद्ध में हिस्सा लिया था. समाज सुधारक। इन्होंने महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के रालेगांव सिद्धि नामक गांव की काया पलट दी। यह स्व-पोषित गांव के रूप में एक मॉडल है। यहाँ के सोलर पावर, बायोफ्य़ूल तथा विंड मिल में गांव की जरूरत जितनी... आगे पढ़े

खिलने दो फूलों को...

Updated on 4 April, 2013, 12:13
जीवन की हर समस्या के लिए देवी की आराधना करने वाला भारतीय समाज कन्या के जन्म को अभिशाप मानता है। एक आर्थिक शक्ति के रूप में भारत के विकास से भी बेटियों की जगह बेटों की चाह में कोई बदलाव नहीं आया है। भारत में बेटियों के विरुद्ध पक्षपात हर... आगे पढ़े

...प्रत्येक भारतीय को ईमानदार होगा पड़ेगा...

Updated on 4 April, 2013, 12:12
आज भारत विश्व की उभरती हुई आर्थिक शक्ति के रूप में अपनी पहचान बना रहा है, परंतु देश अभी भी बेरोजगारी, गरीबी, अशिक्षा इत्यादि से जूझ रहा है, इन सब समस्याओं की जड़ में 'भ्रष्टाचारÓ की समस्या है। आज इससे देश सत्रस्त  है, देश में भ्रष्टाचार का रोग 'कैंसरÓकी तरह... आगे पढ़े

नर्मदा...

Updated on 4 April, 2013, 12:11
नर्मदा देश की सबसे पवित्र नदी मानी जाती है। प्रचलित मान्यता यह है कि यमुना का पानी सात दिनों में, गंगा का पानी छूने से, पर नर्मदा का पानी तो देखने भर से पवित्र कर देता है। साथ ही जितने मंदिर व तीर्थ स्थान नर्मदा किनारे हैं उतने भारत में... आगे पढ़े

''रहिये अब ऐसी जगह..''

Updated on 4 April, 2013, 12:09
हमारे देश की संस्कृति है कि वृद्धों के पैर छूकर उनका आर्शीवाद लेते है। संयुक्त परिवार में एक साथ तीन पीढिय़ां एक छत के नीचे हंसी-खुशी अपना जीवन यापन करती है। ये संयुक्त परिवार के वृद्धों के लिए एक 'सौगातÓ हुआ करती है। समय ने करवट बदली आज अधिकांश युवा,... आगे पढ़े

सच्चे राष्ट्र देश प्रेम वाले नेता....

Updated on 4 April, 2013, 12:08
सच्चे राष्ट्र देश प्रेम वाले नेता.... जनतंत्र का मतलब यह है कि सरकार जनता की, जनता के द्वारा और जनता के लिए बनाई गई है, लेकिन पूर्ण जनतंत्र तभी स्थापित हो सकता है जब किसी भी जनतंत्र के सारे नियम-कानून उस देश की जनता के द्वारा और जनता के लिए बनाये... आगे पढ़े

घोटाले ही घोटाले....

Updated on 4 April, 2013, 12:07
घोटाले ही घोटाले.... 2 जी घोटाला, कामन वेल्थ खेल घोटाला, आदर्श बिल्डिंग घोटाला....घोटोल ही घोटाले ऐसा लगता है, मानो भारत घोटालों का देश है। ट्रासपेरेंसी इंटर नेशनल की रिपोर्ट के अनुसार भारत एक बार फिर भ्रष्ट देशों की सूची में है। शायद ही ऐसा कोई क्षेत्र होगा जिस पर सरकार ने... आगे पढ़े

सर्वोच्च न्यायालय महिलाओं को 'रखैल कैसे कह सकती है

Updated on 4 April, 2013, 12:05
सर्वोच्च न्यायालय महिलाओं को 'रखैल कैसे कह सकती है देश की सबसे बड़ी अदालत महिलाओं को 'रखैलÓ कैसे कह सकती है? 'लिव इन रिलेशनशिपÓ में गुजारा भत्ते के एक प्रकरण में सर्वोच्च अदालत की एक खंडपीठ ने निर्णय में 'रखैलÓ या 'वन नाइट स्टैंडÓ जैसे नारी के लिए अपमानजनक शब्दों के... आगे पढ़े

मां

Updated on 4 April, 2013, 12:03
मां भगवान हर जगह नहीं हो सकता इस कारण उसने मां को बनाया। यह वाक्य मां के सम्मान में लगभग हर जगह लिखा मिल जाता है। हमारा मानना इससे कुछ अलग है और वह ये कि धरती पर मां ही है जिससे भगवान का अस्तित्व कायम है।  मां एक शब्द नहीं,... आगे पढ़े

...भोपाल गैस त्रासदी... इंसाफ...

Updated on 4 April, 2013, 12:01
मानव इतिहास की सबसे क्रूरतम औघोगिक दुर्घटना भोपाल गैस त्रासदी के कारण उन हजारों लोगों का जीवन उस काली रात के बाद हमेशा के लिए बदल चुका है, जिनके अपने इस त्रासदी की भेंट चढ़े थे। दुर्भाग्य यह है कि आज भी अनेको लोग ऐसे है जो गैस के दुष्प्रभवाों... आगे पढ़े

...नक्सलवाद...

Updated on 22 March, 2013, 13:22
माओत्से तुंग अति राष्ट्रवादी थे। माओं ने लिन प्याओ को अपना उत्तराधिकारी बनाया। वह हमेशा राज्य के हित में और कौमी राज्य के हित में संलग्न रहता था। परंतु ये नक्सली किन एजेंडों पर काम कर रहे हैं और किस प्रकार की राष्ट्रियता की राह पर चल रहे हैं, नक्सली... आगे पढ़े

...भूख की ताकत...

Updated on 22 March, 2013, 13:13
दन्तेवाड़ा में शहीद सी.आर.पी.एफ के जवानों को श्रृद्धांजलि। पिछले साल भर में लगभग एक हजार लोग नक्सली हिंसा में मारे गए। जिसमें ढाई सौ से ज्यादा सुरक्षा बलों के जवान थे। पिछले सात सालों में 56 से 223 जिले में सक्रिय हो गए है। अधिकांश जिलों में विकास न के... आगे पढ़े

...बदलाव संभव है...

Updated on 22 March, 2013, 13:06
दुर्गा, शक्ति का रूप हैं। इतनी शक्तिमान कि भगवान राम ने भी लंका पर आक्रमण के समय, दुर्गा की आराधना की थी। उनकी कथा कुछ ऐसी है कि जब देवता, महिषासुर से संग्राम में हार गए और उनका ऐश्वर्य, श्री और स्वर्ग सब छिन गया तब वे दीन-हीन दशा में... आगे पढ़े

स्त्री और धर्म

Updated on 22 March, 2013, 12:56
भारत में वैदिककाल तक नारी जाति की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही थी। वेद की कई ऋचाओं की रचना विदूषी स्त्रियों ने की। ये और बात है कि बाद में मनु ने उसी स्त्री जाति को वेद के पढऩे और सुनने से वर्जित कर दिया। इससे बहुत पहले प्राचीनतम सभ्यताओं के... आगे पढ़े

...भ्रष्टाचार सामाजिक व जीवन की अनिवार्यता...

Updated on 22 March, 2013, 12:41
2010 की देहरी पर महंगाई, भ्रष्टाचार से त्रस्त खड़ा साधारण गण  ठिठुरता हुआ गणतंत्र मनाता सोच रहा है, अब तो देश के सर्वोच्च और अत्यंत सम्मान की दृष्टि से देखे जाने वाले न्याय संस्थान भी भ्रष्टाचार की चपेट में आ चुका है। जब हमारी न्याय व्यवस्था में भ्रष्टाचार की यह... आगे पढ़े

महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण नंबर

Updated on 5 March, 2013, 13:50
महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण नंबर ... आगे पढ़े