विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी ओमिक्रॉन को एक चिंताजनक खतरा बताया है तथा अभी तक लगभग 77 देशों में इस संक्रमण के  फैलने की पुष्टि की है। कोरोना से अभी तक संपूर्ण विश्व में 27 करोड़ से अधिक व्यक्ति संक्रमित हो चुके हैं तथा 52 लाख व्यक्ति अकाल मृत्यु का शिकार हुए हैं।  विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जोर दिया है कि ओमिक्रॉन से निपटने में पूर्व में लगाए टीके का प्रभाव अत्यंत न्यून है तथा इस खतरे का मुकाबला प्रभावी तरीके से करने हेतु मास्क लगाए रखना, सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करना तथा हाथों को लगातार धोना आवश्यक है।


वर्ष 2021 समाप्ति की ओर है। एक ऐसा वर्ष जिसमें हम सब अधिकांश समय कोरोना की महामारी से जूझते रहे। कोरोना में अनेक परिवारों ने अपने परिजनों और आर्थिक सहारे को खोया तथा उसके कारण पैदा हुए आर्थिक संकट ने देश की आबादी के एक बड़े समूह की आय में कमी कर उनको गरीबी रेखा के नीचे ला दिया है। 
वर्ष के अंत की ओर जब इस महामारी से सामान्य स्थिति की आशा की किरण दिखने लगी थी, तभी पिछले एक माह में कोरोना नए प्रारूप ओमिक्रॉन ने चिंता की एक नई लकीर खड़ी कर दी है। संपूर्ण विश्व में ओमिक्रॉन को लेकर जो चिंता की जा रही है वह आधारहीन नहीं है। वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार यह प्रारूप कहीं अधिक तेजी से संक्रमण फैलाता है। अमेरिका में तो अब लगभग 73 प्रतिशत कोरोना प्रभावित व्यक्ति ओमिक्रॉन से ही संक्रमित हो रहे हैं। संपूर्ण यूरोप में एक बार फिर वर्ष के प्रारंभ जैसी स्थिति हो रही है तथा कुछ देशों में तो लॉकडाउन की स्थिति आ गई है। हमारे देश में भी ओमिक्रॉन संक्रमित व्यक्तियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है तथा आने वाले दिनों में क्रिसमस तथा नववर्ष की गहमागहमी में इस संक्रमण के तेजी से फैलने की आशंका व्यक्त की जा रही है। वर्षांत में अवकाश पर आने वाले आप्रवासियों से देश भी इस तरह के संक्रमण के और अधिक फैलने की संभावना है। 
देश में लगभग 10 माह पूर्व कोरोना के टीके लगाने का कार्य जिस तेजी से प्रारंभ हुआ था उसमें पिछले तीन माह में गिरावट आई है। अनेक व्यक्ति टीके की पहली डोज के बाद निश्चित होकर दूसरी डोज लगवाने को उत्सुक नहीं है। सार्वजनिक स्थलों पर मास्क लगाकर रखने तथा सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करने की अपील पर अधिकांश लोगों का कोई ध्यान नहीं है। इस सबके नतीजतन हम ओमिक्रॉन के रूप में कोरोना की तीसरी लहर की दहलीज पर खड़े हैं। 
  कोरोना की पहली और दूसरी लहर के चलते अनेक देशों की अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई है तथा कई लोगों की नौकरी पर खतरा पड़ा है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि ओमिक्रॉन संक्रमण के तेजी से फैलने के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर असाधारण बोझ पड़ेगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था का बड़ा नुकसान होगा। कोरोना की पहली और दूसरी लहर द्वारा पहुंचाए गए नुकसान को ध्यान में रखते हुए यह मानना होगा कि हम एक बार फिर इस तरह की व्यक्तिगत तथा राष्ट्रीय विपत्ति को सहने की स्थिति में नहीं है।
अनेक देशों में कोरोना से निपटने के लिए जनसेवाओं की आपूर्ति में भेदभाव भी किया जा रहा है। विकसित देशों के बड़े हिस्से को कोरोना का टीका लग चुका है, जबकि गरीब देशों में इसकी उपलब्धता नहीं है। इस असमानता तथा मानव जीवन के गंभीर खतरे को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र, मानवाधिकार संगठन द्वारा इस वर्ष मानव अधिकार दिवस की थीम 'असमानताओं को कम करना, मानव अधिकारों को आगे बढ़ानाÓ रखी गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी दुनियाभर के देशों को स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार मानकर उसे अपने संविधान में शामिल करने की अपील की है।
ओमिक्रॉन के खतरे से निपटने के लिए जरूरी है हम कोरोना टीका लगाने की गति को और बढ़ाएं तथा सार्वजनिक स्थलों पर मास्क लगाए रखने तथा सोशल डिस्टैसिंग रखने के मापदंडों का स्वमे्व पालन करें। हमारे सामूहिक प्रयास ही सरकार द्वारा इस बारे में किए जा रहे उपायों को प्रभावी बना सकेंगे तथा हम इस खतरे से स्वयं को तथा अपने परिजनों को बचा सकेंगे। नववर्ष की पूर्व संध्या पर हमारा यह संकल्प आने वाले नए वर्ष को हम सबके लिए सही अर्थो में मंगलकारी बना सकेगा।


शुभकामनाओं सहित....