सोमनाथ धाम में आज ऐतिहासिक उत्सव, कुंभाभिषेक करेंगे प्रधानमंत्री मोदी
सोमनाथ (गुजरात): आज का दिन भारत के सांस्कृतिक इतिहास के लिए बहुत बड़ा है। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे होने की खुशी में भव्य 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' मनाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद सोमनाथ मंदिर पहुंच रहे हैं, जहाँ वे मंदिर के शिखर पर कुंभाभिषेक करेंगे। सोमनाथ के कार्यक्रम के बाद PM मोदी वडोदरा जाएंगे, जहाँ वे शाम 6 बजे सरदारधाम छात्रावास (Hostel) का उद्घाटन करेंगे। इन दोनों ही जगहों पर प्रधानमंत्री जनसभाओं को संबोधित करेंगे और देश के लोगों के साथ अपनी बात साझा करेंगे।
देशभर के नेताओं ने दी बधाई और सम्मान
सोमनाथ मंदिर की इस डायमंड जुबली पर देशभर के बड़े नेताओं ने अपनी शुभकामनाएं दी हैं। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसे सनातन संस्कृति का गौरव बताते हुए लोगों के लिए सुख और शांति की प्रार्थना की। वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह महोत्सव हमारी अटूट आस्था और सांस्कृतिक स्वाभिमान की जीत है। उन्होंने इसे भारत की दिव्य चेतना का उत्सव बताया और कहा कि PM मोदी की मौजूदगी इस पल को और भी यादगार बना रही है। सभी नेताओं का मानना है कि सोमनाथ का यह उत्सव हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया इसे 'अपराजेय चेतना' का प्रतीक
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि भारत की कभी न हारने वाली सोच का प्रतीक है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे कई हमलों और विध्वंस के बाद भी हमारी संस्कृति और आस्था जिंदा रही। चौहान ने कहा कि यह मंदिर सरदार पटेल के मजबूत इरादों और डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रेरणा से फिर से खड़ा हुआ है। आज यह धाम 'विकास और विरासत' का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुका है, जो पूरी दुनिया को शांति और भक्ति का संदेश दे रहा है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व से नई पीढ़ी को मिलेगी प्रेरणा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस खास मौके को 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का नाम दिया है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र है। PM मोदी के नेतृत्व में मनाए जा रहे इस उत्सव का मकसद भारत की सनातन ऊर्जा को और मजबूत करना है। राजनाथ सिंह के अनुसार, इस तरह के आयोजनों से हमारी आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों और संस्कृति के बारे में जानकारी मिलेगी और वे अपने इतिहास पर गर्व कर सकेंगी। यह पर्व केवल बीते कल की याद नहीं है, बल्कि एक उज्ज्वल और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भविष्य का संकल्प भी है।


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