चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान भारतीय शेयर बाजार में आई जबरदस्त तेजी ने वित्त वर्ष की दूसरी छमाही (यानी अक्टूबर से मार्च तक की अवधि) के लिए एक बेहद शानदार और सकारात्मक व्यावसायिक माहौल तैयार कर दिया है। 'प्राइम डाटाबेस' (Prime Database) के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 25 सितंबर तक देश की लगभग 145 कंपनियों को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से आईपीओ (IPO - आरंभिक सार्वजनिक निर्गम) लाने की औपचारिक मंजूरी मिल चुकी है। इन सभी स्वीकृत आईपीओ का अनुमानित कुल निर्गम आकार लगभग 2.75 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। इस अनुमान में 91,500 करोड़ रुपये की वह राशि भी शामिल है जो उन 61 कंपनियों से संबंधित है, जिनके निर्गम के आकार का अभी तक आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है।

प्रमुख आईपीओ और बाजार की पाइपलाइन

बाजार विश्लेषकों का यह मानना है कि स्वीकृत 2.75 लाख करोड़ रुपये में से वास्तव में लगभग 1 लाख से 1.2 लाख करोड़ रुपये तक के आईपीओ बाजार में उतर सकते हैं, जो कुल स्वीकृत निर्गमों का लगभग 35 से 45 प्रतिशत हिस्सा है। आईपीओ लाने की इस कतार (पाइपलाइन) में कई बड़े और चर्चित निवेश प्रस्ताव शामिल हैं।

प्रमुख कंपनियाँ अनुमानित इश्यू साइज (करोड़ रुपये में)
जियो प्लेटफॉर्म्स 35,000
अवाडा इलेक्ट्रो 7,600
ओयो (ओवेरावल स्टेज) 6,650
जेप्टो 5,106
क्रेडिला फाइनेंशियल सर्विसेज 5,000

इसके अतिरिक्त, डोर्फ-कैटल केमिकल्स का निर्गम आकार भी लगभग 5,000 करोड़ रुपये का रहने का अनुमान है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष के अंत में आने वाले त्योहारी सीजन और कई बड़े निर्गमों की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग के कारण दूसरी छमाही में निवेशकों को निवेश के कई आकर्षक और नए विकल्प मिलने की पूरी उम्मीद है।

शुरुआती सुस्ती के बाद दूसरी तिमाही में बाजार की दमदार रफ्तार

प्राइम डाटाबेस की रिपोर्ट के अनुसार, आईपीओ बाजार के लिहाज से चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही की शुरुआत अपेक्षाकृत थोड़ी सुस्त रही थी। अप्रैल से अगस्त माह के दौरान विभिन्न कंपनियों ने आईपीओ के माध्यम से कुल 46,453 करोड़ रुपये ही जुटाए थे, जो वर्ष 2025 की समान अवधि में जुटाए गए 55,338 करोड़ रुपये से लगभग 16 प्रतिशत कम थे।

हालाँकि, वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में शेयर बाजार ने बेहद जोरदार और शानदार रफ्तार पकड़ी। विशेष रूप से सितंबर के महीने में करीब 31 कंपनियों ने अपने आईपीओ लॉन्च किए और कुल 39,214 करोड़ रुपये की पूँजी जुटाई, जिससे वित्तीय बाजार की रौनक कई गुना बढ़ गई। इस दौरान नेशनल स्टॉक Exchange (NSE) का 22,560 करोड़ रुपये का विशाल आईपीओ मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा, जो देश के इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ साबित हुआ।

मध्यम और छोटे आकार के आईपीओ बन सकते हैं निवेशकों के लिए फायदेमंद

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट (Swastika Investmart) के अनुसंधान प्रमुख संतोष मीणा ने इस संबंध में अपने विचार रखते हुए कहा कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में जहाँ एक ओर बड़े और मेगा आईपीओ बड़े संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) और मीडिया का मुख्य ध्यान आकर्षित करेंगे, वहीं दूसरी ओर मजबूत व्यावसायिक फंडामेंटल और उचित मूल्यांकन (Valuation) वाले छोटे और मध्यम आकार के आईपीओ भी खुदरा निवेशकों के लिए बेहतरीन और लाभकारी अवसर साबित हो सकते हैं।