Thursday, 21 June 2018, 5:29 PM

जरा हटके

भगवान का साथ

Updated on 12 March, 2013, 15:11
    एक समय की बात है। एक छोटे बच्चे ने जब बचपन से जवानी में प्रवेश किया। तब वह कहीं भी जाता तो उसके पदचिह्न के साथ एक और पदचिह्न नजर आते थे, लेकिन जब वह बूढ़ा हुआ तो ये पदचिह्न नजर आना बंद हो गए। जब वह मरने के बाद भगवान... आगे पढ़े

चतुर कविराज

Updated on 11 March, 2013, 16:24
    एक थे चतुर कविराज, उन्हें था अपनी अकल पर बड़ा नाज। वो थे भी होशियार, राजा भी उनकी हर बात मानने को हो जाते थे तैयार। एक दिन कविराज ने एक कविता लिखी, सुनकर राजा की तबियत खिली। बोले-'बोलो क्या माँगते हो, क्या इनाम चाहते हो।' कविराज ने सोचा देखते हुए... आगे पढ़े

जादूगर चाचा...

Updated on 11 March, 2013, 16:22
    पंडित जवाहरलाल नेहरू मजेदार बातों के एक ऐसे जादूगर भी थे, जो एक मिनट के भीतर क्या से क्या कर सकते थे? नेहरूजी को भाषा पर अधिकार था। वे बहुत अच्छा बोलते थे। जीवन भर तुनकते-तपते नेहरूजी, संसार में अपनी, भारत की और अहिंसा की नीति का आदर पाकर अपनी सारी... आगे पढ़े

हमारे आदर्श दादाजी

Updated on 11 March, 2013, 16:18
दादाजी की महिमा न्यारी है अज्ञानता को दूर करके ज्ञान की ज्योति जलाई है। दादाजी की महिमा न्यारी है... दादाजी के चरणों में रहकर हमने शिक्षा पाई है। गलत राह पर भटके जब हम तो दादाजी ने राह दिखाई है। दादाजी की महिमा न्यारी है... माता-पिता ने जन्म दिया पर दादाजी ने जीना सिखाया है। ज्ञान, चरित्र और संस्कार की हमने शिक्षा... आगे पढ़े

अरुण यह मधुमय देश

Updated on 9 March, 2013, 18:54
 अरुण यह मधुमय देश हमारा। जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा। सरस तामरस गर्भ विभा पर नाच रही तरुशिखा मनोहर। छिटका जीवन हरियाली पर मंगल कुंकुम सारा।। लघु सुरधनु से पंख पसारे शीतल मलय समीर सहारे। उड़ते खग जिस ओर मुँह किए समझ नीड़ निज प्यारा।। बरसाती आँखों के बादल बनते जहाँ भरे करुणा जल। लहरें टकरातीं अनंत की पाकर जहाँ किनारा।। हेम... आगे पढ़े

शरीर टैटू से भरा, काम के लाले पड़े

Updated on 9 March, 2013, 18:29
सबसे ज्यादा टैटू गुदवाने वाला आदमी ब्रिटेन का 33 साल का मैथ्यू वीलर है। मैथ्यू के पूरे शरीर के 80 फीसदी हिस्से पर टैटू गुदे हुए हैं। इनको गुदवाने के लिए उन्होंने अभी तक कुल 20 हजार पौंड तक खर्च दिए हैं। टैटू गुदवाने के लिए उन्होंने कुर्सी पर करीब... आगे पढ़े

अकल की दुकान

Updated on 1 March, 2013, 12:51
एक था रौनक। जैसा नाम वैसा रूप। अकल में भी उसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता था। एक दिन उसने घर के बाहर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा- 'यहां अकल बिकती है।' उसका घर बीच बाजार में था। हर आने-जाने वाला वहां से जरूर गुजरता था। हर कोई बोर्ड देखता, हंसना और... आगे पढ़े