Saturday, 25 January 2020, 2:27 PM

जीवन मंत्र

जो हो रहा है उसके जिम्मेदार हम स्वंय हैं

Updated on 25 January, 2020, 6:00
हम मनुष्यों की एक सामान्य सी आदत है कि दु:ख की घड़ी में विचलित हो उठते हैं और परिस्थितियों का कसूरवार भगवान को मान लेते हैं। भगवान को कोसते रहते हैं कि 'हे भगवान हमने आपका क्या बिगाड़ा जो हमें यह दिन देखना पड़ रहा है।' गीता में श्री कृष्ण... आगे पढ़े

जैसा सोचेंगे वैसा ही फल मिलेगा

Updated on 24 January, 2020, 6:00
यदि आपका मन प्रसन्न नहीं है तो इसका जिम्मेदार कोई और नहीं है बल्कि आप स्वंय हैं। इसी प्रकार अगर आप सुखी है तो यह भी आपको अपने ही कारण प्राप्त हुआ है। ईश्वर का आपके सुख-दुŠ ख से कोई संबध नहीं है। ईश्वर तो मात्र कर्म का फल प्रदान... आगे पढ़े

 ईश्वरीय सिद्धांत 

Updated on 21 January, 2020, 0:00
तीन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण सिद्धांत व्यक्त होते हैं- यह जो संसार है परमात्मा से व्याप्त है, उसके अतिरिक्त सब मिथ्या है, माया है, भ्रम है, स्वप्न है। मनुष्य को उसकी इच्छानुसार सृष्टि संचालन के लिए कार्य करते रहना चाहिए। मनुष्य में जो श्रे…ता-शक्ति या सौन्दर्य है वह उसके दैवी गुणों के... आगे पढ़े

अपूर्णता से पूर्णता की ओर

Updated on 20 January, 2020, 6:00
मनुष्य का बाह्य जीवन वस्तुत: उसके आंतरिक स्वरूप का प्रतिबिम्ब मात्र होता है। जैसे ड्राइवर मोटर की दिशा में मनचाहा बदलाव कर सकता है। उसी प्रकार, जीवन के बाहरी ढर्रे में भारी और आश्चर्यकारी परिवर्तन हो सकता है। वाल्मीकि और अंगुलिमाल जैसे भयंकर डाकू क्षण भर में परिवर्तित होकर इतिहास... आगे पढ़े

 द्वंद्व के बीच शांति की खोज 

Updated on 19 January, 2020, 6:00
केवल ज्ञान की बातें करों। किसी व्यक्ति के बारे में दूसरे व्यक्ति से सुनी बातें मत दोहराओ। जब कोई व्यक्ति तुम्हें नकारात्मक बातें कहे, तो उसे वहीं रोक दो, उस पर वास भी मत करो। यदि कोई तुम पर कुछ आरोप लगाये, तो उस पर वास न करो। यह जान... आगे पढ़े

 जो हो रहा है उसके जिम्मेदार हम खुद हैं 

Updated on 18 January, 2020, 6:00
हम मनुष्यों की एक सामान्य सी आदत है कि दु?ख की घड़ी में विचलित हो उठते हैं और परिस्थितियों का कसूरवार भगवान को मान लेते हैं। भगवान को कोसते रहते हैं कि 'हे भगवान हमने आपका क्या बिगाड़ा जो हमें यह दिन देखना पड़ रहा है।' गीता में श्री कृष्ण... आगे पढ़े

किसी को भी न बताएं अपनी जिंदगी की ये पांच बातें

Updated on 17 January, 2020, 6:15
 हमारे जीवन की कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें हमें किसी के साथ भी साझा नहीं करना चाहिए। यही सफलता का मत्र है। हम यहां जीवन के ऐसे पांच राज बता रहे हैं जिन्हें आपको केवल अपने तक ही सीमित रखना चाहिए। ये पांच राज इस प्रकार हैं...  1. गुरुमंत्र    अगर... आगे पढ़े

श्रद्धा के मुताबिक पूजा

Updated on 15 January, 2020, 6:30
हरेक व्यक्ति में चाहे वह जैसा भी हो, एक विशेष प्रकार की श्रद्धा पाई जाती है। लेकिन उसके द्वारा अर्जित स्वभाव के अनुसार उनकी श्रद्धा उत्तम (सतोगुणी), राजस (रजोगुणी) अथवा तामसी कहलाती है। अपनी श्रद्धा के अनुसार ही वह कतिपय लोगों से संगति करता है। अब वास्तविक तथ्य तो यह... आगे पढ़े

उद्यम में है लक्ष्मी का वास 

Updated on 14 January, 2020, 6:00
काम का ढेर देखकर कभी घबराना नहीं। मनुष्य काम करने के लिए ही जन्मा है। वह नहीं चाहेगा तो भी उसे काम करना ही पड़ेगा। जो कर्तव्य-कर्म करने में उत्साही है, वही दूसरों के लिए उपयोगी होने का सुख भोग सकता है। उद्यम में लक्ष्मी का वास है और आलस्य... आगे पढ़े

सिद्धांत गौण है, सत्ता प्रमुख 

Updated on 13 January, 2020, 6:00
पिछले दिनों में राष्ट्रीय रंगमंच पर जिस प्रकार का राजनीतिक चरित्र उभरकर आ रहा है, वह एक गंभीर चिंता का विषय है। ऐसा लगता है, राजनीति का अर्थ देश में सुव्यवस्था बनाए रखना नहीं, अपनी सत्ता और कुर्सी बनाए रखना है। राजनीतिज्ञ का अर्थ उस नीति-निपुण व्यक्तित्व से नहीं है,... आगे पढ़े

सुखी रहना है तो भगवान से शिकायत न करें 

Updated on 12 January, 2020, 6:00
इंसानों की एक सामान्य आदत है कि तकलीफ में वह भगवान को याद करता है और शिकायत भी करता है कि यह दिन उसे क्यूं देखने पड़ रहे हैं। अपने बुरे दिन के लिए इंसान सबसे ज्यादा भगवान को कोसता है। जब भगवान को कोसने के बाद भी समस्या से... आगे पढ़े

प्रेम और दया से ही प्रसन्न होंगे ईश्वर

Updated on 11 January, 2020, 6:00
ईश्वर को खुश करने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय करते हैं। मंत्र साधक लाखों बार मंत्र जप करते हैं, भक्ति मार्ग पर चलने वाले लोग मंदिर जाकर ईश्वर की पूजा करते हैं। धूप-दीप आरती से भगवान को प्रसन्न करने की भी कोशिश करते हैं। इतना करने के बाद भी... आगे पढ़े

माँ है तो सबकुछ है 

Updated on 7 January, 2020, 6:00
माँ एक गुरु के रूप में अपनी संतान को संस्कार देती है। माता जीवन का निर्माण करती है, तो पिता उसे उन्नति के शिखर तक ले जाता है। माँ है तो सबकुछ है और यदि माँ नहीं तो कुछ भी नहीं। जो अपनी माँ को प्रसन्न रखता है, वह उसके... आगे पढ़े

मनुष्य को कर्मों का कर्ज चुकाना होगा

Updated on 5 January, 2020, 6:00
भगवान ने हमारे जीवन को पवित्र बनाने के लिए समय-समय पर जो उपदेश दिए हैं, वे शास्त्रों के रूप में हमारे सामने हैं। हमें यह जो मनुष्य भव मिला है, यदि कर्मों का कर्ज चुका दिया तो सीधे मोक्ष प्राप्त हो सकता है। मनुष्य को अपने कर्मों का भुगतान स्वयं... आगे पढ़े

चाणक्य नीति: अगर ऐसी है संतान तो बर्बाद हो जाएगा घर, कुल और मान सम्मान

Updated on 4 January, 2020, 6:00
आचार्य चाणक्य द्वारा बताई गई नीतियों का आज भी अनुसरण और अध्ययन किया जाता हैं। आचार्य चाणक्य ने शासन, प्रशासन और आम लोगो के जीवन के लिए कई सारी नीतियां बनाई हैं। अगर मनुष्य आचार्य चाणक्य के द्वारा बनाई गई उन नीतियों का अनुसरण कर लें तो उसके जीवन में... आगे पढ़े

जीवन को खुशहाल और बेहतर बनाने के लिए अपनाएं ये टिप्स

Updated on 3 January, 2020, 6:00
हर व्यक्ति अपने जीवन को सरल और सुकून से जीना चाहता हैं, जिसके लिए वह कड़ी मेहनत भी करता हैं मगर आज के समय में काम के अधिक बोझ के कारण वह खुद को भूल सा गया हैं। वह मुस्कुराने की जगह हर समय टेंशन में ही रहता हैं इससे बचने... आगे पढ़े

क्या है शुद्ध अहिंसा! 

Updated on 2 January, 2020, 6:00
गांधी जी ने अपने जीवन में अहिंसा के विविध प्रयोग किए। वे एक वैज्ञानिक थे। उनका जीवन प्रयोगशाला था। उनका प्रारंभिक और अंतिम साहित्य देखने से यह तथ्य भलीभांति स्पष्ट हो जाता है। बड़े जीव की सुरक्षा के लिए छोटे जीव को मारने में वे पाप बताते थे। खती को... आगे पढ़े

भगवान का अचिंत्य ऐश्वर्य

Updated on 1 January, 2020, 6:00
भगवान भौतिक जगत के पालन व निर्वाह के लिए प्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी नहीं हैं। हम एटलस (एक रोमन देवता) को कंधों पर गोला उठाये देखते हैं। वह अत्यन्त थका लगता है और इस विशाल पृथ्वीलोक को धारण किये रहता है। हमें किसी ऐसे चित्र को मन में नहीं लाना... आगे पढ़े

 नवल वर्ष का धवल दिवस यह, राही तुमको मंगलमय हो 

Updated on 31 December, 2019, 6:15
नये साल के पहले दिन सूरज की पहली किरण हम सबके जीवन में, सारे विश्व के लिए शांति, सुरक्षा, प्रसन्नता, समृद्धि और उन्नति लेकर आये यही कामनायें हैं। यद्यपि चिंतन योग्य शाश्वत सच तो यह है कि सूरज तो हर दिन उसी ऊर्जा के साथ ऊगता है, दरअसल यह हम... आगे पढ़े

 जाल हैं राग और द्वेष

Updated on 31 December, 2019, 6:00
परमानंद को समझा नहीं जा सकता और उसे पाना भी अत्यंत कठिन है। कई जीवन कालों के बाद परमानंद की प्राप्ति होती है और एक बार पाने पर इसे खोना तो और भी कठिन है। जीवन में तुम्हें तलाश है केवल परमानंद की- अपने स्रेत के साथ तुम्हारा दिव्य मिलन... आगे पढ़े

मानव जीवन की गरिमा

Updated on 30 December, 2019, 6:00
नालंदा तक्षशिला जैसे अनेक विश्वविद्यालय इस देश में थे। देश की शिक्षा व्यवस्था की पूर्ति तो स्थानीय गुरुकुल ही कर लेते थे। उच्च स्तरीय एवं अंतरराष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था का प्रबंध यह विश्वविद्यालय करते थे। देश-देशांतरों की भाषाएं वहां पढ़ाई जाती थीं, जिनमें पारंगत होकर अपने को विश्व सेवा के लिए... आगे पढ़े

इस मंत्र के तीन अक्षरों में है त्रिदेव की साक्षात उपस्थिति, जानें इसकी महिमा और महत्त्व

Updated on 29 December, 2019, 6:30
सनातन संस्कृति में ॐ का उच्चारण अत्यंत पवित्र एवं प्रभावशाली माना गया है। जिसके तीन अक्षरों में त्रिदेव (ब्रह्मा,विष्णु,महेश) की साक्षात उपस्थिति है। इसके उच्चारण में अ+उ+म् अक्षर आते हैं, जिसमें 'अ' वर्ण 'सृष्टि' का घोतक है 'उ' वर्ण 'स्थिति' दर्शाता है जबकि 'म्' 'लय' का सूचक है । ॐ... आगे पढ़े

 प्रोध पर काबू पाना सीखों

Updated on 28 December, 2019, 6:00
यदि आपको कोई कुत्ता कहता है तो आप उसे भौंकें नहीं बल्कि मुस्कुराएँ। गालियाँ देने वाला स्वयं ही शर्मिन्दा हो जाएगा। अन्यथा सचमुच कुत्ता बन जाओगे। यह बात राष्ट्रसंत मुनिश्री तरुण सागर जी महाराज ने प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि यदि कोई आपको गालियाँ देता है और आप... आगे पढ़े

ईश्वर के दर्शन

Updated on 27 December, 2019, 6:00
सरस्वती चंद्र तीर्थयात्रा पर जा रहे थे। लंबे और कठिन सफर को देखते हुए साथ में बर्तन, भोजन और जरूरत का अन्य सामान भी था। रास्ते में एक गांव पार करते हुए वह वहां के एक वीरान मंदिर में रुक गए। पहले तो सोचा कि यहां कोई नहीं होगा पर... आगे पढ़े

 धर्म की शरण

Updated on 24 December, 2019, 6:00
हर संसारी प्राणी अपनी सुरक्षा के लिए शरण की खोज करता है। प्राणी उपयुक्त शरण मिलने पर उसे स्वीकार भी कर लेता है। बहिर्दर्शी व्यक्ति अपने पारिवारिक जनों को शरण मानता है। परिवार के लोग किसी सक्षम सदस्य को शरण मानते हैं। किंतु वे तुम्हें त्राण और शरण देने में... आगे पढ़े

अपने अंदर रहना ही ध्यान

Updated on 23 December, 2019, 6:00
जब हम दुखी होते हैं तो लगता है समय बहुत लम्बा है। जब प्रसन्न होते हैं तो समय का अनुभव नहीं होता है। तो प्रसन्नता या आनन्द क्या है? यह हमारी स्वयं की आत्मा है। यही आत्मतत्व शिव तत्व है या शिव का सिद्धांत है। प्राय: हम जब भगवान की... आगे पढ़े

अहं भाव न पालें

Updated on 22 December, 2019, 6:00
एक बार देशभक्त वीर शिवाजी सज्जनगढ़ का किला बनवा रहे थे। हजारों मजदूर वहां काम करते थे। एक दिन शिवाजी किले को देखने गए। यत्र की तरह उनको काम करते देखकर शिवाजी के मन में अहं आ गया। वे सोचने लगे- इन सबकी आजीविका मेरे द्वारा चलती है! इतने में... आगे पढ़े

कठिन काम

Updated on 21 December, 2019, 6:00
एक लड़का महात्मा के पास पहुंचा। लड़का बड़ा शैतान था, उसको देखते ही महात्मा ने भांप लिया। इसलिए मनोवैज्ञानिक ढंग से प्रतिबोध देने के लिए महात्मा बोले- 'बच्चे! तुम तो बड़े तेज दिखाई देते हो।' वह अपनी प्रशंसा सुनकर खुश हुआ और कहने लगा - 'स्कूल में सब लड़के मुझसे... आगे पढ़े

 ईमानदारी सर्वोत्तम

Updated on 20 December, 2019, 6:00
एक राजा ने अपने उत्तराधिकारी के चुनाव के लिए राज्य के सभी नौजवानों को एक-एक बीज दिया और कहा, 'इसे गमले में लगाकर सींचना और एक वर्ष के पश्चात मेरे पास लेकर आना। जिसका पौधा सबसे अच्छा होगा, उसे राजा घोषित किया जाएगा।' सब बीज लेकर खुशी-खुशी लौटे।  पांच-छह दिन... आगे पढ़े

नदी और सागर

Updated on 19 December, 2019, 6:00
सुखदेव ऋषि के आश्रम में कई शिष्य रहते थे। उनमें अनुज नामक शिष्य काफी तेज था। धीरे-धीरे वह स्वयं को अन्य शिष्यों से श्रेष्ठ मानकर दूसरों को हीन समझने लगा। ऋषि उसके अंदर छिपे अहं को समझ गए और उसे एक दिन अपने साथ एक सागर के पास ले गए।... आगे पढ़े

अनुशासन का पाठ

Updated on 18 December, 2019, 6:00
गुरु अंबुजानंद के पास अनेक शिष्य शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते थे। उनका आश्रम लंबे समय से चल रहा था। अब चूंकि अंबुजानंद काफी वृद्ध हो गए थे, गुरुकुल चलाना उनके लिए कठिन हो रहा था। वह अपने शिष्यों में से ही किसी एक को गुरुकुल का सारा कार्यभार... आगे पढ़े

 प्रकृति की तीन शक्तियां 

Updated on 17 December, 2019, 6:00
प्रकृति में तीन शक्तियां हैं- ब्रह्म शक्ति, विष्णु शक्ति और शिव शक्ति। प्राय: तुममें कोई भी एक शक्ति अधिक प्रबल होती है। ब्रह्म शक्ति वह ऊर्जा है जो नव-निर्माण करती है; विष्णु शक्ति ऊर्जा का पालन करती है और शिव शक्ति वह ऊर्जा है जो रूपांतरण करती है- नया जीवन... आगे पढ़े

सम्मान पाने के लिए मर्यादा का पालन जरूरी

Updated on 16 December, 2019, 6:00
संसार में भगवान राम मर्यादा पुरूषोत्तम के रूप में पूजे जाते हैं। इसका कारण यह है कि इन्होंने अपने जीवन में हर रिश्ते के साथ न्याय किया। इन्होंने कभी भी बड़ा होने का अभिमान नहीं दिखाया। इन्होंने छोटे भाइयों को सम्मान दिया और सदैव माता-पिता के आज्ञाकारी रहे। पत्नी की... आगे पढ़े

 बाहरी विकार 

Updated on 15 December, 2019, 6:00
एक व्यक्ति संन्यासी के पास पहुंचा और बोला, बाबाजी! मुझे परमात्मा से मिला दो। संन्यासी ने बात टालनी चाही। लेकिन वह अपनी बात पर अड़ा रहा। संन्यासी ने उसकी भावना परखने की दृष्टि से कहा, भगवान से मिलना है तो कल आना होगा। दूसरे दिन फिर यही उत्तर मिला। लेकिन... आगे पढ़े

दुख: भी सहें

Updated on 14 December, 2019, 6:00
आज स्थिति यह है कि महात्मा बनना तो सब चाहते हैं, पर उनके अनुरूप कार्यो से जी चुराते हैं। बलिदान करने के समय हिचकिचाते हैं, वे महान कैसे बन सकते हैं। बादशाह ने सुना, मेरे राज्य में स्थान-स्थान पर रामायण का पारायण हो रहा है। उसे झुंझलाहट हुई। वह कहने... आगे पढ़े

सबसे बड़ा दरिद्र

Updated on 13 December, 2019, 6:00
सिंहगढ़ राज्य की सीमा के पास एक गांव सोनपुर में एक महात्मा अपने दो शिष्यों के साथ आ पहुंचे। वहां की शांति और हरियाली देख कुछ दिन वे वहीं ठहर गए। एक दिन महात्मा जी जब भिक्षा मांगने जा रहे थे, सड़क पर एक सिक्का दिखा, जिसे उठाकर उन्होंने झोली... आगे पढ़े

कर्म व्यर्थ नहीं होता  

Updated on 12 December, 2019, 6:15
अक्सर लोग कर्म और भाग्य के बारें में चर्चा करतें वक्त अपनें - अपनें जीवन में घट़ित घट़नाओं के आधार पर निष्कर्ष निकालतें हैं,कोई कर्म को श्रेष्ठ मानता हैं,कोई भाग्य को ज़रूरी मानता हैं,तो कोई दोनों के अस्तित्व को आवश्यक मानता हैं.लेकिन क्या जीवन में दोनों का अस्तित्व ज़रूरी हैं... आगे पढ़े

 व्यवहार की दुनिया

Updated on 12 December, 2019, 6:00
बहुत बड़ा कवि था इमरसन। वह घूमने निकला। अकस्मात वर्षा आ गई। उसके पास अपनी कविताओं की एक पांडुलिपि थी। भीगने के डर से उसने वह पांडुलिपि एक दुकानदार के पास रख दी। इमरसन चला गया। दुकानदार ने कहा कि पन्ने भरे हुए हैं, कुछ खाली हैं वह भरे हुए... आगे पढ़े

मन की तेज गति

Updated on 11 December, 2019, 6:00
नौका नदी के उस पार जा रही थी। अनेक व्यक्ति उस पर सवार थे। भार अधिक हो गया। नौका डगमगाने लगी। नाविक ने कहा - नौका डूब जाएगी। यदि सबको बचना है तो स्वयं को सुरक्षित रखते हुए अपना सारा सामान नदी में बहा दो, अन्यथा सामान के साथ-साथ प्राण... आगे पढ़े

चैतन्य रहें

Updated on 10 December, 2019, 6:00
एक बार दो देवताओं में विवाद हो गया कि भाग्य बड़ा है या पुरूषार्थ? विवाद हर व्यक्ति के मन में पैदा होता है, चाहे मनुष्य हो, चाहे देवता हो। निश्चित हुआ, परीक्षा करें। एक देवता ने कहा- देखो! भाग्य बड़ा नहीं होता, पुरूषार्थ बड़ा होता है। दूसरे ने कहा- नहीं!... आगे पढ़े

ज्ञान के रास्ते पर

Updated on 9 December, 2019, 6:00
गौतम बुद्ध के प्रवचन में एक व्यक्ति रोज आता था और बड़े ध्यान से उनकी बातें सुनता था। बुद्ध अपने प्रवचन में लोभ, मोह, द्वेष और अहंकार छोड़ने की बात करते थे। एक दिन वह व्यक्ति बुद्ध के पास आकर बोला- 'मैं लगभग एक महीने से आपके प्रवचन सुन रहा... आगे पढ़े

ईश्वर का दोस्त

Updated on 8 December, 2019, 6:00
एक संत ने एक रात स्वप्न देखा कि उनके पास एक देवदूत आया है। देवदूत के हाथ में एक सूची थी। उसने कहा, 'यह उन लोगों की सूची है, जो प्रभु से प्रेम करते हैं।' संत ने कहा, 'मैं भी प्रभु से प्रेम करता हूं। मेरा नाम तो इसमें अवश्य... आगे पढ़े

मन का प्रिय

Updated on 7 December, 2019, 6:15
एक प्रोफेसर अपने कमरे में बैठे थे। उनके पास एक व्यक्ति आकर बोला, 'धन्यवाद, आप जैसा परिश्रमी और योग्य प्रोफेसर मैंने नहीं देखा। आपके परिश्रम से ही मेरा लड़का उत्तीर्ण हो सका है। सौ-सौ साधुवाद!'  इतने में दूसरा व्यक्ति आकर बोला, 'आप जैसा परिश्रम से जी चुराने वाला प्रोफेसर मैंने... आगे पढ़े

मन को जगाएं

Updated on 6 December, 2019, 6:00
दूसरा महायुद्ध चल रहा था। भीषण बमवर्षा हो रही थी। पूरा लंदन नगर संत्रस्त था। सारे नगर में भय का साम्राज्य छाया हुआ था। पर उसी नगर में एक बूढ़ी महिला निश्चिंत रूप से सोती और निश्चिंत जागती। आस-पास के लोगों की नींद पूरी तरह गायब हो चुकी थी। वे... आगे पढ़े

अपना दृष्टिकोण 

Updated on 5 December, 2019, 6:00
एक कन्या ने अपने पिता से कहा, 'मैं किसी पुरातत्वविद् से विवाह करना चाहती हूं।'   पिता ने पूछा, 'क्यों?' कन्या बोली, 'पिताजी! पुरातत्वविद् ही एक ऍसा व्यक्ति होता है जो पुरानी चीजों को ज्यादा मूल्य देता है। मैं भी ज्यों-ज्यों पुरानी होती जाऊंगी, बूढ़ी होती जाऊंगी, मेरा मूल्य भी... आगे पढ़े

अनुभव का लाभ 

Updated on 4 December, 2019, 6:00
एक विदेशी राजा ने भारत पर आप्रमण करना चाहा। उसने सोचा कि आप्रमण से पूर्व यह जान लेना चाहिए कि उस राजा के पास कोई बुद्धिमान व्यक्ति है या नहीं? उस  राजा ने सुरमे की एक डिबिया देकर एक दूत भेजा। उस डिबिया में दो आंखों में ही लगाने लायक... आगे पढ़े

गुरु का पाठ 

Updated on 3 December, 2019, 6:00
गंगा के किनारे बने एक आश्रम में महर्षि मुद्गल अपने अनेक शिष्यों को शिक्षा प्रदान किया करते थे। उन दिनों वहां मात्र दो शिष्य अध्ययन कर रहे थे। दोनों काफी परिश्रमी थे। वे गुरु का बहुत आदर करते थे। महर्षि उनके प्रति समान रूप से स्नेह रखते थे। आखिर वह... आगे पढ़े

 प्रतिभा की पहचान 

Updated on 2 December, 2019, 6:00
यूनान के किसी गांव का एक लड़का लकड़ियां काटकर गुजारा करता था। वह दिन भर जंगल में लकड़ियां काटता और शाम को पास के शहर के बाजार में उन्हें बेच देता था। एक दिन एक विद्वान व्यक्ति बाजार से जा रहा था। उसकी नजर बालक के गट्ठर पर पड़ी जो... आगे पढ़े

विनम्रता का पाठ 

Updated on 1 December, 2019, 6:00
पंडित विद्याभूषण बहुत बड़े विद्वान थे। दूर-दूर तक उनकी चर्चा होती थी। उनके पड़ोस में एक अशिक्षित व्यक्ति रहते थे-रामसेवक। वे अत्यंत सज्जन थे और लोगों की खूब मदद किया करते थे। पंडित जी रामसेवक को ज्यादा महत्व नहीं देते थे और उनसे दूर ही रहते थे। एक दिन पंडित... आगे पढ़े

 सबसे बड़ी दौलत 

Updated on 30 November, 2019, 6:00
एक विधवा अध्यापिका के दो बेटे थे। वह उन्हें गुरुकुल में अच्छी शिक्षा दिला रही थी। वह खुद भी अनेक बच्चों को संस्कृत पढ़ाती थी। इससे उसे जो कुछ प्राप्त होता था, उसी से वह अपना जीवनयापन करती थी। उसने अत्यंत गरीबी के दिनों में भी कभी किसी के आगे... आगे पढ़े