Thursday, 14 November 2019, 8:13 PM

जीवन मंत्र

नासमझ रोता है भाग्य का रोना

Updated on 17 July, 2019, 6:00
धर्म कोई भी हो, लेकिन आस्थावान को अपने भाग्य पर उतना ही भरोसा होता है जितना कि जीवन और मरण में। वैसे भी मानव समाज में भाग्य को वो स्थान प्राप्त है जो कि किसी अन्य को हो नहीं सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अथक प्रयासों के बावजूद जो... आगे पढ़े

सदमार्ग पर चलें खुशियां मिलेंगी

Updated on 16 July, 2019, 6:00
प्रत्येक धर्म शास्त्र मानव को शिक्षा देते हैं कि किसी और की उन्नति, वैभव या संपन्नता को देखकर ईर्ष्या मत करो। यह नसीहत इसलिए दी जाती है क्योंकि आपकी ईर्ष्या से दूसरों पर तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, मगर आपका स्वभाव जरूर ईर्ष्यालु होकर बिगड़ जाएगा। किसी दूसरे की समृद्धि... आगे पढ़े

भगवान का स्मरण 

Updated on 15 July, 2019, 6:00
जहाँ भगवान का स्मरण चिन्तन होता है वह स्थान पवित्र माना जाता है। वहाँ के कण-कण में उस परमात्म-तत्त्व के परमाणु फैले रहते हैं। जो आदमी क्रोधी होता है उसके आसपास सात फीट के दायरे में क्रोध के परमाणु फैले रहते हैं। हर इन्सान एक पावर हाउस है। उसमें से... आगे पढ़े

खुश होने का दिखावा करने में ज्यादा खर्च होती है जीवन की ऊर्जा

Updated on 14 July, 2019, 6:00
आज की दौड़भाग भरी जिंदगी में कई लोग अंदर से दुखी हैं लेकिन बाहर से खुद को खुश दिखाने की कोशिश करते हैं। ये ही लोग दिखावा करने के अलावा खुद को जबरदस्ती खुश रखने की भी कोशिश करते हैं, लेकिन सदगुरू जग्गी वासुदेव के अनुसार इस तरह से बनावटी... आगे पढ़े

प्रेम में सीखें जीवन जीना

Updated on 13 July, 2019, 6:00
जीवन में प्रेम का साक्षात्कार महत्वाकांक्षा जीवन को ज्वरग्रस्त करने का मार्ग है। फिर क्या और कोई रास्ता नहीं हो सकता? रास्ता है। वह रास्ता है प्रेम का, महत्वाकांक्षा का नहीं। संगीत से प्रेम सिखाएं, दूसरे संगीत सीखने वाले से प्रतिस्पर्धा नहीं। गणित से प्रेम सिखाएं, दूसरे गणित के विद्यार्थी... आगे पढ़े

मूर्ति रुप में श्रीहरि

Updated on 12 July, 2019, 6:00
पुंडलिक भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था और श्रीहरि के दर्शनों की ईच्छा रखता था। इसके लिए वह हर तरह के जतन पूजा-पाठ, जप-तप और यज्ञ- अनुष्ठान करता रहता था। पुंडलिक की भक्ति से प्रसन्न होकर एक बार भगवान विष्णु उसके घर पर उसको दर्शन देने के लिए पहुंचे। उस... आगे पढ़े

आपकी सोच पर निर्भर है कर्म 

Updated on 11 July, 2019, 0:00
दो मित्र अक्सर एक वेश्या के पास जाया करते थे। एक शाम जब वे वहां जा रहे थे, रास्ते में किसी संत का आध्यात्मिक प्रवचन चल रहा था। एक मित्र ने कहा कि वह प्रवचन सुनना पसंद करेगा। उसने उस रोज वेश्या के यहां नहीं जाने का फैसला किया। दूसरा... आगे पढ़े

गरीब होने का अहसास 

Updated on 10 July, 2019, 6:00
पुराने जमाने की बात है तीनों लोकों के धन देवता कुबेर ने एक दिन सोचा कि मेरे पास इतनी संपत्ति है क्यों न उसका प्रदर्शन किया जाए। यह विचार कर उन्होंने एक भव्य भोज का आयोजन किया। तीनों लोकों के समस्त देवताओं को उन्होंने आमंत्रित किया। भगवान शिव उनके इष्ट... आगे पढ़े

अशांति का कारण होती हैं कामनाएं 

Updated on 9 July, 2019, 6:00
वर्तमान समय में अधिकांश मनुष्य विचारों के नाकारात्मक प्रभाव के वशिभूत है। यही वजह है कि संपूर्ण विश्व कहीं न कहीं युद्ध के कगार पर खड़ा नजर आ रहा है। भारतीय ही नहीं दुनिया के  नेताओं और धार्मिक शक्तियों के विचारों में सामंजस्यता नजर नहीं आ रही है।  वर्तमान समाज... आगे पढ़े

मौत का जश्न 

Updated on 8 July, 2019, 6:00
एक राजा थे जो अपने मंत्री के ज्ञान व उनकी चेतना से कुपित थे। एक बार मंत्री के जन्मदिन समारोह के दौरान जब सब खुशिंयां मना रहे थे तभी सैनिक राजा का संदेश लेकर पहुंचे और बोले कि आज शाम को मंत्री को फांसी दी जाएगी। यह सुनकर समारोह में... आगे पढ़े

अन्न के कण और आनंद के क्षण

Updated on 7 July, 2019, 6:00
महाकवि कालिदास रास्ते में थे। प्यास लगी। वहां एक पनिहारिन पानी भर रही थी। कालिदास बोले : माते! पानी पिला दीजिए बड़ा पुण्य होगा। पनिहारिन बोली : बेटा, मैं तुम्हें जानती नहीं। अपना परिचय दो। मैं पानी पिला दूंगी।  कालिदास ने कहा : मैं मेहमान हूं, कृपया पानी पिला दें।... आगे पढ़े

 सफलता मिलेगी दिल लगाकर करें काम

Updated on 6 July, 2019, 6:00
यह वह दौर है जहां सफलता के गुण बताने के लिए बकायदा क्लासें लगाई जाती हैं। सफल बनने के गुर बताते गुरु अब बहुतायत में मिलने लगे हैं। ऐसे में एक काफी समय पहले की बात याद आती है। तब गुरू गोविंद साहब के कुछ शिष्य उनके पास आए और... आगे पढ़े

सादगी में है महानता 

Updated on 5 July, 2019, 6:00
महान से महान व्यक्ति से जब आप मिलते हैं तो उसकी कोई न कोई बात से जरुर प्रभावित होते हैं, ऐसे में उसकी महानता यदि सादगी में नजर आती है तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। एक छोटी से कहानी सुनाता हूं। एक कंपनी के प्रौढ़ व्यवस्थापक ने... आगे पढ़े

चापलूसी सबसे बड़ी मूर्खता

Updated on 4 July, 2019, 6:00
कभी कभी किसी का संस्मरण भी इंसान को बेहतर राह दिखाने का काम कर जाता है। ऐसा ही एक संस्मरण अमेरिका के एक बड़े राजनेता ने लिखा, जिसमें उन्होंने बताया कि ‘लुहार की दुकान के सामने से एक दिन गुजर रहा था। उसका दूसरा साथी कहीं चला गया था। अकेला... आगे पढ़े

इष्ट के साथ विसर्जन मांगती श्रद्धा 

Updated on 2 July, 2019, 6:00
एक समय की बात है कि एक गुरुकुल में वर्षों से एक शिष्य अपने गुरु से शिक्षा ग्रहण कर रहा था। एक दिन वह यह देखकर अचंभित रह गया कि उसके गुरु तो पानी के ऊपर ऐसे चल रहे हैं मानों वो ठोस जमीन पर चल  रहे हों। यह देख... आगे पढ़े

मन को बनाएं अपना गुलाम  

Updated on 1 July, 2019, 6:00
जीवन में संन्यास का महत्व समझने और समझाने वाले मन को गुलाम बनाने का उपक्रम भी बताते हैं। ऐसे सन्यासियों के अनुसार मन का बदलाव, ध्यान और सन्यास संयुक्त घटनाएं हैं और मनुष्य के मन का नियम है कि निर्णय लेते ही मन बदलना शुरू हो जाता है। आपने भीतर... आगे पढ़े

सुनना सीखें ध्यान करना भी आ जाएगा 

Updated on 30 June, 2019, 6:00
व्यक्ति सुनता है तो विचार करता है, लेकिन जो सुनता ही नहीं है वह विचार आखिर कैसे कर सकता है। इसी संदर्भ में बताया जाता है कि तुम्हारे मन पर सतत् चारों तरफ से तरह-तरह के विचारों का आक्रमण होता है। स्वयं का बचाव करने के लिए हर मन ने... आगे पढ़े

श्रम का सम्मान करें जीवन में आएगी खुशहाली  

Updated on 29 June, 2019, 6:00
संत व साधु समेत विद्वान जब कहीं जाते हैं तो वहां की अच्छाइंयां भी अपने साथ ही ले आते हैं और फिर जो उनके सानिध्य में आता है वो उसका लाभ उन्हें पहुंचाते हैं। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि क्योंकि जब स्वामी सत्यदेव परिव्राजक ने अमेरिका यात्रा की... आगे पढ़े

भगवान मनुष्य के हृदय में 

Updated on 28 June, 2019, 7:00
ईश्वर ने तो चींटी से लेकर हाथी तक की रचना कर डाली, लेकिन तब सृष्टि में न तो कोई उत्पात मचा न झंझट ही खड़ा हुआ। न ईश्वर से किसी कुछ माँगा न कोई शिकायतें ही करता दिखा, किन्तु जब वह मनुष्य की रचना कर चुका तो परमात्मा उस दिन... आगे पढ़े

जीवन में सकारात्मक क्रांति

Updated on 27 June, 2019, 6:00
पृथ्वी पर अत्याचार का नाष करने ईश्वर ने समय-समय पर किसी ना किसी रूप में जन्म लिया और अत्याचार को खत्म किया। पौराणिक ग्रंथों में ऐसी कई कहानियों का उल्लेख है। भगवान ने स्वयं कहा है कि जब जब अत्याचार बढेगा। तो क्रांति होगी। यह क्रांति बुराई का अंत करने... आगे पढ़े

भले-बुरे में भाग्य का योगदान

Updated on 26 June, 2019, 6:00
एक ऐसा घोड़ा किसान के पास था जो राजा के अस्तबल में भी नहीं था। इस तरह किसान के घोड़े की ख्याति चारों ओर फैल गई। लोग मुँह माँगा मोल देने को तैयार दिख रहे थे, किन्तु किसान किसी कीमत पर घोड़ा बेचने को तैयार ही नहीं था। किसान को... आगे पढ़े

जीवनोपरांत अमरत्व

Updated on 25 June, 2019, 6:00
धर्म कहता है जीवन ऐसे जियो ताकि जीव को अमरत्व प्राप्त हो जाए। इसलिए कहते हैं कि जीवन में यदि कोई सिद्धांतवादी हो जाता है तो उससे मार्ग प्रशस्त करने को भी कहा जाता है। ऐसा सबसे बड़ा उदाहरण हमारे सम्मुख राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का है। जिनके जन्म दिन 2... आगे पढ़े

 मानव जीवन का महत्व   

Updated on 24 June, 2019, 6:00
यदि कभी मन में आत्महत्या का विचार आ भी जाए तो एक बार जरुर सोचें कि यह अनमोल शरीर क्या फिर कभी मिलने वाला है। इसे समझाने के लिए यहां एक कहानी प्रस्तुत है। यथा- एक समय की बात है, एक व्यक्ति नदी के किनारे आत्महत्या करने गया। पास ही... आगे पढ़े

असली आनंद की अनुभूति

Updated on 23 June, 2019, 6:00
उन दिनों स्वामी विवेकानंद अमरीका के भ्रमण पर थे। एक दिन वे भ्रमण एवं भाषणों से थके हुए अपने निवास स्थान पर लौटे। वे अमेरिका में एक महिला के अतिथि थे। वे अपना भोजन स्वयं बनाते थे। वे भोजन बनाकर खाने की तैयारी में थे कि कुछ बच्चे पास आकर... आगे पढ़े

आचार-विचार वाली मूर्खता 

Updated on 22 June, 2019, 6:00
एक बार एक अजनबी किसी के घर गया पर वह खाली हाथ आया ही था तो उसने सोचा कि कुछ उपहार देना अच्छा रहेगा तो उसने वहां के मेहमान कक्ष में टंगी एक पेंटिंग उतारी और जब घर का मालिक आया तो उसे वही पेंटिंग देते हुए कहा, 'यह पेंटिंग... आगे पढ़े

गलती का एहसास 

Updated on 21 June, 2019, 6:15
एक समय की बात है एक शहर के बुद्धिमान व्यक्ति के पास एक शख्स आया और उसने उनसे जानना चाहा कि उनके पास लोग तो बहुत हैं जो उसके कहने पर काम करते हैं, लेकिन उसके पास कोई भी विश्वासपात्र व्यक्ति नहीं है। उसने कहा कि 'मेरे कर्मचारी मुझसे बात... आगे पढ़े

अत्याचार का विरोध  

Updated on 20 June, 2019, 6:00
एक बार की बात है स्वामी विवेकानंद रेल में यात्रा कर रहे थे। वो जिस डिब्बे में बैठे थे, उसी में एक महिला भी अपने बच्चे के साथ यात्रा कर रही थी। एक स्टेशन पर जब ट्रेन रुकी तो दो अंग्रेज अफसर उस डिब्बे में चढ़े और महिला के सामने... आगे पढ़े

आनंद की वर्षा  

Updated on 19 June, 2019, 6:00
एक बार की बात है प्रभु यीशु एक झील के किनारे उपदेश दे रहे थे। वहां उपस्थित लोगों को वो बता रहे थे कि 'एक बार एक किसान ढेर सारे बीज लेकर अपने खेत में बोने ले जा रहा था। उसी समय रास्ते में उससे कुछ बीज गिर गए। उनमे... आगे पढ़े

आशा का दीप बनों 

Updated on 17 June, 2019, 16:15
एक समय की बात है एक महल के बड़े से कमरे में चार दीपक जल रहे थे। इसी के साथ कमरे के परिवेश में शान्ति छाई हुई थी। शान्ति भी ऐसी कि मंद स्वर में की जाने वाली बात-चीत को भी आसानी से सुना जा सकता था। कमरे में जल... आगे पढ़े

खुश होने का दिखावा करने में ज्यादा खर्च होती है जीवन की ऊर्जा

Updated on 17 June, 2019, 6:45
आज की दौड़भाग भरी जिंदगी में कई लोग अंदर से दुखी हैं लेकिन बाहर से खुद को खुश दिखाने की कोशिश करते हैं। ये ही लोग दिखावा करने के अलावा खुद को जबरदस्ती खुश रखने की भी कोशिश करते हैं, लेकिन सदगुरू जग्गी वासुदेव के अनुसार इस तरह से बनावटी... आगे पढ़े

बातचीतः परिवर्तनशील जगत में राम और रावण का युग आता-जाता रहता है- आबिद सुरती

Updated on 6 May, 2019, 14:29
'मासूम को गोरैया से न प्रेम था न ईर्ष्या थी. गोरैया खिड़की पर आ बैठे या छत में घोसला बनाए इसमें उसे क्या आपत्ति हो सकती है? फिर भी वह विचलित हो गई. गोरैया ने अपना घोंसला कहीं और नहीं उसके हृदय में बनाया था... यह उनके उपन्यास 'आधी स्त्री'... आगे पढ़े

स्त्री, युद्ध और ओशो : पढ़ें क्रांतिकारी विचार

Updated on 28 February, 2019, 6:45
स्त्री को अपनी मुक्ति के लिए अपने व्यक्तित्व को खड़ा करने की दिशा में सोचना चाहिए। प्रयोग करने चाहिए। लेकिन ज्यादा से ज्यादा वह क्लब बना लेती है, जहां ताश खेल लेती है, कपड़ों की बात कर लेती है, फिल्मों की बात कर लेती है, चाय-कॉफी पी लेती है, पिकनिक... आगे पढ़े

ध्यान का आधार

Updated on 21 December, 2018, 6:45
ध्यान में कुछ अनिवार्य तत्व हैं, विधि कोई भी हो, वे अनिवार्य तत्व हर विधि के लिए आवश्यक हैं। पहली है- एक विश्रामपूर्ण अवस्था, मन के साथ कोई संघर्ष नहीं, मन पर कोई नियंत्रण नहीं; कोई एकाग्रता नहीं। दूसरा, जो भी चल रहा है उसे बिना किसी हस्तक्षेप के, बस... आगे पढ़े

ध्यान का आधार

Updated on 16 December, 2018, 6:15
ध्यान में कुछ अनिवार्य तत्व हैं, विधि कोई भी हो, वे अनिवार्य तत्व हर विधि के लिए आवश्यक हैं। पहली है- एक विश्रामपूर्ण अवस्था, मन के साथ कोई संघर्ष नहीं, मन पर कोई नियंत्रण नहीं; कोई एकाग्रता नहीं। दूसरा, जो भी चल रहा है उसे बिना किसी हस्तक्षेप के, बस... आगे पढ़े

केवल इस तरह आप ईश्वर को कर सकते हैं प्राप्त, करें नियम पाल

Updated on 7 December, 2018, 7:00
जीवन में दिनचर्या की सहजता का बहुत महत्व है। सहजता से तात्पर्य है हमारे जीवन में आकार ले रही समस्त घटनाओं, क्रियाओं और स्थितियों-परिस्थितियों को सहज भाव-बोध के साथ स्वीकार करना और उसके अनुरूप अपने मानवीय कर्तव्यों का निर्वहन करना। जब हमें आत्मिक अवस्था में स्थिर रहते हुए यह ज्ञात... आगे पढ़े

जब विरोधियों ने स्वामी दयानंद के पास भेजी वेश्या, हुआ चमत्कार

Updated on 6 December, 2018, 7:15
मेरा कुछ भी नहीं है और मुझे कुछ नहीं चाहिए। यदि इतनी सी बात जीवन में आ जाए तो शांति और प्रसन्नता स्वाभाविक हो जाएगी। इंसान को अपने कल्याण के लिए सत्य के मार्ग पर चलते हुए असत्य का त्याग करना है। सुख-दुख साधन सामग्री है, जीवन नहीं। सुख भोग... आगे पढ़े

जीवन का मूल्य 

Updated on 4 December, 2018, 9:15
एक समय की बात है जबकि भगवान बुद्ध एक गाँव में ठहरे। एक आदमी आया और बोला, भगवान जीवन का मूल्य क्या है? मैंने कई बार इसे समझने की कोशिश की पर समझ नहीं पाया। मेरी जिज्ञासा शांत करे। बुद्ध ने उसे एक चमकता पत्थर दिया और कहा, जाओ और... आगे पढ़े

सफलता पाने के लिए इस तरह का जोखिम उठाना है जरूरी

Updated on 4 December, 2018, 6:30
बाइबिल में लिखा है कि हमें जो दिखता है, हम उसके सहारे नहीं, बल्कि अपने विश्वास के सहारे चलते हैं। प्रश्न है कि यह विश्वास क्या है और कैसे कार्य करता है? विश्वास और आत्मविश्वास में क्या अंतर है? हर व्यक्ति में कार्य करने की अपरिमित क्षमताएं अंतर्निहित होती हैं,... आगे पढ़े

इस तरह आप अपने सभी दुखों का कर सकते हैं अंत

Updated on 3 December, 2018, 7:00
ओशो इच्छाओं को त्यागना तब तक कठिन है जब तक आप जागृत नहीं होते। जब आप सुप्त अवस्था में होते हैं तो इच्छाओं का जगना एक प्राकृतिक घटना है। इच्छा एक स्वप्न के अलावा कुछ और नहीं है। जब आप जागते हैं तो स्वप्न गायब हो जाते हैं। आपको इच्छाओं के... आगे पढ़े

मृत्यु से पहले यह चीज हर किसी को पड़ती है छोड़नी, फिर होता है पछतावा

Updated on 21 November, 2018, 6:30
कई प्रकार के नशे हैं, जिन्हें मनुष्य अनेक माध्यमों से ग्रहण करता है। परंतु एक नशा है, जिसे किसी माध्यम की जरूरत नहीं होती। वह अपने आप बहुत ही सूक्ष्म रूप से हो जाता है और मनुष्य को पता भी नहीं चलता कि नशा चढ़ गया है। यह नशा है... आगे पढ़े

 मन के साधे सब सधे

Updated on 18 November, 2018, 9:15
यूं तो सामान्यजन के लिए मन को जीत पाना कठिन ही होता है पर मुश्किल नही। बिना मन को जीते जीवन में शांति सम्भव नहीं है। अशांति का कारण हमारी असीमित इच्छाएं ही हैं और इसके मूल में कोई बाहरी तत्व नहीं होता बल्कि हमारा अपना मन ही हैं। अन्य... आगे पढ़े

अन्न के कण और आनंद के क्षण

Updated on 16 October, 2018, 9:15
महाकवि कालिदास रास्ते में थे। प्यास लगी। वहां एक पनिहारिन पानी भर रही थी। कालिदास बोले : माते! पानी पिला दीजिए बड़ा पुण्य होगा। पनिहारिन बोली : बेटा, मैं तुम्हें जानती नहीं। अपना परिचय दो। मैं पानी पिला दूंगी।  कालिदास ने कहा : मैं मेहमान हूं, कृपया पानी पिला दें।... आगे पढ़े

 भारतीय शिक्षा पद्धति में दंड का वैज्ञानिक महत्त्व

Updated on 22 September, 2018, 9:37
प्राच्यविद्या  एक दृष्टिकोण यह सज़ा मास्टर जी क्यों देते हैँ, ये शायद उन्हें खुद भी नहीं मालुम होगा....... आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ये सज़ा भारत में प्राचीन गुरुकुल शिक्षा पद्धति के समय से चली आ रही है. तब यह सिर्फ उन बच्चों की दी जाती थी जो पढ़ाई में कमज़ोर... आगे पढ़े

मनुष्य के लिए इस जीवन में सबसे जरूरी हैं ये चीजें, देखिए क्या आपके पास है…

Updated on 8 September, 2018, 8:20
जीवन का अर्थ सिर्फ जन्म लेना और मरना नहीं है। यह क्रम तो हम अतीत में अनगिनत बार निभाते रहे हैं। जीवन वही सार्थक है जिसमें हम मनुष्य बनकर जिएं। मनुष्य देवता बनना चाहता है। मनुष्य का देवता होना कोई बड़ी बात नहीं है। देवता स्वयं चाहते हैं कि वह... आगे पढ़े

स्वयं को श्रेष्ठ समझना भी है अहंकार

Updated on 7 September, 2018, 10:45
ईश्वर ने जब संसार की रचना की तब उसने सभी जीवों में एक समान रक्त का संचार किया। इसलिए मनुष्य हो अथवा पशु सभी के शरीर में बह रहा खून का रंग लाल है। विभिन्न योनियों की रचना भी इसलिए की ताकि मनुष्य कभी इस बात का अहंकार न करें... आगे पढ़े

पैसे से अधिक महत्वपूर्ण है यह एक चीज, ऋषि ने पत्नी को बताया प्राप्ति का उपाय

Updated on 17 August, 2018, 6:40
प्रस्तुति: अर्चना झा इस भौतिकतावादी युग में हमारे जीवन की सभी क्रियाएं धन उपार्जन पर केंद्रित हैं। धन प्राप्ति के लिए हम कई बार अपनी आत्मा के स्वर को दबाकर गलत कार्य भी करते हैं, इसलिए धन तो हम अर्जित कर लेते हैं पर मन की शांति कहीं खो जाती है।... आगे पढ़े

बस दो मिनट सोचों

Updated on 12 August, 2018, 11:30
एक युवक ने विवाह के दो साल बाद परदेस जाकर व्यापार करने की इच्छा पिता से कही । पिता ने स्वीकृति दी तो वह अपनी गर्भवती पत्नी को माँ-बाप के जिम्मे छोड़कर व्यापार करने चला गया । परदेश में मेहनत से बहुत धन कमाया और वह धनी सेठ बन गया । सत्रह वर्ष धन कमाने में बीत गए... आगे पढ़े

अंदर ही मौजूद शक्ति को इस तरह पहचानें

Updated on 27 July, 2018, 8:20
दुनिया में सर्वत्र शक्ति की पूजा होती है। विडंबना यह है कि हर कोई विध्वंस को ही शक्ति मान रहा है, जबकि सबसे बड़ी शक्ति अध्यात्म है, आत्मा है। इंसान सबसे शक्तिशाली है। एक भी ऐसा प्राणी नहीं है जिसमें शक्ति न हो। यह सत्य भारत के अध्यात्म में ही... आगे पढ़े

इस चीज से इंसान निकल आए, फिर देखो जिंदगी की खूबसूरती

Updated on 9 June, 2018, 9:00
स्वामी अवधेशानन्द गिरि इच्छापूर्ति करने में मनुष्य का संपूर्ण जीवन नष्ट हो जाता है और वह इसके फंदे में फंसा का फंसा रह जाता है। इस चक्र से बाहर निकलने के लिए मनुष्य को गहराई से चिंतन-मनन करना चाहिए न कि चिंता। कारण कि जीवन के इसी मोड़ पर चिंतन-मनन की... आगे पढ़े

ऐसा होने पर मृत्यु से पहले ही मौत आ जाती है: ओशो

Updated on 8 June, 2018, 9:00
कामवासना का देवता शक्तिशाली नहीं है, तुम दुर्बल हो। इस बात को ठीक से स्मरण रखो कि कामवासना का देवता वाकई शक्तिशाली नहीं है। …और अगर तुम गिर गए हो तो उसकी शक्ति के कारण नहीं गिरे हो। तुम गिरे हो अपनी दुर्बलता के कारण। जैसे कि कोई सूखा जड़... आगे पढ़े