Monday, 24 September 2018, 12:42 PM

जीवन मंत्र

समस्याओं को समझें मिलेगी शांति

Updated on 26 June, 2015, 10:29
आम आदमी ज्यादातर अपनी तात्कालिक समस्याओं जैसे अभाव, बेरोजगारी, बीमारी, द्वंद आदि में ही घिरा रहता है। तो जीवन के गहरे मुद्दों की ओर वह कैसे ध्यान दे सकता है? लेकिन इसका जवाब ढूढें तो पाएंगे कि हम तत्काल के प्रति ज्यादा चिंतित रहते हैं दूर के प्रति हमारी दृष्टि... आगे पढ़े

जो आप नहीं हैं उसका दिखावा क्यों

Updated on 25 June, 2015, 10:38
अगर आप दिखावे के फेर में पड़ते हैं तो अपनी स्वाभाविकता को खोते हैं अपनी पहचान को खोते हैं और बदले में पाते कुछ भी नहीं। दूसरों की तरह दिखने का विचार हमारा बहुत नुकसान करता है। हर किसी के व्यक्तित्व में बहुत सारी खूबियां और कमियां होती हैं।   अपनी अच्छाइयों... आगे पढ़े

अनुभवों से भरा हमारा जीवन

Updated on 25 June, 2015, 10:37
मैं मानता हूं कि जीवन आवश्यक रूप से सुख और दु:ख, आनंद और कष्ट, सफलता और असफलता तथा प्रकाश और छाया का मिला-जुला रूप है और जब तक हम इनका अतिक्रमण करने की क्षमता नहीं प्राप्त कर पाते, हमें इनको अपनी अध्यात्मिक प्रगति,आवश्यक पड़ाव ही मानना चाहिए।   और यह कि प्रत्येक... आगे पढ़े

चालबाजियों में नहीं है जीवन का सुख

Updated on 24 June, 2015, 10:27
अगर हम खुद को श्रेष्ठ और बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं तो हमारे दिमाग में कई तरह की चालबाजियां आने पर भी हम उनमें भाग नहीं लेते। हम ईमानदारी से जीवन जीते हैं। चालाकियों के साथ हम दूसरों को प्रभावित तो कर सकते हैं लेकिन ये हमें... आगे पढ़े

जानिए समृद्धि का सूत्र

Updated on 24 June, 2015, 10:26
जीवन विचारों का प्रतिफलन है। यह 'जैसा बोया वैसा पाया' के सिद्धांत पर चलता है। विचार ही हमारे मित्र हैं और वही शत्रु भी। इसलिए विचारों को परखिए। चिंतन-मनन कीजिए। उसके बाद सिर्फ उन्हीं विचारों को ग्रहण कीजिए, जो उपयुक्त हों।   एक बात अक्सर कही जाती है कि 'खर्चे कम करो।'... आगे पढ़े

मन अभी भी भटकता है तो इस तरह लगाएं ध्यान में मन

Updated on 23 June, 2015, 9:40
ध्यान में एकाग्रता नहीं है तो उसका कारण है कि ध्यान के प्रति आपकी प्यास में कुछ कमी है। प्रेम जैसी लगन ध्यान में भी होना चाहिए केवल तभी आप आध्यात्मिक उत्कर्ष की राह पर बढ़ पाएंगे। जब तक आप ध्यान के लिए प्रयास नहीं करते तब तक उसमें मन... आगे पढ़े

प्रकृति के हर कण में होती है खुशी

Updated on 23 June, 2015, 9:38
जीवन परमात्मा का प्रसाद होता है। इसे यों भी कह सकते हैं कि जीवन पूर्ण परमात्मा की आंशिक अभिव्यक्ति है। इसलिए हम मानते हैं कि हमारे अंतर्मन में परमात्मा निवास करता है। परमात्मा प्राणरूप में हमारे सूक्ष्म और स्थूल शरीर का संचालन करता है। इसलिए जीवात्मा को परमात्मा भी कहते... आगे पढ़े

भय से भागें नहीं सामना करें कुछ इस तरह

Updated on 22 June, 2015, 18:54
जब हम अपने भय से नजरें चुराते हैं, तो वह हमें और भी डराता है। भय पर विजय पाने के लिए हमें उसकी आंखों में आंखे डालकर देखना होगा। तभी हम दुनिया की खूबसूरती का पूर्णता के साथ अहसास कर सकते हैं।   अधिकतर लोगों का जीवन सुखद और दुखद घटनाओं से... आगे पढ़े

शांति को बाहर नहीं अंदर महसूस करें

Updated on 19 June, 2015, 9:37
 क्या आप जानते हैं कि मनुष्य किस चीज का बना हुआ है? मनुष्य 6 चीजों से बना है- ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, कार्बन, कैल्शियम, फॉस्फोरस और नाइट्रोजन! चाहे वह अमेरिकन हो, ऑस्ट्रेलियन या अफ्रीकन हो! सत्तर प्रतिशत आप पानी हैं। पानी से आपको क्या दुश्मनी है? आप दूसरे मनुष्य से दुश्मनी क्यों... आगे पढ़े

सकारात्मक शक्ति के पीछे छिपे रहस्य का अनछुआ राज

Updated on 17 June, 2015, 12:13
सकारात्मक सोच रखने वाले अच्छे माता-पिता, अच्छे पति-पत्नी और अच्छे अधिकारी साबित होते हैं, जबकि नकारात्मक लोगों की पूरी ऊर्जा लोगों को गलत साबित करने में ही व्यय होती है। हम चाहें, तो अपने व्यक्तित्व को सकारात्मकता की ओर मोड़ सकते हैं। हमारा मन एक कंप्यूटर की तरह काम करता है... आगे पढ़े

लेखक बनने का मूलमंत्र

Updated on 14 June, 2015, 13:35
एक प्रसिद्ध लेखक के सम्मान में एक कॉलेज के छात्रों ने भोज का आयोजन किया। उस भोज में नगर के विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। छात्रों का इतना भव्य आयोजन देखकर लेखक बहुत खुश हुए। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने कहा कि, 'इस कॉलेज के छात्र बहुत उत्साही हैं।... आगे पढ़े

प्रतिकार से शांति की ओर..

Updated on 14 June, 2015, 10:22
भले ही सर्वोच्च आदर्श अप्रतिकार हो, किंतु यदि हम प्रतिकार नहीं कर सकते, तो उस तक नहीं पहुंच सकते... जब हम ‘अप्रतिकार’ की बात करते हैं, तब हमें यह ध्यानपूर्वक सोच लेना चाहिए कि हममें प्रतिकार की शक्ति है भी या नहीं। शक्तिशाली होते हुए भी यदि हम प्रतिकार न करें,... आगे पढ़े

महकता रहे जीवन

Updated on 14 June, 2015, 10:20
वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने के लिए पति-पत्नी दोनों को थोड़ा सा धीरज रखना होगा और समझदारी से काम लेना होगा... स्थायित्व की धारणा लंबा जीवन साथ गुजार रहे दंपतियों का कहना है कि उन्होंने यह कभी अपेक्षा नहीं की कि उनकी जिंदगी हमेशा खुशनुमा बनी रहे, लेकिन यह अपेक्षा जरूर की... आगे पढ़े

समस्याओं में छिपा है समाधान खोज कर तो देखिए

Updated on 12 June, 2015, 12:06
एक युवक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत था। वह अपनी जिंदगी से खुश नहीं था। वो हर समस्या से परेशान था और उसी के बारे में सोचता रहता था। एक बार शहर से कुछ दूरी पर महात्मा का काफिला रुका। जब उस युवक को पता चला तो वह भी दर्शन के... आगे पढ़े

आशा हमारे विश्वास का संबल है

Updated on 8 June, 2015, 12:20
आशावादी बनें, सफल जीवन का संपूर्ण आयाम आशा की उर्वर भूमि पर ही खड़ा होता है। आशा हमारे विश्वास का संबल है। हमारा जीवन स्वयं आशा का प्रतिबिंब है। अपने गुणों पर विश्वास से ही आशा बनी रहती है। आशावादियों के जीवन की कोशिकाएं क्रियात्मक बनी रहती हैं। वस्तुत: कर्म... आगे पढ़े

प्रेम की खूशबू ही उसका सही परिचय

Updated on 8 June, 2015, 9:21
कहते हैं कि 'जब अन्य चीजों को सीखने के प्रयास खत्म हो जाते हैं वहीं प्रेम प्रकट होता है। आप तभी प्रेम कर सकते हैं जबकि आप आधिपत्य की कोशिश नहीं करते हैं।' जब आपका दिल, दिमाग की चीजों चालाकियों से नहीं भरा होता, तब प्रेम से भरा होता है। एकमात्र... आगे पढ़े

जब हम ध्यान करते हैं तो ध्यान हमारे भीतर उतरता है

Updated on 8 June, 2015, 9:20
'जब हम ध्यान करते हैं तो अपने भीतर को समझने के प्रयास पर होते हैं। वहां तथ्य नहीं होते बल्कि अनुभव ही होते हैं। वहां खोज नहीं बस एक शांति होती है।' ध्यान, निस्तब्ध और सुनसान मार्ग पर इस तरह उतरता है जैसे पहाड़ियों पर सौम्य वर्षा। यह इसी तरह सहज... आगे पढ़े

अपना दुख चाहिए या किसी और का?

Updated on 7 June, 2015, 17:21
एक महात्मा को जब उनके श्रद्धालुओं और अनुयायियों ने बहुत तंग किया, तो वे हिमालय पर्वत पर रहने लगे। उन्हें ध्यान के लिए एकांत चाहिए था। मगर उनके बारे में श्रद्धालुओं को पता चल गया। श्रद्धालुओं को यह विश्वास था कि वे उन्हें दुखों और समस्याओं से छुटकारा दिला सकते... आगे पढ़े

एक सफल और सार्थक जीवन के लिए समझ और समझौता बहुत जरूरी है

Updated on 6 June, 2015, 9:40
एक सफल और सार्थक जीवन के लिए समझ और समझौता बहुत जरूरी है। व्यक्ति यदि समझौता करना नहीं जानता, तो छोटी-छोटी घटनाएं भी विकराल बन जाती हैं। समझौते के बगैर दुनिया में कभी काम नहीं चलता। महायुद्ध होता है, बड़ी-बड़ी लड़ाइयां होती हैं, वहां भी आखिर में समझौते और संधि... आगे पढ़े

हर आदमी के जीवन में किसी न किसी बात की लगन होती है

Updated on 6 June, 2015, 9:39
हर आदमी के जीवन में किसी न किसी बात की लगन होती है। यह लगन समाज सेवा से लेकर किसी भी प्रकार की हो सकती है। आपने देखा होगा कि कोई पुरानी वस्तुओं का तो कोई सिक्कों का, डाक टिकटों का तो कोई खाने-पीने या नए परिधानों के संग्रह का... आगे पढ़े

कहीं योजना बनाने में ही न घुट जाए आपका अनमोल जीवन

Updated on 2 June, 2015, 12:07
जब प्रेम होगा तो अपने-आप होगा, आपकी योजना के अनुसार नहीं। यह आपकी योजना का हिस्सा हो ही नहीं सकता क्योंकि योजना तो सिर्फ आपकी पिछली जानकारियों और अनुभवों से ही बनती है। अगर आपकी जिंदगी आपकी योजना के अनुसार ही चलती रहे तो कभी कोई नई चीज आपके जीवन... आगे पढ़े

अपने सिर पर आई मौत को भी मात दे सकते हैं

Updated on 2 June, 2015, 11:55
महावीर एक गांव के पास से गुजर रहे थे। उनका शिष्य गोशालक उनके साथ था, जो बाद में उनका विरोधी हो गया। दोनों एक पौधे के पास से गुजर रहे थे। गोशालक ने महावीर से कहा, यह पौधा देखिए। क्या सोचते हैं आप, इसमें फूल लगेंगे या नहीं लगेंगे? महावीर... आगे पढ़े

हमारे भीतर ही है प्रेरणा

Updated on 1 June, 2015, 13:39
हमारे रोजमर्रा के जीवन में चलने वाले अप्रत्यक्ष संग्राम को किसी हथियार से नहीं, बल्कि अपने भीतर छिपी शक्ति से ही जीता जा सकता है। स्वामी विवेकानंद के इस कथन के मुताबिक जब प्रेरणा अंदर से आएगी, तभी आप अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकेंगे... बच्चा रोज स्कूल के मैदान... आगे पढ़े

जब 'मन' नहीं होता तब होता है ध्यान

Updated on 31 May, 2015, 8:14
मन के माध्यम से ध्यान तक नहीं पहुंचा जा सकता। ध्यान इस बात का बोध है कि मैं 'मन' नहीं हूं। ध्यान चेतना की विशुद्ध अवस्था है। जहां न विचार होता है, न कोई विषय। साधारणत: हमारी चेतना विचारों से, विषयों से, कामनाओं से आच्छादित रहती है। जैसे कि कोई दर्पण... आगे पढ़े

मनुष्य की मुख्य समस्या है उसके जीवन में आने वाले दुखों की

Updated on 29 May, 2015, 10:11
 एक बार भगवान बुद्ध से किसी भिक्षु ने पूछा-भगवान! ईश्वर है या नहीं है? बुद्ध ने इसका सीधा उत्तर न देकर प्रश्नकर्ता भिक्षु से कहा-मनुष्य की समस्या ईश्वर के होने या न होने की नहीं है। मनुष्य की मुख्य समस्या है उसके जीवन में आने वाले दुखों की। भगवान बुद्ध... आगे पढ़े

यहां छिपा हैं जिंदगी से परेशान लोगों के लिए समाधान

Updated on 29 May, 2015, 8:15
जीवन कई चुनौतियों से भरा है। इनके दबाव से कई मौकों पर लोग टूट जाते हैं। वे महसूस करते हैं कि जितनी समस्याएं सामने हैं उनका वे मुकाबला नहीं कर पाएंगे। कई मर्तबा लोग महसूस करते हैं कि वे दुनिया की सबसे खराब नौकरी या काम कर रहे हैं। कुछ महसूस... आगे पढ़े

रिश्तों की डोरी में एक धागा मेरा एक तुम्हारा...

Updated on 28 May, 2015, 13:32
वो प्यार ही क्या जो चंद लफ्जों में बंध कर रह जाएं, ऊंच-नीच, जाति-धर्म और जन्म-उम्र से बंध जाएं। प्यार तो है बस मन का मिलना, ये आदत तो हर रंग संग रंग जाएं। ये मोहब्बत चीज क्या है? ये सवाल बार-बार जेहन में उठता है। सोचते-सोचते साल महिने और... आगे पढ़े

हर सुबह एक नया जीवन, नए मन से इसे जियो

Updated on 24 May, 2015, 8:06
ज़िंदगी में बहुत कुछ ऐसा घटित होता है। जिसके कारण हम काफी परेशान हो जाते हैं। ऐसे में धार्मिक प्रवचन और सकारात्मक विचार ही हमें इन समस्याओं से उबारने में बहुत मदद करते हैं। ऐसे में क्रांतिकारी संत मुनिश्री तरुणसागर के कड़वे प्रवचन बहुत ज्यादा कारक सिद्ध होते हैं। मुनि... आगे पढ़े

जब पत्नी हो सकती है प्रोफेशनल, तो पति क्यों नहीं हो सकता घरेलू

Updated on 23 May, 2015, 13:11
एक औरत घर, परिवार और बच्चे सब संभालती है। इतने सारे काम करती है पर उफ! तक नहीं करती पता है क्यों? क्योंकि उसके दिमाग में ये बचपन से डाला जाता है कि उसमें बहुत सहनशक्ति है, वो सारे काम कर सकती है और सबसे बड़ी बात जो उसके दिमाग... आगे पढ़े

क्यों सताता है मौत का डर

Updated on 20 May, 2015, 12:31
मौत अपने साथ भय और दुःख लाती है, और मौत से सामना होने पर, आम तौर पर मानव खुद को असहाय पाता है। क्या बिना डरे मौत का सामना किया जा सकता है? लियेन: मुझे मौत के समय भय की गैरकुदरती प्रक्रिया से डर लगता है क्योंकि आपने कहा था कि आपके... आगे पढ़े

धैर्य के साथ तलाशें जीवन का आनंद

Updated on 20 May, 2015, 9:13
जीवन एक बड़ा रहस्य है। जीवन को समझना वैसा ही है जैसे गद्य में छुपे पद्य को अनुभूत करना। प्रार्थना जीवन के प्रति हमारा विश्वास जमाने में मदद करती हैं। यह अलौकिक को समझने का दरवाजा है। अलौकिक शक्ति को तर्क के सहारे नहीं समझा जा सकता है उसे तो बस... आगे पढ़े

परिवार से मिलने वाले संस्कार हमें खूबसूरती से तराशते हैं

Updated on 18 May, 2015, 11:39
जिस तरह एक अनगढ़ पत्थर को शिल्पी सुंदर मूर्ति में बदल देता है, उसी तरह परिवार से मिलने वाले संस्कार हमें खूबसूरती से तराशते हैं। अगर पकड़ लें इसकी मजबूत डोर, तो मिल जाएगा तरक्की का स्थायी ठौर... पतंग उड़ा रहे थे पिता। बेटा उन्हें ध्यान से देख रहा था। पतंग... आगे पढ़े

आवश्यकता स्वयं को पहचानने की है

Updated on 16 May, 2015, 12:44
 स्वयं से स्वयं की पहचान यानी आंतरिक शक्ति का साक्षात्कार। आंतरिक शक्ति मनुष्य की जीवंत शक्ति होती है, जिसके बल पर वह ऐसे कार्य कर लेता है, जो आश्चर्यजनक होते हैं। यदि मनुष्य दृढ़ निश्चय कर लें तो वह किसी भी काम को आसानी से कर सकता है। सर्वप्रथम आवश्यकता... आगे पढ़े

हृदय और मन को उन्नत बनाने वाला कार्य ही हमारा कर्तव्य है

Updated on 15 May, 2015, 12:35
कोई भी कार्य करने से पहले यह जानना आवश्यक है कि कर्तव्य क्या है? विभिन्न जातियों में, विभिन्न देशों में इसके संबंध में भिन्न-भिन्न अवधारणाएं हैं। एक व्यक्ति कहता है कि मेरे धर्मग्रंथ में जो लिखा है वही मेरा कर्तव्य है। दूसरा कहता है कि मेरे धर्मग्रंथ में जो लिखा... आगे पढ़े

जीवन में व्युत्क्रम का सिद्धांत

Updated on 14 May, 2015, 12:16
जब हम विफलता पर चिंतन कर स्वयं में सुधार लाते हैं, तब हम सफलता का वरण करते हैं। व्युत्क्रम का सिद्धांत हमारे जीवन में काम आता है... बहुत छोटी अवस्था से ही कार्ल जैकोबी (कार्ल गुस्ताव जैकब जैकोबी) ने हर विषय पर गहरी पकड़ बना ली थी, लेकिन किशोरवय तक पहुंचते-पहुंचते... आगे पढ़े

जिंदगी और बता तेरा इरादा क्या है

Updated on 12 May, 2015, 11:58
सफलता पाने के लिए हमें खुद से सही सवाल पूछने होंगे, तभी हम सही उत्तर पा सकेंगे...-संजू, अगर मैं तुम्हें दो रुपये दूं, थोड़ी देर बाद फिर दो रुपये दूं तो तुम्हारी जेब में कितने रुपये होंगे? संजू ने कहा -मैडम जी, पांच रुपये। -बेटा, जब मैं तुम्हें दो रुपये दे रही... आगे पढ़े

शिष्टता विनम्रता का ही एक रूप है

Updated on 11 May, 2015, 17:00
 शिष्टता मानव जीवन का सौंदर्य है। गहन स्वाध्याय, परम अनुशीलन कठोर साधना और विद्यानुराग से इसका सीधा तादात्म्य है। विपरीत परिस्थितियों में अपने अस्तित्व को बचाए रखना शिष्टता के कारण संभव हो पाता है। शिष्टता प्रतिभा का एक अंतर्निहित नैसर्गिक तत्व है। इसे संरक्षित करके भविष्य के लिए पोषक बनाना... आगे पढ़े

जीवन हमेशा एक-सा नहीं रहता, परिवर्तन को स्वीकारें

Updated on 9 May, 2015, 12:43
जीवन हमेशा एक-सा नहीं रहता। परिवर्तन को स्वीकार कर ही हम अपनी हताशा-निराशा से उबर सकते हैं और समय के साथ चलकर अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं... धनी व्यक्ति को व्यवसाय में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। उसे लगने लगा कि उसकी जिंदगी में घटाटोप अंधेरा भर गया है। उसके... आगे पढ़े

हंसी हर जगह है बस हंसने के बहाने ढूंढिए

Updated on 7 May, 2015, 7:03
कन्नड़ लेखक एच. योगनसिंहम् ने महर्षि कर्वे ( भारतरत्न 1958 धोंडो केशव कर्वे) की आत्मकथा 'लुकिंग-बैक' का कन्नड़ में अनुवाद किया था। उनसे सिर्फ पत्र व्यवहार द्वारा ही परिचय था पर महर्षि कर्वे से वह कभी मिले नहीं थे। एक बार जब वे पूना गए तो वे महर्षि कर्वे से भेंट... आगे पढ़े

मिलेगी कॅरियर में कामयाबी

Updated on 5 May, 2015, 12:28
हम सभी अपने-अपने जीवन में आगे बढऩा चाहते हैं। यदि आप भी अपने कॅरियर में आगे बढऩा चाहती हैं तो अपनी योग्यता व कार्यक्षमता को पहचानें और उनका अपने स्तर से आकलन करें। अपनी शक्ति का आकलन किए बगैर आप आगे नहीं बढ़ सकतीं... कॅरियर काउंसलर रिद्धि सिंह का कहना है... आगे पढ़े

खुशनुमा पल जिंदगी के

Updated on 4 May, 2015, 13:06
क्या पैसा खुशी दे सकता है? क्या धन से संतोष खरीदा जा सकता है? यदि कहें हां, तो ढेर सारे सवाल पैदा होंगे। लेकिन इस बात में कोई दो राय नहीं कि कल्याणकारी कार्यों में लगा धन आत्मसंतोष तो देता ही है, साथ ही जिंदगी के हर पल को बना... आगे पढ़े

स्वयं को मूल्यहीन न समझें

Updated on 4 May, 2015, 7:20
व्यक्ति कई मौकों पर खुद को मूल्यहीन समझने लगता है। ऐसे में किसी भी तुलना से दूर रहते हुए खुद पर भरोसा रखकर आगे बढ़ना ही आपका मंत्र होना चाहिए। क्या वाकई मैं कुछ अच्छा काम नहीं कर रहा हूं? क्या मैं अपनी पूरी क्षमता से काम कर पा रहा हूं?... आगे पढ़े

जानिए भ्रम और ब्रह्म के बीच का फर्क

Updated on 1 May, 2015, 8:41
संस्कृत भाषा में परम सत्य को 'ब्रह्म' का नाम दिया है। 'ब्रह्म' परम सत्य का साकार रूप है। इस परम संभावना को ग्रहण करने में अगर जरा चूक हो, तो 'भ्रम' की स्थिति बन जाती है। इसलिए कहा है कि अज्ञानता और ज्ञान में बस जरा सा फर्क है। इस परम... आगे पढ़े

...टिस तब उठती है जब पहला प्यार अधूरा रह जाता है

Updated on 30 April, 2015, 13:33
न जाने कब से इस दिन का इंतजार था, बस मैं और आप हो दिल से दिल की बात हो, रूहों की सौगाते हो कुछ जवां रातें हो, प्यार हो....इश्क हो.....मुहब्बतें हो। इनके सिवा कुछ न हो । अगर मैं प्यार की बातें करूं तो शायद ही कोई ऐसा होगा।... आगे पढ़े

न होगी आपस में तकरार

Updated on 27 April, 2015, 13:06
अक्सर पति-पत्नी के बीच आपस में तकरार बेहद साधारण बातों की वजह से होती है। अगर दोनों थोड़ी सी समझदारी दिखाएं तो इस तकरार को आसानी से टाला जा सकता है - आपस में बहस से बचना चाहिए, इससे हासिल कुछ नहीं होता। मूल बात गहरे दब जाती है और फालतू... आगे पढ़े

एक के साथ दूसरी बीमारियों का खतरा

Updated on 25 April, 2015, 13:46
अकसर लोग मुख्य बीमारी के साथ पैदा होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर दोगुनी मुसीबत का सबब बन जाती है। सेहत की हिफाजत के लिए ऐसी शैडो डिजीज के बारे में जानना बहुत जरूरी है। पुरानी कहावत है कि कोई भी मुसीबत अकेले नहीं आती।... आगे पढ़े

कैसी हो आपकी पहली मुलाकात

Updated on 24 April, 2015, 13:03
सभी चाहते है कि किसी से पहली बार मिलने पर ऐसी छाप छोड़ें कि उसके मन-मस्तिष्क में उम्र भर के लिए अच्छी राय बन जाए, लेकिन ज्यादातर लोगों को यह तकनीक ही नहीं आती कि पहली ही मुलाकात में कैसे किसी को हमेशा के लिए अपना प्रशंसक बनाया जा सकता... आगे पढ़े

मित्रों से मिलती है खुशी

Updated on 22 April, 2015, 12:22
सच्चे दोस्त जीवन के हर मोड़ पर साथ देते हैं। इस बात से आप भी सहमत होंगी कि वे लोग तकदीर वाले होते हैं, जिन्हें अच्छे दोस्त मिलते हैं। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि यह एक अध्ययन का निष्कर्ष है। जर्मनी में हुए एक अध्ययन के अनुसार अच्छे... आगे पढ़े

खुद पर है कितना भरोसा

Updated on 21 April, 2015, 12:52
अपने सोचे कामों के लिए आप किसी पर भी निर्भर नहीं रहतीं या अपनी असफलताओं के लिए दूसरे को जिम्मेदार ठहराती है? आप आत्मनिर्भर है या टालू प्रवृलि की, वास्तविकता जानने के लिए कुछ प्रश्नों का जवाब ईमानदारी से दें 1. आपने दोस्तों के साथ घूमने का प्रोग्राम बनाया हो और... आगे पढ़े

मां ही मां को पहचाने

Updated on 20 April, 2015, 13:31
देखो-देखो कैसे हँस रही है, तुम जब छोटी थी तो बिल्कुल ऐसे ही हँसती थी। पता नहीं बड़ी होकर कैसी बनेगी, लेकिन अभी तो तुम्हारी ही डुप्लीकेट लग रही है। मुझे तो वह दिन याद आ रहा है जब तुमने मेरी गोद में अपनी आंखें खोली थीं। कुछ इसी तरह... आगे पढ़े