Tuesday, 21 August 2018, 11:10 AM

प्रेरक बातें

क्या आप भी बात-चीत करते हुए ऐसी ही गलती करते हैं

Updated on 20 December, 2013, 9:59
धर्मशास्त्रों में वाणी संयम पर बहुत बल दिया गया है। मनुस्मृति में कहा गया है, पारुष्यमनृतं चैव पैशुन्यं चापि सर्वशः। असंबद्ध प्रलापश्च वांग्मयं स्याच्चतुर्विधम्। अर्थात, वाणी में कठोरता लाना, झूठ बोलना, परनिंदा करना और व्यर्थ बातें बनाना- ये वाणी के चार दोष हैं। इन दोषों से बचने वाला व्यक्ति हमेशा... आगे पढ़े

असफलता भी दे जाती है खुशी

Updated on 19 December, 2013, 22:18
कृष्ण भगवान गीता में कहते हैं , ‘देवी ध्येषा गुणमयी मम माया दुरंत्यया’ अर्थात यह जो माया है, देवी गुण युक्त है. यह दिव्य है, दुरत्यं है. इससे आसानी से पार नहीं हो सकते, बिना मेरी कृपा के. मेरी ही कृपा से मेरी माया से तुम बाहर आ सकते हो. तुम... आगे पढ़े

ज्ञान वही है जो हमें सत्य की ओर ले जाए

Updated on 19 December, 2013, 15:16
ज्ञान वही है जो हमें सत्य की ओर ले जाए और सत्य वही है जो धर्म को स्थापित करे। ज्ञान तत्व प्रकाश जैसा होता है, जिससे वस्तुत: मनुष्य का जीवन रूपांतरित होता है। जीवन अर्थपूर्ण और यथार्थ के धरातल तक पहुंचता है। वहीं दूसरी तरफ अज्ञान से मनुष्य का समस्त... आगे पढ़े

आत्मा की चेतना को जगाने वाला ध्यान

Updated on 19 December, 2013, 13:02
उलझनों या आवेशों पर नियंत्रण जब तक नहीं होता, तब तक शक्ति का विकास कठिन है। इसलिए आज सबसे बड़ी मांग है कि प्रत्येक व्यक्ति ध्यान में प्रवेश करें। शक्ति के लिए जरूरी है कि शरीर और मन साथ में जुड़े रहें। शरीर एक काम करता है, तो मन दूसरा... आगे पढ़े

व्यवहार की शालीनता

Updated on 18 December, 2013, 11:14
सद्व्यवहार उस पुष्प के समान है जो धवल और दृढ़ चरित्र रूपी वृक्ष पर खिलता है। व्यवहार की शालीनता न केवल अन्य व्यक्तियों को प्रसन्न करती है, बल्कि शालीन व्यक्ति के मन-मस्तिष्क को भी आनंदित करती है। प्रख्यात विचारक और मनीषी श्रीअरविंद का कहना था कि जीवन के समस्त बाहरी क्रियाकलाप... आगे पढ़े

महाज्ञानी बनना है तो इस रहस्य को समझ लें

Updated on 17 December, 2013, 12:58
संसार में किसी से भी कह दें कि तुम अज्ञानी हो तो वह आपको मारने-पीटने के लिए दौड़ेगा। कारण यह है कि कोई भी अपने आपको अज्ञानी मानने को तैयार नहीं होता। जबकि सच तो यह है कि बड़ी-बड़ी उपाधियां और डिग्रियां लेकर ऊंचे पदों पर काम करने वाले व्यक्ति... आगे पढ़े

आत्मा को पता होता है उसे कौन सा शरीर मिलने वाला है

Updated on 17 December, 2013, 12:56
स्वामी शिवानंद सरस्वती जीवात्मा प्राण, मन तथा इंद्रियों के साथ मृत्यु के समय अपने पूर्व शरीर को छोड़ देती है और एक नया शरीर धारण करती है। अविद्या, शुभ-अशुभ कर्म तथा पूर्वजन्मों के संस्कारों को भी वह अपने साथ ही ले जाती है। जिस प्रकार कीड़ा दूसरी घास पर अपने पांवों... आगे पढ़े

ध्यान-तन्मयता का नाम समाधि

Updated on 16 December, 2013, 13:17
ध्यान के द्वारा परिवर्तन तभी संभव है जब ध्यान में जाने के लिए गहरी आस्था हो. आस्था का निर्माण हुए बिना ध्यान में जाने की क्षमता अर्जित नहीं हो सकती. कुछ व्यक्तियों में नैसर्गिक आस्था होती है और कुछ व्यक्तियों की आस्था का निर्माण करना पड़ता है. आस्था पर संकल्प का... आगे पढ़े

उस सेठ ने दान मांगने आई भगिनी निवेदिता को थप्पर क्यों मारा?

Updated on 9 December, 2013, 22:15
भगिनी निवेदिता ने एक दिन देखा कि स्वामी विवेकानंद कह रहे थे कि बेसहारा अनाथ बच्चे साक्षात भगवान के समान हैं। यह सुनकर भगिनी निवेदिता ने संकल्प ले लिया कि वह बंगाल में अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए एक आश्रम की स्थापना करेंगी। इसके लिए वह कोलकाता के धनाढ्यों... आगे पढ़े

बहुत जरूरी है वक्त पर सही फैसला लेना

Updated on 7 December, 2013, 12:15
कभी-कभी दो अच्छे इंसान भी साथ रहकर एक दूसरे की जिंदगी को दुखद बना देते हैं। वे अलग-अलग तो अच्छे होते हैं, पर आपस में घुल-मिल नहीं पाते। मेरी दोस्त रोहिणी के साथ ऐसा ही हुआ। उसकी अरेंज मैरिज को कुछ ही दिन हुए थे कि उसे लगा उसने गलत... आगे पढ़े

बुद्घि जरूरी है लेकिन अधिक बुद्घि नुकसान का कारण बन सकता है

Updated on 3 December, 2013, 8:43
संसार में धन दौलत से भी जिस चीज को अधिक महत्व दिया गया है वह है बुद्घि। लेकिन कहते हैं अगर बुद्घि जरूरत से अधिक हो जाए तो यह भी नुकसान कर जाती है। क्योंकि जितनी बुद्घि होगी उतना ही अधिक तर्क लगाएंगे परिणाम तर्क कुतर्क बन जाएगा। कुतर्क से... आगे पढ़े

धन दौलत नहीं घर को यह स्वर्ग बना देता है

Updated on 2 December, 2013, 8:09
सुधांशु जी महाराज अध्यात्मिक गुरु भारत वर्ष में एक महान् कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य हुए हैं। उन्होंने कहा है वह गृहस्थाश्रम धन्य है, स्वर्ग तुल्य है जिस गृहस्थाश्रम में ये विशेषताएं हों।      जिस घर में सदा प्रसन्नता दिखाई देती हो, जिस घर में हंसने की, मुस्कराने की स्थिति दिखाई देती हो, हंसने की... आगे पढ़े

सांप्रदायिकता और उसके इलाज पर क्या कहते थे शहीद भगत सिंह

Updated on 28 September, 2013, 14:14
'मेरी महबूबा तो आजादी है', लड़कपन की उम्र में यह कहने का साहस और संवेदनशीलता रखते थे शहीद भगत सिंह. आज उनका जन्मदिन है. उन्हें सलाम करते हुए हम सांप्रदायिकता की समस्या पर उनके विचार पेश कर रहे हैं. जून, 1928 के ‘किरती’ में छपा यह लेख सांप्रदायिकता पर भगत... आगे पढ़े

प्रसंग 14 सितंबर - हिंदी दिवस,विवशता न बने हिंदी दिवस

Updated on 12 September, 2013, 17:29
हमारे देश की राजभाषा और राष्ट्रभाषा देश की लगभग आधी आबादी की मातृभाषा भी है । वैधानिक प्रावधानों के बाद भी केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग की अनिवार्यता को लागू नहीं किया जा सका है । कहने को राजभाषा के समर्थन में खूब नारे... आगे पढ़े

तिल का यह निशान बताता है पूर्व जन्म में सांप थे

Updated on 27 June, 2013, 15:15
सभी के शरीर के किसी न किसी अंग पर ब्यूटी स्पॉट यानी तिल होता है। लेकिन ‌तिल केवल खूबसूरती ही नहीं बताता, ये पिछले जन्म के राज भी खोल देता है। तिल के विषय कई प्रकार की मान्यताएं हैं। एक मान्यता के अनुसार पूर्व जन्म में व्यक्ति को जिस स्थान पर... आगे पढ़े

2017 तक दुनिया की आधी आबादी हो जाएगी इंटरनेटमय

Updated on 5 June, 2013, 19:59
नई दिल्ली अगले साढ़े चार साल में दुनिया की करीब आधी आबादी इंटरनेट से जुड़ जाएगी और वैश्विक आबादी का 48 प्रतिशत इंटरनेट का उपयोग कर रही होगी। नेटवर्किंग कंपनी सिस्को के विजुअल्स नेटवर्किंग इंडेक्स (वीएनआई) अनुमान (2012-17) के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर, 2017 तक इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 3.6 अरब पर... आगे पढ़े

पेनकिलर का सेवन हार्ट अटैक को दावत

Updated on 31 May, 2013, 18:38
लंदन सामान्य दर्द निवारक दवाओं की हाई डोज का लंबे समय तक सेवन दिल के दौरे के जोखिम को बढ़ा देता है. इन दवाओं का सेवन कर रहे 350,000 से भी ज्‍यादा मरीजों पर किए गए एक अध्‍ययन में पाया गया कि उनमें हार्ट अटैक का खतरा 40 फीसदी ज्‍यादा है. अध्‍ययन... आगे पढ़े

नए रूप में आया जीमेल, ऐसे पा सकते हैं आप तुरंत

Updated on 31 May, 2013, 18:32
अगर आप जीमेल यूजर हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। आपका जीमेल इनबॉक्स जल्द ही नए रूप में नजर आएगा। साथ ही आपके लिए ई-मेल मैनेज करना अब और आसान हो जाएगा। आप अपने इनबॉक्‍स को अपने हिसाब से कंट्रोल कर सकेंगे। गूगल ने टैब सुविधा के साथ... आगे पढ़े

वंदे मातरम् विरोध, आस्था तो बहाना है

Updated on 15 May, 2013, 18:27
भारत चाँद नायक लोकतंत्र में देश की सर्वोच्च पंचायत संसद लोकतंत्र का पवित्र मंदिर है, जहां उच्चारित स्वर जन-जन तक पहुंचते और उनके मर्म का स्पर्श करते है। जन-मन को प्रफुल्लित और उल्लसित करते हे। संसद में उद्गमित आवाज जन-गण का स्वर बनती है। लेकिन यदि यहां राष्ट्र के स्वाभिमान, लोकतंत्र... आगे पढ़े

स्वामी जी का उपदेश

Updated on 26 March, 2013, 14:50
एक बार समर्थ स्वामी रामदासजी भिक्षा माँगते हुए एक घर के सामने खड़े हुए और उन्होंने आवाज लगायी स्वामी रामदासजी - “जय जय रघुवीर समर्थ !” घर से महिला बाहर आयी। उसने उनकी झोलीमे भिक्षा डाली और कहा, “महात्माजी, कोई उपदेश दीजिए !” स्वामीजी बोले, “आज नहीं, कल दूँगा।” दूसरे दिन स्वामीजी ने पुन:... आगे पढ़े

मूर्ख को उपदेश देना गलत

Updated on 26 March, 2013, 14:48
(भारतीय साहित्य की नीति कथाओं का विश्व में महत्वपूर्ण स्थान है। पंचतंत्र उनमें प्रमुख है। पंचतंत्र की रचना विष्णु शर्मा नामक व्यक्ति ने की थी। उन्होंने एक राजा के मूर्ख बेटों को शिक्षित करने के लिए इस पुस्तक की रचना की थी। पांच अध्याय में लिखे जाने के कारण इस... आगे पढ़े

दोनों प्रकार का धन एक साथ नहीं मिल सकता

Updated on 15 March, 2013, 13:56
संसार में दो प्रकार का धन होता है भौतिक धन और दूसरा आध्यात्मिक धन। मनुष्य का स्वभाव है कि वह ज्यादा से ज्यादा धन कमाने की चाहत रखता है। कोई व्यक्ति सोना, चांदी, रूपये पैसे का अंबार लगाकर धनवान कहलाता है तो कोई भूखा, प्यासा रहकर भी धनवान कहलता है।... आगे पढ़े