Monday, 23 April 2018, 8:45 PM

प्रेरक बातें

जब तक विश्वास है, प्रगति है, जब विश्वास नहीं दुर्गति शुरू

Updated on 15 July, 2015, 7:17
एक बार प्रभु यीशु को साइमन नाम के एक भक्त ने भोज के लिए आमंत्रित किया। प्रभु यीशु जब उस व्यक्ति के घर पहुंचे तो मैग्दालिन नाम की स्त्री ने उनके पैर पकड़ लिए और उन्हें धोने लगी। मैग्दालिन एक वेश्या थी। नगर में उसके चर्चे आम थे, इसलिए वह लोग... आगे पढ़े

आंतरिक उन्नति आवश्यक

Updated on 14 July, 2015, 13:11
उन्नति के लिए आंतरिक शक्ति आवश्यक है। संतों का दायित्व है कि वे युवाओं को आत्मिक बल दें। मोरारी बापू का चिंतन। युवा भारत की शक्ति बनें, इसमें संत समाज बड़ी भूमिका निभा सकता है। देश का युवा धरती मां का गौरव है। युवा का सिर्फ बलवान होना जरूरी नहीं।... आगे पढ़े

संवेदनशीलता कुछ इस तरह दिलाती है संतोष

Updated on 12 July, 2015, 22:01
संवेदनशीलता, मानव स्वभाव का एक अमूल्य भाव है, किसी भी क्षेत्र की ऊंचाई पर पहुंचे मनुष्य के भीतर संवेदनशीलता का सागर अवश्य होता है। इटली के शहर असीसी निवासी संत फ्रांसिस का जीवन भी ऐसा ही था। उनका जन्म 12वीं शताब्दी में एक प्रसिद्ध व्यापारी के यहां हुआ। फ्रांसिस एक उदार... आगे पढ़े

बुझने न दें कभी नेकी और शराफत का चिराग

Updated on 11 July, 2015, 13:33
इस्लाम धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए दो मुस्लिम व्यक्ति अरब देश के नज्द नामक कस्बे में पहुंचे। उन दिनों अरब में इस्लाम धर्म का काफी विरोध हो रहा था और मुसलमानों पर तरह-तरह के अत्याचार किए जा रहे थे। ऐसी स्थिति में नज्द के सरदार हारिस ने दोनों मुस्लिम व्यक्तियों को... आगे पढ़े

ऐसे लोगों में छिपे होते हैं महानता के बीज

Updated on 10 July, 2015, 7:21
एक दिन एक निर्धन बालक लकड़ी का गट्ठर लेकर शहर में बेचने आया। उसने लकड़ी के गट्ठर को इस कलात्मक ढंग से बांधा था कि एक सेठजी को पसंद आया। सेठजी ने पूछा, 'बेटा! ये गट्ठर इतने कलात्मक ढंग से किसने बांधा है ?' उस लड़के ने उत्तर दिया, 'जी मैनें।'... आगे पढ़े

ईश्वर की इच्छा

Updated on 8 July, 2015, 13:25
पुरानी बात है। एक व्यक्ति गरीबों, बीमारों और अशक्तों की सेवा करता। उसके भीतर करुणा और दया का सागर लहराता था। उसके गुणों से प्रसन्न होकर ईश्वर ने उसके पास देवदूत भेजा। दूत ने कहा कि ईश्वर आपको वरदान देना चाहते हैं। क्या आप लोगों को रोगमुक्त करने की शक्ति... आगे पढ़े

शास्त्रों से परे धर्म

Updated on 7 July, 2015, 14:00
धर्म के नाम पर झगड़े इसलिए होते हैं, क्योंकि झगड़ने वाले धर्म को जानते ही नहींऔर वे धार्मिक ग्रंथों की बातों में उलझे रहते हैं। धर्म को समझने के लिए ग्रंथों की नहीं, बल्कि स्वयं अनुभव करने की आवश्यकता है। एक बार भारत में विभिन्न संप्रदायों के प्रतिनिधि एकत्र हुए और... आगे पढ़े

जाति से नहीं कर्म से होती है पहचान

Updated on 5 July, 2015, 14:31
एक दिन राजकुमार अभय कुमार को जंगल में नवजात शिशु मिला। वह राजकुमार उसे अपने घर ले आया और उसका नाम जीवक रख लिया। अभय कुमार ने बच्चे को खूब पढ़ाया-लिखाया। जब जीवक बड़ा हुआ तो उसने अभय कुमार से पूछा, 'मेरे माता-पिता कौन हैं?' अभय कुमार ने उस जीवक से... आगे पढ़े

जब किसान के लिए जगह नहीं तो राष्ट्रपति के लिए भी नहीं

Updated on 4 July, 2015, 9:18
अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति टामस जैफरसन एक बार किसी बड़े से होटल में ठहरने के लिए गए। जैफरसन उस समय किसानों जैसी साधारण वेशभूषा में थे। होटल मालिक ने उन्हें साधारण आदमी समझकर जगह देने से इंकार कर दिया। वे चुपचाप चले गए। होटल मालिक तो उन्हें नहीं पहचान सका लेकिन... आगे पढ़े

विवेकानंद की पुण्यतिथि: और इस दुनिया से विदा ली...

Updated on 3 July, 2015, 13:48
4 जुलाई 2015 को स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि है। 113 साल पहले इसी दिन यानी 4 जुलाई 1902 को भारतीय चिंतन को समग्र विश्व में फैलाने वाले इस महापुरुष का अवसान हुआ था। आइए जानते हैं, स्वामीजी के जीवन के आखिरी दिन क्या हुआ था - 4 जुलाई 1902 आषाढ़ कृष्ण... आगे पढ़े

इस जहां में कुछ भी असंभव नहीं

Updated on 2 July, 2015, 7:49
अदम्य उत्साह के धनी थे नेपोलियन बोनापार्ट। युद्ध करते हुए एक बार जब नेपोलियन आल्पस पर्वत के पास अपनी सेना सहित पहुचें, तो पहाड़ ने उनका रास्ता रोक लिया। पहाड़ की तलहटी में एक वृद्धा रहती थी। रास्ते की जानकारी लेने जब नेपोलियन उसके पास पहुंचे तो नेपोलियन की बात सुनकर... आगे पढ़े

परमात्मा प्राप्ति के लिए है मनुष्य जन्म

Updated on 2 July, 2015, 7:10
सिद्धपीठ कालिका मंदिर, कालकाजी में सत्संग के अवसर पर महंत सुरेन्द्र नाथ ने कहा कि धन से श्रेष्ठ वस्तु होती है तथा वस्तु से श्रेष्ठ विवेक तथा विवेक से भी श्रेष्ठ सत-तत्व (परमात्मा) होता है। यह मनुष्य जन्म उस सत-तत्व की प्राप्ति के लिए ही है। सिद्धपीठ बालाजी धाम मंदिर, त्रिनगर... आगे पढ़े

सर्वे भवन्तु सुखिन:

Updated on 1 July, 2015, 12:32
विश्वभावना का विचार भारतीय संस्कृति की उदात्त भावनाओं का ही एक अंग है। वसुधैव कुटुम्बकम् (समस्त वसुधा ही परिवार है) और सर्वे भवन्तु सुखिन: (सभी लोग सुखी हों) की कामना और भावना हमारे यहां सनातन काल से रही है। हम सभी का जीवन, हमारा स्वभाव और कार्य-व्यवहार सभी में सबके... आगे पढ़े

स्वार्थ और परमार्थ के रंग

Updated on 30 June, 2015, 11:59
जो परमार्थ दिखावे के लिए होता है, वह स्वार्थ से भी बुरा है और जो स्वार्थ सबके हित में हो, वह परमार्थ से भी अच्छा है। कथावाचक मोरारी बापू का चिंतन... हम जितनी ऊंचाइयों के साथ देखते हैं, स्वार्थ को उतनी ही हेय दृष्टि से देखा जाता है। लेकिन मेरा मानना... आगे पढ़े

कैकेयी का वचन बना रावण की मृत्यु का कारण

Updated on 27 June, 2015, 16:08
राजा दशरथ की तीन रानियां कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी थीं, और उनके चार पुत्र श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुधन। श्रीराम की एक बहन भी थीं। जिनका उल्लेख महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में नहीं है। अयोध्या के राजा दशरथ पुत्र श्रीराम को प्राणों से भी ज्यादा स्नेह करते थे। श्रीराम के... आगे पढ़े

जानिए यह होता है धर्म का मर्म

Updated on 26 June, 2015, 10:33
एक दिन तपोनिष्ठ कौशिक एक वृक्ष के नीचे बैठे हुए थे। वो वेद पाठ कर रहे थे। तभी उनके ऊपर एक पक्षी ने बीट कर दी। उन्होंने सिर उठाकर देखा तो वहां एक बगुला था। कौशिश को बगुले पर बड़ा ही क्रोध आया। उन्होंने क्रोध भरी आंखों से उसको देखा... आगे पढ़े

मौन की महिमा से होते हैं चमत्कार

Updated on 25 June, 2015, 10:38
श्रीलंका की पहाड़ियों पर एक बौद्ध बहुल गांव था। वहां चोरी बहुत होती थीं इसलिए वहां के लोगों का एक दूसरे पर अविश्वास बढ़ता गया। एक दिन की बात है एक किसान की दुधारू गाय चोरी हो गई तो लोगों का आक्रोश फूट पड़ा।   गांव में पंचायत बुलाई गई। चोर खोजने... आगे पढ़े

ऐसे व्यक्ति होते हैं दुनिया के सबसे बड़े मूर्ख

Updated on 24 June, 2015, 10:24
एक साहूकार को धन एकत्र का बड़ा शौक था। उसे अपनी योग्यता का बहुत घमंड था। जब कोई महात्मा उसके दर पर आते तो वो उनका सम्मान तो करता लेकिन मन ही मन उन्हें भला-बुरा कहता रहता।   एक दिन उस साहूकार ने एक महात्मा जी को भोजन कराया। फिर एक आईना... आगे पढ़े

बंधन नहीं मुक्ति का परिचय है धर्म

Updated on 23 June, 2015, 9:41
हम सभी अपने धर्मों को श्रेष्ठ साबित करना चाहते हैं। हम दूसरे धर्मों की खूबियों के प्रति आंख मूंदे रहते हैं। सच्ची धार्मिकता तो तमाम तरह के बंधनों से मुक्त होने में ही है।   यह जीवन, यह अस्तित्व, यह दुनिया एक है, लेकिन हमारा मन इसे खंडों में बांट देता है... आगे पढ़े

प्रसन्नता लाता है ध्यान

Updated on 22 June, 2015, 8:53
ध्यान हमारे भीतर की शुद्धता के ऊपर पड़े क्रोध, ईष्र्या, लोभ, कुंठा आदि के आवरणों को हटाकर हमें सकारात्मक बनाता है... योग की ही अवस्था है ध्यान, जो हमें बहुत से लाभ देता है। पहला लाभ, शांति और प्रसन्नता लाता है। दूसरा, यह सर्वस्व प्रेम का भाव लाता है। तीसरा, सृजनशक्ति... आगे पढ़े

योग से समृद्ध होता जीवन

Updated on 21 June, 2015, 11:00
योग का ही परिणाम है पूरी सृष्टि। गणित के योग की तरह ही यह हमारे गुणों की अभिवृद्धि करता है। हमारे भीतर की चेतना को जगाकर हमें संस्कारवान और हृष्ट-पुष्ट बनाता है। योग के महत्व पर डॉ. प्रणव पण्ड्या का आलेख... बाहरी धन-संपदा से ज्यादा महत्वपूर्ण है भीतर कीसंपदा। अंतस... आगे पढ़े

सत्य आधा नहीं किया जा सकता

Updated on 19 June, 2015, 9:37
शक्ति हो भी सकती है, नहीं भी हो सकती है, न में भी खो सकती है। इसलिए योग मानता है, सृष्टि सिर्फ एक पहलू है, प्रलय दूसरा पहलू है। ऐसा नहीं है कि सब कुछ सदा रहेगा, खोएगा, शून्य भी हो जाएगा। फिर-फिर होता रहेगा, खोता रहेगा। जैसे एक बीज... आगे पढ़े

यदि हमारी दृष्टि नहीं बदल सकी तो धर्म का प्रयोजन ही क्या रहा

Updated on 19 June, 2015, 9:36
संन्यासी - शिष्य, आज मैं कहीं जा रहा हूं। तुम नए-नए आए हो, आश्रम का यह नियम है कि रात को अंधेरा नहीं रहना चाहिए। ध्यान रखना, आश्रम में अंधेरा न आ जाए। शिष्य नया-नया और भोला था। बहुत भोला। संन्यासी बाहर चला गया। संध्या हुई। अंधेरा होने लगा। शिष्य ने... आगे पढ़े

दीर्घायु बनने का रहस्य

Updated on 14 June, 2015, 15:37
एक बार चीन के विख्यात विचारक कन्फ्यूशियस से एक व्यक्ति मिलने आए। उन दोनों के बीच धर्म और दर्शन के माध्यम से अध्यात्म के अनेक पहलुओं पर चर्चा हुई। फिर उस व्यक्ति ने पूछा कि, 'अच्छा तो यह बताइए कि इस संसार में दीर्घायु कौन है?' कन्फ्यूशियस ने उस व्यक्ति की... आगे पढ़े

इन्होंने की थी ऐसी गलती, कहीं आप तो नहीं करते

Updated on 14 June, 2015, 13:34
एक गांव में एक वैद्य रहता था। दवा लेने के लिए कई लोग उसके पास आते रहते हैं। लेकिन उसकी दवा के खाने से दो-तीन लोगों की मौत हो गई। इसलिए अब कोई व्यक्ति उस वैद्य से इलाज करवाने नहीं आता था। ऐसे में वैद्य को भूखे ही सोना पढ़ता था।... आगे पढ़े

उचित व्यवहार से किसान हुआ आत्म प्रफुल्लित

Updated on 7 June, 2015, 8:52
यह उस समय की बात है जब अब्राहम लिंकन अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं बने थे। लेकिन प्रसिद्ध नेता के तौर पर लोग पहचानने लगे थे। एक दिन वे महत्वपूर्ण सभा में व्याख्यान दे रहे थे। उस सभा में लिंकन के गांव का एक किसान भी बैठा हुआ था। लिंकन की कोई... आगे पढ़े

मन सर्वाधिक तीव्रगामी व शक्तिशाली होता है

Updated on 6 June, 2015, 9:39
भारत के जिन मनीषियों ने परमात्म तत्व को जाना, सत्य पर अमल किया, उन्होंने जागरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सिर्फ सोते समय ही आदमी मूच्र्छित नहीं होता, बल्कि जिसे हम जाग्रत अवस्था कहते हैं, उस वक्त भी वह मूच्र्छित होता है। इन समस्त मूच्र्छाओं से जो... आगे पढ़े

प्रिंस के पवित्र स्पर्श से वो हो गया धन्य

Updated on 6 June, 2015, 9:29
विश्वयुद्ध के दिन थे। 'प्रिंस ऑफ वेल्स' एडवर्ड अष्टम एक दिन युद्ध में घायल लोगों को देखने इंग्लैंड के एक निजी अस्पताल में पहुंचे। जब घायलों से मिलकर वे बाहर गेट पर आए तो उन्होंने अस्पताल के अधिकारियों से कहा, आप लोग तो घायलों की संख्या 36 बता रहे हैं।... आगे पढ़े

जब चार्ल्स ने मारा नहले पर दहला

Updated on 3 June, 2015, 6:38
कथाकार चार्ल्स डिफेन्स की इंग्लैंड में ख्याति फैल गई तो एक दिन महारानी विक्टोरिया ने उन्हें अपने महल में आमंत्रित किया। जब वो वहां पहुंचे तो उन्होंने उनसे कहानी सुनाने का आग्रह किया। चार्ल्स परम स्वाभिमानी व्यक्ति थे। उन्हें महरानी के महल में पहुंचकर कहानी सुनाने में अपना अपमान महसूस हुआ।... आगे पढ़े

सेवा-कर्म पूजा के समान

Updated on 1 June, 2015, 13:36
अनासक्त होकर किए जाने वाले अच्छे कर्म कर्म-योग में आते हैं। संसारी लोग अगर अनासक्त होकर, ईश्वर पर भक्ति रखकर, उन्हें फल समर्पण करते हुए संसार के कर्म करें तो वह भी कर्मयोग है। इस युग में अनासक्त होकर कर्म करना बहुत ही कठिन है, परंतु कर्मयोग को कोई चाह... आगे पढ़े

प्रकृति के निकट लाता है गायत्री महामंत्र

Updated on 30 May, 2015, 13:13
हरिद्वार। गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ नहीं, संबंध स्थापित करना गायत्री मंत्र सिखाता है। गायत्री महामंत्र निष्काम भाव से कर्म करने की प्रेरणा देता है। गायत्री महामंत्र के सामूहिक रूप से नियमित जप करने से अपार शक्ति उत्पन्न होती है जिससे विश्व... आगे पढ़े

खोज कर तो देखिए ब्रह्मांड के अंधकार में भी है दर्शन

Updated on 29 May, 2015, 8:14
अंधेरा और उजाला, रात और दिन यूं तो जीवन का हिस्सा है। बात चाहे दैनंदिनी जीवन की हो या फिर प्रतीकात्मकता की। हर इंसान का जीवन दिन-रात की तरह ही होता है। अंधेरे और उजाले में बंटा हुआ। जैसे दिन और रात है, वैसे ही जीवन में सुख-दुख की तरह... आगे पढ़े

रामकृष्ण परमहंस को गुरु ने क्यों कहा खरा सोना

Updated on 29 May, 2015, 8:13
रामकृष्ण परमहंस शास्त्रों के सभी नियमों का पालन करते हुए तोतापुरी जी के शिष्य बन गए। गुरु शिष्य मर्यादा के अनुसार दीक्षा देने के बाद तोतापुरी जी उन्हें उपदेश देते। परमहंस की आंतरिक स्थिति उत्कट स्तर की थी। एक दिन तोतापुरी ने उनसे कहा, अब तुम अपने मन को निर्विकल्प... आगे पढ़े

हमें ईश्वर भक्ति से जुड़े रहना चाहिए

Updated on 28 May, 2015, 13:28
सीहोर। यदि आपने भगवान श्रीकृष्ण भगवान श्री राम का नाम मुख में स्थापित किया है तो ईश्वर आपकी रक्षा हर जगह करता है। भगवान का भक्त पाखंडी से भी बच जाता है। यह बात पंडित अजय पुरोहित ने श्रीमद् भागवत कथा के दिवस कही। पंडित अजय पुरोहित ने कहा कि... आगे पढ़े

अहं का त्याग है सुख

Updated on 26 May, 2015, 13:26
चेतना की परिधि में की गई कोई भी प्रगति आत्म-विकास है। आत्म-विकास का अर्थ है दुख के मार्ग पर बढ़ते जाना, दुख का अंत करना नहीं। यदि आप इसे ध्यानपूर्वक देखें तो यह बात स्पष्ट हो जाएगी कि दुख ही हमारे आत्मविकास में सहायक बनते हैं। यदि मन संपूर्ण दुख... आगे पढ़े

जादू की झप्पी से स्नेह की भाषा तक

Updated on 25 May, 2015, 7:46
बात उन दिनों की है जब देश आजाद नहीं था। सन् 1902, महात्मा गांधी को 6 वर्ष का कारावास की सजा हुई उन्हें यरवदा जेल भेजा गया। वहां का जेलर अंग्रेज था। वह गांधीजी को अंग्रेजी साम्राज्य का सबसे बड़ा शत्रु मानता था। इसलिए बापू के लिए जब सेवक देने... आगे पढ़े

जब एक बावर्ची ने उंड़ेल दी बादशाह पर सब्जी

Updated on 24 May, 2015, 8:05
एक बार बादशाह नौशेरवां भोजन कर रहे थे। अचानक खाना परोस रहे बावर्ची के हाथ से थोड़ी सी सब्जी बादशाह के कपड़ों पर छलक गई। बादशाह की त्यौरियां चढ़ गईं। जब बावर्ची ने यह देखा तो वह थोड़ा घबराया, लेकिन कुछ सोचकर उसने प्याले की बची सारी सब्जी भी बादशाह के... आगे पढ़े

मेरा अपना स्तर है, में निंदकों के स्तर तक क्यों जाऊं

Updated on 23 May, 2015, 6:53
रवीन्द्रनाथ टैगोर विशिष्ट कवि थे। वे विचारक ही नहीं, शांत साधक भी थे। वे भयमुक्त थे। उनका स्वभाव बहुत शांत था। लेकिन निंदकों को कौन रोक सका है। कुछ लोग रविन्द्रनाथ टैगोर जी की भी निंदा करते थे। एक बार उनके मित्र शरदबाबू ने टैगोर से कहा, 'मुझे से आपकी यह... आगे पढ़े

एक डॉक्टर का अनोखा प्रयोग

Updated on 22 May, 2015, 12:34
एक अनाथ व निर्धन छात्र एक प्रसिद्ध डॉक्टर के पास जाकर बोला, 'डॉ. साहब, मेरे पेट में पथरी है, आप ऑपरेशन कर दीजिए ।' जांच करने के बाद डॉ. ने कहा, 'ऑपरेशन में दो हजार रुपए खर्च होंगे। आप रुपए जमा करा दीजिए।' छात्र ने कहा, 'डॉ. साहब, में बहुत गरीब... आगे पढ़े

आइए जानें 251 ऐसे सपनें जिसे देखने से मिलता है ये फल

Updated on 22 May, 2015, 12:30
स्वप्न ज्योतिष के अनुसार नींद में दिखाई देने वाले हर सपने का एक ख़ास संकेत होता है, एक ख़ास फल होता है। आइए जानें 251 ऐसे सपनो के स्वपन ज्योतिष के अनुसार संभावित फल । सपने फल 1- आंखों में काजल लगाना- शारीरिक कष्ट होना 2- स्वयं के कटे हाथ देखना- किसी निकट... आगे पढ़े

यकीन कीजिए ईश्वर आपको जरूर मिलेंगे

Updated on 20 May, 2015, 9:12
एक बार संत रामदासजी के पास एक शिष्य आया और उसने पूछा, 'प्रभु मैं कौन सी साधना करूं ?' रामदासजी ने उत्तर दिया, 'कोई भी कार्य करने से पहले यदि तुम यह निश्चय करोगे कि वह भगवान के लिए किया जा रहा है तो तुम्हारे लिए यही साधना उत्तम होगी।' तुम... आगे पढ़े

संसार का नियम

Updated on 19 May, 2015, 12:51
चीन के प्रसिद्ध दार्शनिक लाओ-त्जु (ताओ ते चिंग) की कहानी है। एक दिन वह पहली बार मछली पकड़ने नदी पर गए। दरअसल, वह मछली पकड़ना सीखना चाहते थे। वे अपनी बंसी के हुक में चारा बांधकर नदी में डालकर किनारे छड़ी पकड़कर बैठ गए। कुछ समय बाद एक बड़ी मछली... आगे पढ़े

जहां जीवन है, वहां गति है

Updated on 18 May, 2015, 11:38
योगयुक्तो विशुद्धात्मा विजितात्मा जितेन्द्रिय:। सर्वभूतात्मभूतात्मा कुर्वन्नपि न लिप्यते॥5-7॥ अर्थ : अपने मन को वश में करने वाला, जितेंद्रिय, विशुद्ध अंत:करण वाला और सभी प्राणियों को अपना आत्मरूप मानने वाला कर्मयोगी कर्म करता हुआ भी उससे लिप्त नहीं होता है। भावार्थ : निष्काम कर्म को कर्मयोग में सर्वोच्च माना जाता है। जिस प्रकार विज्ञान... आगे पढ़े

मृत्यु के बाद धन नहीं स्वभाव साथ जाता है

Updated on 16 May, 2015, 8:21
साईं प्रज्ञाधाम मंदिर साकेत में सत्संग के अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी प्रज्ञानंद महाराज ने कहा कि यहां भगवान भी विद्यमान हैं, गुरु भी विद्यमान हैं, तत्वज्ञान भी विद्यमान है और व्यक्ति में योग्यता या सामर्थ्य भी विद्यमान है। केवल नाशवान सुख की आसक्ति ने ही उसकी प्राप्ति में बाधा डाल... आगे पढ़े

सुख और शांति के लिए अपने मन के भीतर झांकना चाहिए न कि बाहर

Updated on 16 May, 2015, 8:21
एक बार एक रानी नहाकर अपने महल की छत पर बाल सुखाने के लिए गई। उसके गले में हीरों का एक हार था। उसने उसे उतार कर आले पर रख दिया और बाल संवारने लगी। इतने में एक कौवा आया। उसने देखा कि कोई चमकीली चीज है, वह उसे लेकर... आगे पढ़े

पढ़िए एक आत्मा का खुला पत्र

Updated on 14 May, 2015, 12:18
मृत्यु के बाद मनुष्य का कुछ बाकी रहता है या नहीं ? यदि रहता है, तो किस अवस्था में और कहां रहता है ? परलोक किसे कहते हैं ? और वह कहां है ? ऐसे कई प्रश्न हैं जो आज के आधुनिक दौर में विज्ञान भी तलाश नहीं कर पाया... आगे पढ़े

मान सम्मान से परे एक मर्मस्पर्शी पत्र

Updated on 13 May, 2015, 8:47
सन् 1952 में इज़राइल के प्रथम राष्ट्रपति कैम वीजमान का निधन हो गया तो इज़राइल का राष्ट्रपति पद स्वीकारने के लिए महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन से प्रार्थना की गई। आइंस्टीन ने विनम्रता से उस प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया और इज़राइली राजदूत अब्बा एवान को एक पत्र लिखा। वो पत्र कुछ... आगे पढ़े

सुबह सुबह यह दिख जाए तो अपनी आंखें बंद कर लेनी चाहिए

Updated on 12 May, 2015, 12:09
मालवेश्वर भोज को राजसिंहासन पर बैठे कुछ ही दिन हुए थे। एक दिन प्रातःकाल वह अपने रथ पर आसीन होकर राजकीय उद्यान की ओर क्रीड़ा के लिए जा रहे थे। उनका रथ बड़ी तेजी से राजपथ पर बढ़ा जा रहा था। सहसा महाराज भोज ने रथ रोकने का आदेश दिया। वह... आगे पढ़े

ढाई आखर प्रेम का..

Updated on 11 May, 2015, 13:17
संत कबीर के अनुसार, विद्वान होने के लिए मोटी-मोटी पोथियां पढ़ने की नहीं, बल्कि खुद से, खुदा के बंदों से प्रेम करने की जरूरत है। यही पूजा है और यही परमात्मा से मिलन। संत कबीर जयंती (13 जून) पर आलेख.. धर्म के बारे में एक बेहद संजीदा सवाल अक्सर लोगों के... आगे पढ़े

झूठी शान दिखाने पर जाना पड़ सकता है नर्क

Updated on 11 May, 2015, 7:42
हाजी मुहम्मद एक मुस्लिम संत थे। वे कई बार हज यात्रा करके आए थे और नियमित पांचों वक्त की नमाज पढ़ते थे। एक दिन उन्होंने एक स्वप्न देखा, एक फरिश्ता स्वर्ग और नर्क के बीच में खड़ा है और वह सभी प्राणियों को उनके कर्म के अनुसार स्वर्ग और नर्क... आगे पढ़े