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कहानी

सौ चेहरे

Updated on 12 March, 2013, 15:18
    एक राजा, चला था लेने जायजा। अपनी प्रजा के बारे में हमेशा वह सोचता था, उन्हें कोई दुःख न हो यह देखता था। रास्ते में वह मिला एक किसान से, जो चल रहा था धीरे-धीरे मारे थकान के। राजा ने उससे पूछा 'तुम कितना कमाते हो, रोज कितना बचा पाते हो?' किसान... आगे पढ़े

भगवान का साथ

Updated on 12 March, 2013, 15:11
    एक समय की बात है। एक छोटे बच्चे ने जब बचपन से जवानी में प्रवेश किया। तब वह कहीं भी जाता तो उसके पदचिह्न के साथ एक और पदचिह्न नजर आते थे, लेकिन जब वह बूढ़ा हुआ तो ये पदचिह्न नजर आना बंद हो गए। जब वह मरने के बाद भगवान... आगे पढ़े

चतुर कविराज

Updated on 11 March, 2013, 16:24
    एक थे चतुर कविराज, उन्हें था अपनी अकल पर बड़ा नाज। वो थे भी होशियार, राजा भी उनकी हर बात मानने को हो जाते थे तैयार। एक दिन कविराज ने एक कविता लिखी, सुनकर राजा की तबियत खिली। बोले-'बोलो क्या माँगते हो, क्या इनाम चाहते हो।' कविराज ने सोचा देखते हुए... आगे पढ़े

जादूगर चाचा...

Updated on 11 March, 2013, 16:22
    पंडित जवाहरलाल नेहरू मजेदार बातों के एक ऐसे जादूगर भी थे, जो एक मिनट के भीतर क्या से क्या कर सकते थे? नेहरूजी को भाषा पर अधिकार था। वे बहुत अच्छा बोलते थे। जीवन भर तुनकते-तपते नेहरूजी, संसार में अपनी, भारत की और अहिंसा की नीति का आदर पाकर अपनी सारी... आगे पढ़े

अकल की दुकान

Updated on 1 March, 2013, 12:51
एक था रौनक। जैसा नाम वैसा रूप। अकल में भी उसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता था। एक दिन उसने घर के बाहर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा- 'यहां अकल बिकती है।' उसका घर बीच बाजार में था। हर आने-जाने वाला वहां से जरूर गुजरता था। हर कोई बोर्ड देखता, हंसना और... आगे पढ़े