Wednesday, 21 February 2018, 10:22 AM

कविता

शहरे दिल का हरिक अब मकां बन्द है

Updated on 14 June, 2013, 18:04
ग़ज़ल -          उषा यादव ‘ उषा ‘   शहरे दिल का हरिक अब मकां बन्द है, ‘ सुख परिंदा ’ भी आखि़र कहां बन्द है ।   गूंगे आतुर हुये बोलने के लिये, पर ज़बां वालों की तो ज़बां बन्द है ।   एक ऑंधी उठे हुक़्मरॉ के खि़लाफ़, दिल में कब से घुटन ये धुऑं बन्द है... आगे पढ़े

जिंदगी

Updated on 9 June, 2013, 14:57
(उषा यादव जी देश की प्रमुख गज़ल़कारों में शुमार की जाती हैं. वर्ष 1991 से लगातार देश की विभिन्न पत्र – पत्रिकाओं में उऩकी ग़ज़लें पाठकों को आनंदित करती रहती हैं . उनकी प्रकाशित रचनाएं अमराईयां औऱ सोजे निहाँ काफी पसंद की जाती हैं . विद्यावाचस्पति , सारस्वत सम्मान से... आगे पढ़े

जनम से पहले मार न देना...

Updated on 6 June, 2013, 19:52
चाहे मुझको प्यार न देना , चाहे तनिक दुलार न देना कर पाओ तो इतना करना , जनम से पहले मार न देना !! मैं बेटी हूँ , मुझको भी है जीने का अधिकार, मैया जनम से पहले मत मार ! बाबुल जनम से पहले मत मार.. !!   मेरा दोष बताओ मुझको क्यों बेबात सताओ मुझको, मैं... आगे पढ़े

पानी…

Updated on 2 June, 2013, 17:51
पानी जब नहीं देखता, जात-धर्म-प्रखंड, तब मानव क्यों रचता, इन सब पर पाखंड, पानी नित शीतल ही करता, राजा हो या रंक, प्यास बुझाता सब जन की, रहता सदा अखंड, रुप नहीं कोई पानी का, और ना ही कोई रंग, ढल जाता है उस आकार में, रहता जिसके संग, जाति- धर्म को देखता, केवल  मानुस जात, पानी... आगे पढ़े

इंतज़ार

Updated on 28 May, 2013, 15:34

काफ़िर ( मुक्तक )

Updated on 28 May, 2013, 14:56
 ( कवि “ सिफर “ जबलपुर ) मैं काफ़िर हूं क्योंकि मेरा खुदा तुम हो, तुम्हें देखने की तमन्ना नहीं किसी की ,  कौन मुझे काफिर कह पत्थर मारता है, वही जिनके दिलों में खुदा नहीं शैतान है,  खून बहाता है रोज रोज वो काफिर कह कह, खुद को खुदा का बंदा समझ रहा है ,... आगे पढ़े

दोस्ती

Updated on 13 May, 2013, 13:21
अर्थ मतलब पैसा नहीं अर्थ मतलब सहनशक्ति कि इस भूमि पर संघर्ष भी नहीं अर्थ मतलब सबके रहते हुए सब कुछ रहते हुए भी दिल के बहुत करीब कोई दोस्त नहीं उस जीवन का कोई अर्थ नहीं !   -       रंजना झाला, मुंबई ... आगे पढ़े

‘मां’

Updated on 12 May, 2013, 13:43
डॉ. कुंअर बेचैन कभी उफनती हुई नदी हो,  कभी नदी का उतार हो मां रहो किसी भी दिशा-दिशा में,  तुम अपने बच्चों का प्यार हो मां   नरम-सी बांहों में खुद झुलाया,  सुना के लोरी हमें सुलाया जो नींद भर कर कभी न सोई,  जनम-जनम की जगार हो मां   भले ही दुख को छुपाओ हमसे,  ... आगे पढ़े

लड़कियाँ, तितली सी होती हैं

Updated on 26 April, 2013, 19:10
  लड़कियाँ, तितली सी होती है जहाँ रहती है रंग भरती हैं चौराहे हो या गलियाँ फ़ुदकती रहती हैं आंगन में धमाचौकड़ी करती चिडियों सी   लड़कियाँ, टुईयाँ सी होती है दिन भर बस बोलती रहती हैं पतंग सी होती हैं जब तक डोर से बंधी होती हैं डोलती रहती हैं इधर उधर फ़िर उतर आती हैं हौले से   लड़कियाँ, खुश्बू की तरह होती हैं जहाँ रहती... आगे पढ़े

यकीन..

Updated on 22 April, 2013, 20:14
है यकीन होगा वही,है जैसा मैंने सोचा  पर्वत सा ऊँचा अटल,है मेरा इरादा  कठिन है डगर,पर गडी है नज़र  लक्ष्य को है पाना,जाना जिस पर चलकर   कर दिया है हमने आगाज़  फिर डर कैसा,जब मंजिल हो साफ़  बाधाओं से नही है डरना  करके सीना चौडा,है आगे बड़ते जाना....   -रोहित जौहरी                                ... आगे पढ़े

लड़ो कि तुमको लड़ना है

Updated on 12 April, 2013, 15:10
लड़ो कि तुमको लड़ना है लड़ कर जीने का हक हासिल करना है। ये दुनिया जो तुम्हें गर्भ से इस दुनिया में आने के लिए प्रतिबंधित करती है ... आने के बाद हर पल तुमसे तुम्हारे लड़की होने का हिसाब मांगती है। हिसाब देते-देते तुम्हारी जुबान भले ही थक जाए, पर उनके प्रश्न नहीं रूकते। आओ इन प्रश्नों को बदल दें, इन... आगे पढ़े

तुम अपने आप में पूरी हो जाना

Updated on 12 April, 2013, 15:08
जब कोई तुमसे यह बोले तुम तो देवी हो उससे तुम सजग रहना जब कोई तुमसे बोले तुम तो ममता हो उससे तुम सचेत रहना जब कोई तुमसे बोले तुम स्नेह की प्रतिमा हो उससे तुम बच कर रहना जब कोई तुमसे बोले तुम ही चरित्र हो उससे तुम दूरी बना लेना जब कोई तुमसे बोले चुप रहना... आगे पढ़े

मां की अभिलाषा

Updated on 6 April, 2013, 14:50
उड़ जा, उड़ जा, भर सपनों में नई दिशा, खुल जा, खुल जा, नए पंख तू लगा, उड़ जा उस जहान में, जहां मंजिल करे तेरा इंतजार, नए रंग तू सजा, नये जहान में तू जा, अब रोक ना पाए कोई तुझे, जा नई दुनिया तू सजा, जहां तेरा मान हो सम्मान हो, तेरी अपनी एक पहचान हो, उड़ जा, उड़ जा, भर... आगे पढ़े

आने दो बेटियों को धरती पर

Updated on 6 April, 2013, 14:49
आने दो बेटियों को धरती पर मत बजाना थाली चाहे वरना कौन गाएगा गीत अपने वीरों की शादी में आने दो बेटियों को धरती पर पनपने दो उनके भ्रूण वरना कौन धारण करेगा तुम्हारे बेटों के भ्रूण आने दो बेटियों को धरती पर मत बजाना थाली चाहे।                          चंचल फौजदार ... आगे पढ़े

सीख-चिड़ियाघर से

Updated on 28 March, 2013, 15:28
 शेर - जंगल में अपनी ताकत का मुझको था बड़ा ही घमंड फँस गया एक दिन जाल में पिंजरे में होना पड़ा बंद। बंदर - देखो हम उछलते-कूदते बच्चों तुम हँसते रहते हम भी शायद आदमी होते सदा ना हम पेड़ पर होते। भालू - चोरी, चुराने की आदत शहद खाए बिना मेहनत सजा मिली है मुझे देखो बंद पड़ा हूँ पिंजरे अब। कबूतर - खूब... आगे पढ़े

हाथी और तितली

Updated on 28 March, 2013, 15:22
     हाथी पर हुई सवार रंग-बिरंगी तितली हाथी बोला 'पीठ दर्द से हुई हालात मेरी पतली' तितली झल्लाकर बोली हमसे करो न ठिठोली क्या तुम लखनऊ से आए जो दिखाते नजाकत इतनी? बड़े-बड़े बोझ ढोते तब नहीं होती हालत पतली? हाथी बोला 'बहुत प्यारा रंग रूप तुम्हारा, बड़ी अदा से तुम उड़ती दिल चाहता देखा करूँ तुम्हें तुम लगती मुझे बहुत अच्छी पीठ पर जो... आगे पढ़े

खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी……….

Updated on 22 March, 2013, 14:52
सिंहासन हिल उठे राजवंषों ने भृकुटी तनी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सब ने मन में ठनी थी. चमक उठी सन सत्तावन में, यह तलवार पुरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी... आगे पढ़े

लो जी वो मेरे दीवाने हो गए है….

Updated on 22 March, 2013, 14:51
मेरी खामोशी के किस्से पुराने हो गए है, लो जी वो मेरे दीवाने हो गए है। नफरत थी उन्हें मेरे जिन गीतों से कभी आज उनके लबो के तराने हो गए गए है। मेरे घरोदें पर हंसते देखा था उन्हें, मेरे घर अब उनके घराने हो गए है। नए नए आशिक की खुशबू है उनमे वो कहते... आगे पढ़े

गिलहरी आई

Updated on 17 March, 2013, 14:31
        सुन्दर गिलहरी आई अनुशासन की सीख लाई दाने खा इठलाती आई नन्हे हाथ हिलाती आई थकती नहीं है चलने में सोती नहीं है पलने में दाने बीच उठाकर चलती मिट्टी में भी दबाती चलती हाथ-पैर इसके फुर्तीले पीठ पर पट्टे सफेद-काले हमें देखकर यह शरमाई पेड़ों पर चढ़कर इतराई लंबी दूरी तय करती है समझबूझ से यह चलती है चंचल और छरहरी आई देखो सुन्दर... आगे पढ़े

यही सयानो काम

Updated on 17 March, 2013, 14:28
    फल मंडी की आमसभा में पपीता था गुर्राया इतने गुण हैं मुझमें जानो एक-एक था गिनाया फुसफुसाकर अनार बोला मैं क्या किसी से कम हूँ एक अनार और सौ बीमार हों करता ताजा दम हूँ- भौंहें तिरछी कर बेर बोला मुझमें बड़ी है खूबी मेरे स्वाद का मजा अनोखा मुझसी चीज न दूजी बेर की बात सुन, सेब हँस पड़ा- बोला फिर बड़बोला बड़े-बड़े शहरों... आगे पढ़े

हीजड़ा और जानवर फिर भी तुझसे बेहतर है

Updated on 16 March, 2013, 14:00
  मर्द कभी बलात्कार नहीं करते हैं माँ की कोख शर्मशार नहीं करते हैं मर्द होते तो लड़कियों पर नहीं टूटते मर्द होते तो आबरू उनकी नहीं लूटते मर्द हमेशा दिलों को जीत-ता है कुचलना नामर्दों की नीच-ता है बेटियां बहन मर्द के साए में पलती हैं मर्द की जान माँ की दुवाओं से चलती है मर्द नहीं फेकते... आगे पढ़े

“खिचड़ी खूब पकाओ”

Updated on 16 March, 2013, 13:59
धनु से मकर लग्न में सूरज, आज धरा पर आया। गया शिशिर का समय और ठिठुरन का हुआ सफाया।। गंगा जी के तट पर, अपनी खिचड़ी खूब पकाओ, खिचड़ी खाने से पहले, निर्मल जल से तुम नहाओ, आसमान में खुली धूप को सूरज लेकर आया। गया शिशिर का समय और ठिठुरन का हुआ सफाया।। स्वागत करो... आगे पढ़े

मुखौटों की दुनिया

Updated on 15 March, 2013, 14:13
मुखौटों की दुनिया मे रहता है आदमी मुखौटों पर मुखौटें लगाता है आदमी| बार बार बदलकर देखता है मुखौटा, फिर नया मुखौटा लगाता है आदमी| मुखौटों के खेल मे इतना माहिर है आदमी, गिरगिट को भी रंग दिखाता है आदमी| शैतान भी लगाकर इंसानियत का मुखौटा, आदमी को छलने को तैयार है आदमी| मजहब के ठेकेदार भी अब... आगे पढ़े

पानी की बचत

Updated on 12 March, 2013, 15:30
    टिंकू खूब नहाता था पानी व्यर्थ बहाता था। ट्यूबवेल था जो घर में पानी दिन भर आता था। टिंकू के दादा सयाने थे समाज सेवी जाने-माने थे। उन्होंने टिंकू को पास बैठाया प्यार से उसे बहुत समझाया। वर्षा का जल धरती में बूँद-बूँद करके इकट्ठा होता है। सुरक्षित भंडार के रूप में यह धरती में सोता रहता है। विज्ञान की उन्नति का सुखद... आगे पढ़े

राष्ट्रभाषा

Updated on 12 March, 2013, 15:28
     कितनी सुंदर, कितनी प्यारी, हिंदी हर भाषा से न्यारी। क्यों हम अंग्रेजी को अपनाएँ, गैरों को क्यों शीष झुकाएँ? अपनी हिंदी न्यारी-प्यारी, असंख्य शब्दों की फुलवारी। हिंदी सीखो, हिंदी बोलो, हिंदी को हर दिल में घोलो। अपनी भाषा वैभवशाली, फिर हम क्यों बने भिखारी। कितनी सुंदर, कितनी प्यारी, हिंदी हर भाषा से न्यारी। कृति ... आगे पढ़े

हमारे आदर्श दादाजी

Updated on 11 March, 2013, 16:18
दादाजी की महिमा न्यारी है अज्ञानता को दूर करके ज्ञान की ज्योति जलाई है। दादाजी की महिमा न्यारी है... दादाजी के चरणों में रहकर हमने शिक्षा पाई है। गलत राह पर भटके जब हम तो दादाजी ने राह दिखाई है। दादाजी की महिमा न्यारी है... माता-पिता ने जन्म दिया पर दादाजी ने जीना सिखाया है। ज्ञान, चरित्र और संस्कार की हमने शिक्षा... आगे पढ़े

अरुण यह मधुमय देश

Updated on 9 March, 2013, 18:54
 अरुण यह मधुमय देश हमारा। जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा। सरस तामरस गर्भ विभा पर नाच रही तरुशिखा मनोहर। छिटका जीवन हरियाली पर मंगल कुंकुम सारा।। लघु सुरधनु से पंख पसारे शीतल मलय समीर सहारे। उड़ते खग जिस ओर मुँह किए समझ नीड़ निज प्यारा।। बरसाती आँखों के बादल बनते जहाँ भरे करुणा जल। लहरें टकरातीं अनंत की पाकर जहाँ किनारा।। हेम... आगे पढ़े