बिन पानी सब सून...
असामान्य वर्षा चक्र का सीधा संबंध पर्यावरण संरक्षण और जल वायु परिवर्तन से है। वनों की कटाई, प्रदूषण, जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण और औद्योगीकरण, प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन, भूमि की गुणवत्ता में गिरावट और मरुस्थलीकरण ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाते हैं, जिससे मौसम चक्र असामान्य हो जाता है तथा जलवायु परिवर्तन होने लगता है। फलस्वरूप वर्षा का समय और मात्रा भी प्रभावित हो जाती है। प्लास्टिक का उपयोग कम करके और कार्बन उत्सर्जन को सीमित करके जलवायु परिवर्तन की रफ्तार को धीमा किया जा सकता है।
मानव जीवन में जल का अत्याधिक महत्व है। जल ही जीवन है। इसके बिना पृथ्वी पर किसी भी जीव की कल्पना नहीं की जा सकती। यह हमारे शरीर, प्रकृति व कृषि का मुख्य आधार है। हमारा देश अपनी जल आपूर्ति हेतु मुख्य रूप से वर्षा पर ही निर्भर है। भारत में मानसून केवल बारिश ही नहीं बल्कि जीवनदायनी शक्ति है। किसानों के लिए यह फसलों का आधार है तो नदियों और जलाशयों का जलस्त्रोत है। हमारी 60 प्रतिशत कृषि अभी भी मानसून पर निर्भर है, इसलिए यह देश की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करता है।
ग्लोबल वार्मिंग और अल-नीनो जैसे मौसमी कारण इस वर्ष मानसून को कमजोर बना रहे हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान अनुसार इस वर्ष देश में मानसून सामान्य से 92 प्रतिशत रहने की संभावना है, परंतु वर्तमान में देश के 75 प्रतिशत भू-भाग में अभी तक 20 प्रतिशत से अधिक वर्षा की कमी मापी गई है। सभी परिस्थितियां दर्शा रही हैं कि इस वर्ष मानसून कमजोर रहेगा, जिसका दुष्प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। खरीफ की फसलों जैसे धान, मक्का, दलहन आदि का उत्पादन विशेष रूप से प्रभावित होगा। देश की अधिकांश आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है तथा उनकी मुख्य आमदनी कृषि पर आधारित कार्य पर निर्भर है। मानसून के कमजोर होने से कृषि पैदावार और किसानों की आय घटेगी जो ग्रामीण मांग को कमजोर करेगी। फलस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ता वस्तुओं की बिक्री एवं दोपहिया वाहनों/टैक्टरों की बिक्री में गिरावट आएगी, जिसका प्रभाव संपूर्ण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
मानसूनी वर्षा की कमी के कारण भूमिगत जल के अत्याधिक उपयोग से सिंचाई की लागत बढ़ती है तथा भू-जलस्तर भी तेजी से गिरता है। वैसे भी देश में भू-जलस्तर की स्थिति चिंताजनक है तथा वह लगभग एक मीटर प्रति वर्ष की दर से लगातार गिर रहा है।
आने वाले समय में देश के अनेक भागों में पेयजल संकट की स्थिति भी बन सकती है। अतिरिक्त राहत उपायों, उर्वरक सब्सिब्डी एवं खाद्य आयात पर सरकारी खर्च बढ़ऩे के कारण राजकोषीयी घाटा बढ़ सकता है। मुद्रा स्फीती तथा खुदरा मँहगाइ दर भी बढ़ेगी। इन हालात में मौद्रिक नीति प्रभावित होती है जिससे लोन मँहगे होकर व्यवसायिक निवेश पर भी असर पड़ता है।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विकास और शहरीकरण की दौड़ में पर्यावरण की कुर्बानी दी जा रही है। वृक्षों की अंधाधुंध कटाई हो रही है तथा लगातार बढ़ता हुआ कार्बन उत्सर्जन पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंचा रहा है। बचपन में बादलों को देखकर हम वर्षा के लिए 'काले मेघा पानी दे, पानी दे गुड़ धानी देÓ गाते थे, परंतु अब उत्पन्न हो रही गंभीर स्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए वर्षा चक्र को नियमित बनाने के लिए हमें दीर्घकालीन योजना के रूप में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु नियंत्रण की और विशेष ध्यान देना होगा। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। वनों की रक्षा तथा वृक्षारोपण स्थानीय वर्षा चक्र को संतुलित करता है। वर्षा ऋतु वृक्षारोपण के लिए सबसे उपयोगी समय है। आवश्यकता है कि स्थानीय जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप देशी प्रजातियों के पौधे लगाये जावें तथा उनका संरक्षण निश्चित किया जावे ताकि वह स्थानीय जैवविविधिता का संरक्षण करने और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत बनाने में सहायक बनें। जल संरक्षण विधियां अपनाकर भू-जलस्तर को रिचार्ज किया जा सकता है। सतत् कृषि उपाय, ड्रिप सिंचाई तथा कम पानी वाली फसलों को अपनाकर कम वर्षा के कारण होने वाले जल संकट से निपटा जा सकता है। हरित ऊर्जा के स्त्रोतों का उपयोग कर कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित किया जा सकता है। इस आसन्न गंभीर संकट को सभी नागरिकों के सहयोग से ही निपटा जा सकता है।
शुभकामनाओं सहित ...


ममता बनर्जी की रैली पर हाईकोर्ट का ब्रेक, सभा को मिली अनुमति; जानें शर्तें
दलीप ट्रॉफी 2026 पर ईस्ट जोन का कब्जा, पहली पारी की बढ़त से बना चैंपियन
किसानों को साधने की BJP की रणनीति में MP आगे, लाल सिंह आर्य को नई जिम्मेदारी
कौन हैं IAS निधि निवेदिता? ट्रांसफर के बाद उनके दिए आदेश निरस्त होने से चर्चा तेज
राजनांदगांव में करोड़ों की धोखाधड़ी का मामला, भाजपा नेता समेत 3 आरोपी नामजद
‘दृश्यम 2’ को लेकर तब्बू की चिंता हुई थी हद से ज्यादा, बोलीं- मैं पूरी तरह परेशान थी
गौरव भाटिया केस: कोर्ट बोला- बिना जांचे पोस्ट करना ठीक नहीं, 24 घंटे में हटाने का निर्देश
राजघाट हादसे पर सियासत तेज, अजय राय ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर सरकार को घेरा
‘खड़े हनुमान कहीं नहीं जाएंगे’, उमा भारती ने मोहन यादव से कहा- हटाने का प्लान बदलें
थाईलैंड में पुलिस अफसर की खौफनाक करतूत, पत्नी की हत्या के बाद 18 घंटे तक चला ऑपरेशन