इस वर्ष की महिला दिसस की थीम लैंगिंक समानता को बढ़ावा देने के लिए सामुदायिक योगदान पर केंद्रित है। यह विषय महिलाओं के प्रति समान दृष्टिकोण अपनाने और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। इसका उद्देश्य है कि महिलाओं के शिक्षा, रोजगार और समान अवसरों को बढ़ावा दिया जाए ताकि संपूर्ण समाज का विकास हो सके। 
नारी सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ केवल अधिकार देना नहीं है बल्कि सम्मान और निर्णय लेने की स्वतंत्रता देना है। नारी सशक्तिकरण की नींव के 5 स्तंभ हैं:  शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल, साक्षरता और राजनीतिक भागीदारी। नारी सशक्तिकरण परिवार में बेटियों को समान अवसर देता है तथा कन्या भू्रण हत्या, परिवार में स्त्री के साथ भेदभाव, बाल-विवाह और दहेज प्रथा जैसी कुप्रथाओं को अस्वीकार करता है। 
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस-2026 उस समय आ रहा है जब विश्व भर में न्याय व्यवस्था  अत्यंत तनाव पूर्ण स्थिति में है। संपूर्ण विश्व में देशों के मध्य टकराव, राजनीतिक तनाव तथा कमजोर वर्गों का दमन अपने उच्च स्तर पर है। आज विश्व स्तर पर महिलाओं को पुरुषों की तुलना में केवल 64 प्रतिशत वैधानिक अधिकार प्राप्त हैं तथा 70 प्रतिशत महिलाओं को कानूनी मदद लेने में पुरुषों की तुलना में ज्यादा बाधाएं पार करनी पड़ती हैं। विश्व आर्थिक ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट के 2025 के अनुसार विश्व में लैंगिंक समानता लगभग 68.8 प्रतिशत ही है। अर्थात एक तिहाई अंतर अभी भी शेष है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय विवाद क्षेत्रों में लगभग 66 करोड़  महिलाएं/ बालिकाएं टकराव क्षेत्र के 50 किलो मीटर के दायरे में रहती हंै, जहां न्याय प्रक्रिया का या तो कोई अस्तित्व नहीं है अथवा अत्याचार करने के वाले उसकी परवाह नहीं करते। 
इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम है  GIVE to GAIN, अर्थात 'दान से लाभÓ। जब हम महिलाओं को अवसर, सहयोग व समर्थन देते हंै तो उसका फायदा पूरे समाज की तरक्की और समानता के रूप में हमें वापस मिलता है। इस संबंध में कार्य योजना के तीन विशेष बिन्दु हैं: सभी महिलाओं एवं बालिकों के लिए अधिकार, न्याय और वास्तविक कार्यवाही। 
न्याय के बिना अधिकार केवल एक शब्द है तथा न्याय ही उसे शक्ति बनाता है। भारत के संविधान की प्रस्तावना में भी सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय देने और प्रतिष्ठा एवं अवसर की समानता देने तथा व्यक्ति की गारिमा सुनिश्चित करने की बात लेख है। 
 महिलाओं और असुरक्षित समूहों की हिंसा से रक्षा करने वाले कानून प्राय: भेदभाव पूर्ण और शोषक होते हैं। हमारे देश में भी महिलाओं के विरुद्ध यौन और अन्य हिंसा के प्रकरण बढ़ रहे हैं। निर्भया प्रकरण से लेकर उन्नाव बलात्कार तक ऐसे अनेक प्रकरण हंै जो महिला सुरक्षा के ऊपर गंभीर प्रश्न खड़ा करते हैं तथा इंगित करते हैं कि महिलाओं के लिए न्याय प्राप्त करना कितना दुष्कर है। अत: महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए भेदभाव पूर्ण कानून, कमजोर न्यायिक सूरक्षा तथा समाज की भेदभाव पूर्ण नीतियों से छूटकारा पाने में आने वाली बाधाओंं को दूर करने वाली, प्रताडि़त महिलाओं को सुलभ कानूनी सहायता तथा समान न्याय देने वाली तथा अधिकारों का हनन होने पर पुर्निप्राप्ति सहायता प्रणाली स्थापित करने की आवश्यकता है।
वैश्विक स्तर पर महिलाएं कार्य बल का 42 प्रतिशत हैं तथा शीर्ष प्रबंधकीयों पदों पर उनकी हिस्सेदारी एक तिहाई है। हमारे देश में अनेक महिलाओं ने अंतरिक्ष  विज्ञान, सेना, प्रशासन, उद्योग जगत एवं राजनीतिक  क्षेत्रों में उल्लेखनीय स्थान हासिल किया है, परंतु  देश में महिला श्रम भागीदारी अभी भी लगभग 32 प्रतिशत ही है। अधिकांश महिलाएं घरेलू दायित्वोंं के कारण रोजगार से बाहर रहती हैं तथा उनके आर्थिक स्वालंबन में यह सबसे बड़ी बाधा है। हमारे देश में अभी भी महिलाओं की साक्षरता की दर पुरुषों की तुलना में 12 प्रतिशत कम है। विधायिका में एक तिहाई भागीदारी का कानून एक लंबे अंतराल के बाद पास तो हुआ है, परंतु इसका अमल होना अभी भी शेष है। महिलाओं को स्वयं भी अपने सशक्तिकरण के लिए पहल करनी होगी। स्थानीय निकायों में महिलाओं को निश्चित प्रतिनिधित्व अवश्य दिया गया है, परंतु अधिकांश जगहों पर उन्हें स्वतंत्र रूप से कार्य करने की आजादी नहीं है तथा प्राय: उनके परिवार के सदस्यों का उनके कार्य में हस्तक्षेप रहता है। 
नए युग की समस्याएं जैसे जलवायु परिवर्तन, युद्ध, आतंकवाद, गरीबी और डिजिटल असमानता भी महिलाओं के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। यदि इन समस्याओं पर समय लेते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दशकों में करोड़ों महिलाएं और बालिकाएं अत्याधिक गरीबी की और धकेली जा सकती हंै। अभी भी समय है कि समाज नारी सशक्तिकरण एवं उनके बराबर अधिकार के बारे में सकारात्मक रूख अपनाये ताकि इस आधी आबादी के सहयोग से हम एक बेहतर कल की ओर बढ़ सकें।

शुभकामनाओं सहित....