भारत दुनिया में भू-गर्भ जल का सबसे ज्यादा इस्तमाल करने वाला देश है। विश्व की 18 प्रतिशत आबादी के लिए हमारे देश में मात्र 4 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। 60 करोड़ भारतीय अत्याधिक जलसंकट का सामना कर रहे है। नीति आयोग के अनुसार देश में  प्रतिवर्ष अस्वच्छ पानी पीने के कारण लगभग 2 लाख व्यक्तियों की मृत्यु होती है। जलसंकट की समस्या से निपटने के लिए नागरिकों को पानी का सम्मान करना पड़ेगा तथा पानी की प्रत्येक बूंद को मूल्यवान समझकर  अत्यंत सावधानी से उसका उपयोग करना पड़ेगा। 


पानी प्रकृति का चालक है। हम सभी अच्छी तरह से जानते हैं कि जल ही जीवन है और जीवन को बनाए रखने के लिए जल की उपलब्धता निरंतर आवश्यक है। पिछले कुछ वर्षों में समस्त विश्व में भारी जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिसने मनुष्य के जन-जीवन पर सीधा असर डाला है। बढ़ती जनसंख्या एवं शहरीकरण का प्रसार एवं बढ़ता वैश्विक तापमान जल संकट को गहराने का कार्य कर रहे हैं।
हमारे देश में 2001 में प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता 1816 घनमीटर थी, जो 2011 में 1544 घनमीटर रह गई। हम सालाना बारिश का केवल 8 प्रतिशत पानी सहेज पाते हैं।  देश में बढ़ते शहरीकरण एवं औद्योगीकरण के कारण भी पानी की आवश्यकता भौगोलिक रूप में असामान रूप से बढ़ रही है। देश के 40 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रों में  सूखे की स्थिति है। जल पुरुष राजेन्द्र सिंह के अनुसार भारत के दो तिहाई से अधिक भू-जल भंडार खाली हो चुके हैं। प्रकृति से छेड़छाड़ के कारण वर्षा की स्थिति भी अनियमित तथा असामान्य हो गई है तथा बाढ़ भी ज्यादा आ रही है। गांवों से पलायन का एक कारण जलसंकट भी है। जहां 2001 में देश की शहरी आबादी 28 करोड थी जो 2011 में बढ़कर 38 करोड हो गई। 2030 तक शहरी जनसंख्या 60 करोड हो जाएगी। अधिकांश शहरी क्षेत्रों में पीने का पानी ग्रामीण क्षेत्रों से ही प्राप्त किया जा रहा है, क्योंकि उनके जलस्त्रोत अपर्याप्त हो गए हैं। अनुमान है कि 2030 तक देश में पानी की मांग दुगनी हो जाएगी। केन्द्र सरकार ने जल-जीवन मिशन-2019 के द्वारा देश के समस्त घरों में स्वच्छ पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। 
पूरा विश्व आज जल संकट के प्रबंधन में प्राकृतिक और स्थानीय समाधान पर जोर दे रहा है। देश में बढ़ते जलसंकट को रोकने के लिए शहरों में भी गांव के जल संरक्षण के पुराने तौर तरीकों को अपनाने के लिए जोर देना होगा। ताकि शहरों में पानी के लिए गांवों पर निर्भरता कम हो सकेें और आने वाले सालों में शहर और गांवों दोनों में जलसंकट का सामना नहीं करना पड़े। 
जल साक्षरता अभियान के अंतर्गत मानव जीवन में जल की महत्ता तथा देश में उपलब्ध जलस्त्रोत एवं मौजूदा जल संकट की स्थिति से जनमानस को अवगत कराने की आवश्यकता है। जरूरी है कि हम उपलब्ध साफ पानी का सही उपयोग करें, पानी की बरबादी पर रोक लगाए, वर्षा जल का संचयन करें, पानी को प्रदूषित होने से रोकेें, सामुदायिक जल प्रबंधन पर ध्यान दें, कृषि सिंचाई के तरीकों में बदलाव करें, प्राकृतिक जलस्त्रोतों पर हो रहे अतिक्रमणों को रोकें, स्थानीय जलस्त्रोतों को पुनर्जीवित करें तथा उपयोग किए जल को शोधित कर पुन: उपयोग करें। विशेषकर शहरीक्षेत्रों में जल संरक्षण हेतु भू-जल रिचार्ज को अपनाएं। इस बारे में सरल और सहज तरीके से सोशल मीडिया, टीवी एवं रेडियो के माध्यम से जनसामान्य को प्रेरित करने की आवश्यकता है। तभी हम मानव जाति के ऊपर आसन्न इस संकट को टाल सकते हैं। 
शुभकामनाओं सहित ....