हमारी शिक्षा व्यवस्था...
शिक्षक अगली पीढ़ी का मार्गदर्शक होता है और उन्हें पे्ररणा देकर हमारे समाज के भविष्य को आकार देता है। एक आदर्श शिक्षक न केवल गुरु होता है बल्कि एक मार्गदर्शक, मित्र और प्रेरणा शक्ति होता है जो छात्रों के जीवन को एक नई दिशा देता है। वह छात्रों के सर्वांगीण विकास में योगदान देता है तथा उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है। वह समाज में सकारात्मक बदलाव लाता है और राष्ट्र के भविष्य की नींव मजबूत करता है। वह छात्रों में अच्छे मूल्यों, संस्कारों और सकारात्मक सोच का विकास करता है, आत्मविश्वास पैदा करता है, उन्हें सीखने के लिए प्रेरित करता है और उनमें उत्साह भरता है तथा छात्रों को उनकी क्षमता पहचाने और लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है। उनमें नागरिक सहभागिता और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देता है।
किसी भी व्यक्ति के जीवन में शिक्षा का अत्याधिक महत्व होता है। एक बेहतर समाज का निर्माण शिक्षित मनुष्यों द्वारा ही होता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं बल्कि चरित्र और व्यक्तित्व निर्माण भी है। एक अच्छी शिक्षा व्यवस्था ही किसी राष्ट्र के विकास का आधार होती है। स्वाभाविक तौर पर एक अच्छी शिक्षा व्यवस्था बनाए रखना तथा उसके लिए उपयुक्त संसाधन उपलब्ध करना किसी भी निर्वाचित सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। परंतु आजादी के इतने लंबे समय बाद भी देश में शिक्षा की गुणवत्ता के स्तर में अत्यंत सुधार की आवश्यकता है। विश्व के 200 शीर्ष संस्थानों में भारत का कोई भी शिक्षण संस्थान नहीं है। हर वर्ष हमारे 9 लाख छात्र उच्च शिक्षण हेतु विदेश जाते हैं जिन पर देश का हजारों करोड़ रुपया खर्च होता है। गुणवत्ता वाली शिक्षा देश में सर्व सुलभ नहीं हो पा रही है। सर्वाधिक चिंताजनक बात यह है कि सभी शिक्षण संस्थानों में टूयशन की प्रवृत्ति तथा कोचिंग संस्थानों की संस्कृति बढ़ रही है। अनेक राज्य सरकारें ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक सरकारी विद्यालयों में बंद करने पर भी विचार कर रही है, जिसका ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था पर घातक प्रभाव पढ़ेगा।
शिक्षा पर जीडीपी का 6 प्रतिशत व्यय करने का लक्ष्य अभी तक प्राप्त नहीं हो सका है तथा वर्तमान में 4.1 प्रतिशत है। नई शिक्षा नीति के लागू होने के 5 वर्ष बाद भी उसका पूर्ण क्रियान्वन नहीं हो पाया है। देश में उच्चशिक्षा संस्थानों में सकल नामांकन अनुपात 28.4 प्रतिशत है जो विश्व औसत 36.7 प्रतिशत से नीचे है। देश में 8 लाख से अधिक विद्यालयीन शिक्षकों के तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में 40 प्रतिशत शिक्षकों के पद रिक्त है। अनेक विद्यालयों में मात्र एक शिक्षक है तथा यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा खराब है। मध्यप्रदेश में ही 12 हजार ऐसे विद्यालय है। सरकारी विद्यालयों में आधारभूत भौतिक संसाधनों की स्थिति संतोषप्रद नहीं है। बिजली, शौचालय तथा पीने के पानी का अभाव आम है। विद्यालयों में 'ड्रॉप आउट दरÓ भी चिंता का विषय है।
किसी भी शिक्षा व्यवस्था में भौतिक संसाधनों के साथ सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग शिक्षक होता है। हमारे देश की लगभग 31 प्रतिशत आबादी जो कि 47 करोड़ से ऊपर है, की आयु 18 वर्ष से कम है। इस मानव संसाधन का उचित विकास ही भविष्य में देश को विकास के एक नये रास्ते पर ले जा सकेगा। इस समूह को समाज एवं देश के लिए उपयोगी बनाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की है। परिवार के बाद किसी व्यक्ति की शिक्षा में सर्वाधिक योगदान शिक्षक का ही होता है। किसी भी विद्यार्थी के लिए शिक्षक एक रोलमॉडल होता है जो उसके व्यक्तित्व को ढालने में बड़ी भूमिका निभाता है। शिक्षक अपने विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच विकसित करने में भी मदद करते है।
चूंकि शिक्षक का व्यक्तित्व छात्रों के व्यक्तित्व निर्माण पर गहरी छाप डालता है, अत: एक शिक्षक से अनेक अपेक्षायें होती है। उनका व्यक्तिगत जीवन आदर्श होना चाहिए तथा उन्हें नैतिकता और ईमानदारी के मानकों का पालन करना चाहिए। उनका अपने शिक्षा क्षेत्र के विषय में गहरा ज्ञान होना चाहिए तथा अध्यापन कौशल उच्चतम स्तर का होना चाहिए। उनमें अपने व्यवसाय के प्रति रूचि तथा निष्ठा होनी चाहिए, बालमनोविज्ञान का ज्ञान तथा सक्रिय संबंध कौशल में तथा अपने अध्यापन में शिक्षा विधियों का प्रयोग करने में निपुण होना चाहिए। उन्हें अपने छात्रों में आशावादी दृष्टिकोण, उत्साह तथा प्रेरणा का संचार करने में समर्थ होना चाहिए तथा अपने छात्रों के अच्छे सलाहकार के रूप में कार्य करना चाहिए।
इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को निभाने के लिए शिक्षकों का सही चयन करना तथा उन्हें समय-समय पर प्रशिक्षण देना आवश्यक है। शिक्षण संस्थानों में छात्र शिक्षक अनुपात इतना करना होगा कि शिक्षकगण अपने विद्यार्थियों के ऊपर व्यक्तिगत ध्यान दे सकें। आने वाले समय की चुनौतियों से निपटने के लिए तथा भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने के लिए देश की शिक्षा व्यवस्था में सर्वांगीण सुधार एवं उन्नति की आवश्यकता है।
शिक्षक दिवस की शुभकामनाओं सहित...


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