माघ की पहली एकादशी कब है? बनेंगे 3 शुभ योग, विष्णु पूजा में तिल का विशेष उपयोग, जानें तारीख, मुहूर्त, पारण समय, महत्व
षटतिला एकादशी को माघ माह की पहली एकादशी कहा जाता है. माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को षटतिला एकादशी होती है. षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और उनको तिल चढ़ाते हैं. इस एकादशी व्रत में तिल का विशेष उपयोग होता है, इस वजह से इसे षट्तिला एकादशी कहा जाता है. जो लोग षट्तिला एकादशी का व्रत रखते हैं, उनके जीवन में सुख, समृद्धि, पुण्य की प्राप्ति होती है, वहीं पाप और कष्ट मिट जाते हैं. पंचांग से जानते हैं कि षट्तिला एकादशी या माघ की पहली एकादशी कब है? षट्तिला एकादशी की तारीख, मुहूर्त और पारण समय क्या है?
माघ की पहली एकादशी या षट्तिला एकादशी की तारीख
पंचांग के अनुसार माघ कृष्ण एकादशी तिथि का प्रारंभ 13 जनवरी दिन मंगलवार को दोपहर में 3 बजकर 17 मिनट पर होगा. यह तिथि 14 जनवरी दिन बुधवार को शाम 5 बजकर 52 मिनट तक मान्य रहेगी. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार माघ की पहली एकादशी या षट्तिला एकादशी का व्रत 14 जनवरी बुधवार को है. यह नए साल 2026 की पहली एकादशी भी है.
षट्तिला एकादशी मुहूर्त
षट्तिला एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त 05:27 ए एम से 06:21 ए एम तक है. इस समय में आप स्नान आदि से निवृत होकर षट्तिला एकादशी व्रत और विष्णु पूजा का संकल्प कर लें. उसके बाद सुबह में 07:15 ए एम से लेकर 09:53 ए एम के बीच भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं. इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं है. एकादशी पर राहुकाल दोपहर में 12:30 पी एम से लेकर दोपहर 01:49 पी एम तक है.
3 शुभ योग में षट्तिला एकादशी
षट्तिला एकादशी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और शाम में वृद्धि योग बनेगा. उस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग 07:15 ए एम से लेकर अगले दिन 15 जनवरी को 03:03 ए एम तक है. इन दो शुभ योग में एकादशी की पूजा की जाएगी. ये शुभ फलदायी योग हैं.
उस दिन प्रात:काल से लेकर शाम 07:56 पी एम तक गण्ड योग है, उसके बाद से वृद्धि योग बनेगा. एकादशी के प्रात:काल ही अनुराधा नक्षत्र है, जो 15 जनवरी को 03:03 ए एम तक है, उसके बाद से ज्येष्ठा नक्षत्र है.
षट्तिला एकादशी पारण समय
जो लोग 14 जनवरी को षट्तिला एकादशी का व्रत रखेंगे, वे व्रत का पारण 15 जनवरी गुरुवार को सुबह में 07:15 ए एम से 09:21 ए एम के बीच कर सकते हैं. इस दिन द्वादशी का समापन रात में 08:16 पी एम पर होगा.
षट्तिला एकादशी व्रत का महत्व
षट्तिला एकादशी व्रत और पूजन से पाप मिटते हैं. लेकिन इस दिन जो व्यक्ति तिल का दान करता है, उसकी दरिद्रता मिट जाती है. उसके जीवन में सुख, समृद्धि आती है. इस दिन जो लोग प्रयागराज के संगम में स्नान करते हैं, उनको सहज ही विष्णु कृपा प्राप्त होती है. षट्तिला एकादशी पर दान करने से मृत्यु के बाद व्यक्ति को स्वर्ग की प्राप्ति होती है.


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