मास्टर प्लान अटका, फिर भी Bhopal–Indore में जमीन महंगी
भोपाल। मध्य प्रदेश के दो बड़े शहर भोपाल और इंदौर में नया मास्टर प्लान तैयार होने में देरी हो रही है. सरकार दोनों शहरों के मास्टर प्लान को मेट्रोपॉलिटन सिटी की अवधारणा से जोड़कर तैयार कर रही है, लेकिन मेट्रोपॉलिटन एरिया की अंतिम सीमा तय नहीं होने के कारण पूरी प्रक्रिया अटकी हुई है. इस देरी का असर रियल एस्टेट बाजार पर पड़ रहा है और जमीन-मकानों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
भोपाल-इंदौर मास्टर प्लान मेट्रोपॉलिटन स्तर पर बन रहा
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, दोनों शहरों का मास्टर प्लान अब मेट्रोपॉलिटन स्तर की प्लानिंग के आधार पर बनाया जा रहा है. इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया में दो बार नए क्षेत्रों को जोड़ा जा चुका है, जिससे पूरे क्षेत्र का दोबारा सर्वे, डाटा संकलन और तकनीकी प्रक्रिया करनी पड़ रही है. वहीं भोपाल में भी मेट्रोपॉलिटन एरिया के सीमा निर्धारण और सर्वे की प्रक्रिया जारी है, लेकिन इसकी अंतिम सीमा तय नहीं हो सकी है।
बिना मास्टर प्लान के हो रहा शहरों का विस्तार
भोपाल में करीब 20 साल से शहर का विस्तार पुराने मास्टर प्लान के आधार पर हो रहा है. इंदौर में भी इसी तरह की स्थिति बनती जा रही है. इस बीच शहरों में जमीन और आवास की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. धारा-16 के 150 से ज्यादा आवेदन लंबित टीएनसीपी के तहत धारा-16 में कॉलोनी विकसित करने की अनुमति दी जाती है. लेकिन राज्य सरकार ने दो साल से इस अनुमति पर रोक लगा रखी है. भोपाल और इंदौर में 150 से ज्यादा आवेदन लंबित हैं. करीब 50 अनुमतियां पहले देने के बाद निरस्त कर दी गई हैं. इससे रियल एस्टेट सेक्टर में भी ठहराव की स्थिति बन गई है।
संयुक्त रूप से बनेंगी विकास परियोजनाएं
सरकार की योजना है कि शहर और मेट्रोपॉलिटन एरिया को साथ जोड़कर विकास योजनाएं तैयार की जाएं. इससे इंटरसिटी सड़कें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, आधारभूत ढांचा जैसी परियोजनाओं की बेहतर प्लानिंग हो सकेगी।
केंद्र से मिल सकता है विशेष पैकेज
मेट्रोपॉलिटन सिटी की अवधारणा लागू होने पर केंद्र सरकार से विशेष पैकेज और अनुदान मिलने की भी संभावना है. इससे दोनों शहरों के साथ-साथ आसपास के उपनगरों और कस्बों के विकास को भी फायदा मिल सकता है. नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के अनुसार, मेट्रोपॉलिटन एरिया तय होने के बाद ही भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान का अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा और इसे मुख्यमंत्री के साथ बैठक में अंतिम रूप दिया जाएगा।


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