वेंस-नेतन्याहू वार्ता के बाद भी जारी मतभेद, कूटनीतिक हलचल तेज
वॉशिंगटन | अमेरिका और इस्राइल के बीच ईरान युद्ध को लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई एक फोन कॉल ने दोनों देशों की सोच में अंतर को उजागर कर दिया। यह बातचीत ऐसे समय में हुई, जब युद्ध को लेकर वैश्विक दबाव बढ़ रहा है और बातचीत के जरिए समाधान की कोशिशें जारी हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, इस बातचीत के दौरान वेंस ने नेतन्याहू के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें ईरान में सत्ता परिवर्तन को आसान बताया गया था। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वेंस ने साफ तौर पर कहा कि हालात उतने आसान नहीं हैं, जितना पहले बताया गया था। इस बातचीत के बाद यह भी आरोप लगे कि इस्राइल वेंस की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है, जबकि वे युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
क्या वेंस ने नेतन्याहू के दावों पर सवाल उठाए?
सूत्रों के अनुसार, वेंस ने नेतन्याहू से सीधे पूछा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन को लेकर इतना भरोसा क्यों जताया गया। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि युद्ध से पहले इस्राइल ने हालात को आसान बताकर पेश किया था, जबकि वास्तविकता ज्यादा जटिल है। वेंस इस मुद्दे पर ज्यादा सतर्क और स्पष्ट नजर आए।
क्या इस्राइल वेंस की भूमिका को कमजोर कर रहा है?
बातचीत के बाद यह दावा भी सामने आया कि इस्राइल, वेंस की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। कहा गया कि कुछ रिपोर्ट्स जानबूझकर फैलाई गईं, जिनमें बताया गया कि ईरान वेंस के साथ समझौता करना चाहता है। एक अधिकारी ने इसे इस्राइल की रणनीति बताया, ताकि बातचीत की दिशा को प्रभावित किया जा सके।
क्या वेंस ही समझौते की आखिरी उम्मीद हैं?
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान के साथ किसी भी समझौते की सबसे बड़ी संभावना वेंस के जरिए ही है। उनका कहना है कि अगर ईरान वेंस के साथ कोई समझौता नहीं कर पाता, तो फिर समझौते की संभावना बेहद कम रह जाएगी। वेंस फिलहाल अमेरिकी दूतों के साथ बातचीत की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
ईरान युद्ध पर वेंस की रणनीति क्या है?
वेंस लंबे समय से विदेशी युद्धों के विरोधी रहे हैं और वे इस संघर्ष को लंबा खिंचने नहीं देना चाहते। उन्होंने साफ किया है कि यह कोई हमेशा चलने वाला युद्ध नहीं होना चाहिए। हालांकि उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों का समर्थन किया है, लेकिन उनकी सोच थोड़ी अलग बताई जा रही है। यही वजह है कि वे इस पूरे मामले में संतुलन बनाकर चलने की कोशिश कर रहे हैं।


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