ट्रंप के पूर्व आध्यात्मिक सलाहकार रॉबर्ट मॉरिस यौन शोषण के मामले में जेल से हुए रिहा
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान उनके धार्मिक सलाहकार (रिलिजियस एडवाइजर) रहे रॉबर्ट मॉरिस, एक नाबालिग बच्ची के यौन शोषण के आरोप में छह महीने की जेल की सजा काटने के बाद बाहर आ गए हैं। मॉरिस, जो एक मेगाचर्च के पादरी और प्रसिद्ध टेलीएवेंजेलिस्ट रहे हैं, को 1980 के दशक में एक 12 वर्षीय बच्ची के साथ दुर्व्यवहार करने का दोषी पाया गया था।
रॉबर्ट मॉरिस की पहचान ट्रंप के करीबी आध्यात्मिक सहयोगियों में रही है। साल 2016 में उन्हें ट्रंप के इवेंजेलिकल एग्जीक्यूटिव एडवाइजरी बोर्ड में शामिल किया गया था और उन्होंने 2020 में टेक्सास स्थित अपने गेटवे चर्च में ट्रंप की मेजबानी भी की थी। हालांकि, उनके अतीत के काले कारनामों ने उनके करियर और साख पर गहरा दाग लगा दिया। अदालती कार्यवाही के दौरान यह सामने आया कि जब मॉरिस एक प्रचारक के रूप में काम कर रहे थे, तब उन्होंने एक 12 साल की बच्ची का पांच साल तक यौन उत्पीड़न किया। पीड़िता ने अदालत को बताया कि क्रिसमस के दिन से शुरू हुआ यह सिलसिला वर्षों तक चला और मॉरिस ने उसे चुप रहने के लिए धमकाया भी था।
सुनवाई के दौरान मॉरिस ने स्वीकार किया कि उन्होंने बच्ची के साथ गलत व्यवहार किया और उसे कई बार अनुचित तरीके से स्पर्श किया, हालांकि उन्होंने यौन संबंधों से इनकार किया। अदालत ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में निलंबित कर दिया गया, लेकिन हाल ही में छह महीने की जेल काटने के बाद उन्हें रिहा किया गया। रिहाई के बाद पीड़िता ने संतोष जताते हुए कहा कि उसे आखिरकार न्याय मिल गया है। अपनी रिहाई के बाद मॉरिस ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि उन्होंने दशकों पहले जो किया वह पूरी तरह गलत था और उसके लिए कोई बहाना नहीं दिया जा सकता। उन्होंने पीड़िता और उसके परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया कि उन्होंने इस सच को दुनिया के सामने लाने की हिम्मत दिखाई। यह मामला सामने आने के बाद मॉरिस ने अपने चर्च के पादरी पद से भी इस्तीफा दे दिया था।


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