अमेरिका का दावा कहा- राष्ट्रपति ट्रंप ने कूड़ेदान में फेक दिया था ईरान की 10 मांगों वाला प्रस्ताव
वॉशिंगटन। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस शुरुआती प्रस्ताव को वास्तव में कूड़ेदान में फेंक दिया था, जो गंभीर नहीं था और अमेरिकी हितों के खिलाफ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने शुरुआत में जो 10 बिंदुओं का मसौदा दिया था, वह स्वीकार्य नहीं था और उसे पूरी तरह खारिज कर दिया गया था। हालांकि, उन्होंने यह भी जानकारी दी कि बाद में ईरान होर्मुज स्ट्रेट को खोलने पर सहमत हुआ है और अब एक नया प्रस्ताव मिला है, जिसे बातचीत के लिए एक व्यावहारिक आधार माना जा सकता है।
लेविट ने मीडिया और विपक्षी नेताओं से आग्रह किया कि वे ऐसी भ्रामक बातों को बढ़ावा न दें जिनका तथ्यों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने देश को आश्वस्त किया कि राष्ट्रपति ट्रंप कभी भी ईरान की इच्छाओं की सूची पर समझौता नहीं करेंगे। प्रशासन का रुख स्पष्ट है कि कोई भी समझौता तभी होगा जब वह अमेरिकी जनता और वैश्विक सुरक्षा के हित में होगा। फिलहाल, ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी इस जंग ने अमेरिकी कूटनीति की कड़ी परीक्षा ले रखी है।
ट्रंप की मानसिक स्थिति ठीक नहीं
अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने राष्ट्रपति ट्रंप पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्हें पद के लिए मानसिक रूप से अनफिट करार दिया है। उन्होंने ट्रंप को हटाने के लिए हर संभव कदम उठाने की अपील करते हुए ईरान की ओर से आए 10 सूत्रीय प्रस्ताव को ट्रंप का सरेंडर बताया। विपक्ष के इन हमलों ने वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, जिसके जवाब में अब व्हाइट हाउस को आधिकारिक सफाई पेश करनी पड़ी है।
ईरान ने बंद किया होर्मुज स्ट्रेट
अमेरिका की मध्यस्थता से शांति की जो उम्मीद एक दिन पहले जगी थी, वह लेबनान पर इजरायल के ताजा हमलों के बाद फिर से धुंधली पड़ती दिख रही है। ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के अपने फैसले को कुछ ही घंटों के भीतर पलटते हुए इसे फिर से बंद करने का ऐलान कर दिया है। ईरान के इस कड़े रुख ने अमेरिका के सामने एक स्पष्ट लकीर खींच दी है कि उसे अब यह तय करना होगा कि वह क्षेत्र में युद्धविराम चाहता है या इजरायल के जरिए युद्ध को और हवा देना चाहता है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, अमेरिका के भीतर भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर तीखी आलोचना शुरू हो गई है।


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