चंबल पुल गिरने पर बड़ा विवाद — सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से Madhya Pradesh सरकार पर बढ़ा दबाव
मुरैना: मुरैना में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में अवैध रेत खनन की स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताई। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने इसे “चौंकाने वाली स्थिति” बताते हुए राज्य सरकार की नाकामी करार दिया।
चंबल पुल की नींव पर खतरा
अदालत ने उस घटना का जिक्र किया जिसमें चंबल नदी पर बने पुल के खंभों की नींव तक अवैध खनन किया जा रहा है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि यदि पुल गिरता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता निखिल गोयल ने बताया कि यह पुल 32 खंभों पर बना है और मध्य प्रदेश-राजस्थान को जोड़ता है, लेकिन खनन माफिया इसकी नींव को कमजोर कर रहे हैं।
वनरक्षक की मौत पर चिंता
मामले में वनरक्षक हरिकेश गुर्जर की मौत को भी गंभीरता से लिया गया। कोर्ट ने कहा कि रेत माफिया द्वारा वन अधिकारियों को कुचलना बेहद चिंताजनक है। यह सब सरकार की नाक के नीचे हो रहा है, जो प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
पुलिस रिपोर्ट और कार्रवाई
मुरैना पुलिस की ओर से हेडक्वार्टर डीएसपी विजय भदौरिया ने अदालत में जानकारी दी कि घटना में शामिल तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है और ट्रैक्टर भी जब्त कर लिया गया है। पुलिस की कार्रवाई से कोर्ट संतुष्ट नजर आया, लेकिन वन विभाग की रिपोर्ट पर असंतोष जताया गया।
अगली सुनवाई और कार्ययोजना
यह मामला नेशनल चंबल अभयारण्य में अवैध खनन और जलीय जीवों पर खतरे से जुड़ा है। अगली सुनवाई 17 अप्रैल को होगी। इससे पहले वन विभाग को अवैध खनन रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर कोर्ट में प्रस्तुत करनी होगी।
कोर्ट के सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने अवैध खनन रोकने के लिए हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाने और भारी मशीनों में जीपीएस सिस्टम लगाने का सुझाव दिया है। साथ ही हत्या मामले की स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी गई है।


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