सिस्टम बनाम सीएम: "जनता के पैसों का हुआ गलत इस्तेमाल", निलंबित आईएएस के दावों से सियासत गरमाई
तिरुवनंतपुरम: केरल के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. बी. अशोक ने अपने निलंबन के महज 24 घंटे बाद मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनके प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मीडिया से रूबरू होते हुए अशोक ने न केवल अपने निलंबन को 'प्रतिशोध की राजनीति' बताया, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग और नौकरशाही के राजनीतिकरण के चौंकाने वाले आरोप भी लगाए।
निलंबन के पीछे 'कानूनी जीत' की खुन्नस?
डॉ. अशोक ने दावा किया कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई का मुख्य कारण आईएएस एसोसिएशन द्वारा सरकार के खिलाफ हासिल की गई कानूनी सफलताएं हैं। उन्होंने बताया कि 2023 से अब तक एसोसिएशन ने सरकार के विरुद्ध पांच महत्वपूर्ण मामले जीते हैं, जिससे मुख्यमंत्री नाराज थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "मुख्यमंत्री का गुस्सा समझा जा सकता है।" अशोक ने विजयन सरकार के पहले और दूसरे कार्यकाल की तुलना करते हुए कहा कि वर्तमान शासन शैली में सिविल सेवकों का सम्मान खत्म हो गया है।
130 करोड़ का पीआर अनुबंध और धन का दुरुपयोग
सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए डॉ. अशोक ने कहा कि सरकार के तीसरे कार्यकाल को सुनिश्चित करने के लिए प्रचार अभियान में सार्वजनिक धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई स्थित एक निजी पीआर एजेंसी को 130 करोड़ रुपये का अनुबंध दिया गया है। उनके अनुसार, पिछले छह महीनों से अधिकारियों के एक विशेष समूह को केवल राजनीतिक लाभ और प्रचार के लिए जुटाया गया है, जो प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है।
नौकरशाही की स्वतंत्रता पर मंडराता खतरा
अशोक ने 'सुपर मुख्य सचिव' के तौर पर सेवानिवृत्त अधिकारियों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने के.एम. अब्राहम की मुख्यमंत्री कार्यालय में नियुक्ति को अभूतपूर्व और नौकरशाही की स्वतंत्रता के लिए घातक बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि सिविल सेवा को राजनीतिक सत्ता का गुलाम बनाया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक मिसाल है। फिलहाल, उन्होंने अपने निलंबन को तुरंत अदालत में चुनौती देने के बजाय इसे सरकार की गिरती कार्यशैली का प्रमाण बताकर 'सम्मान का पदक' करार दिया है।


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