ईरानी सेना का बयान, अमेरिका को सीधे संदेश के रूप में देखा गया
अमेरिका ने ठुकराया ईरान का शांति प्रस्ताव, ईरानी सेना ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
तेहरान/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व (West Asia) में शांति बहाली की कोशिशों को उस समय बड़ा झटका लगा, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया। शनिवार को ईरानी सेना के एक वरिष्ठ कमांडर ने दोनों देशों के बीच दोबारा युद्ध छिड़ने की आशंका जताते हुए अपनी सेना को 'हाई अलर्ट' पर रहने का निर्देश दिया है। यह तीखा बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के नए शांति प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद सामने आया है।
ईरानी सेना का कड़ा रुख: "हम हर स्थिति के लिए तैयार"
ईरानी सशस्त्र बल मुख्यालय के उप प्रमुख मोहम्मद जाफर असदी ने स्पष्ट किया है कि ईरान अब अमेरिका की कूटनीतिक चालों में नहीं आने वाला। उनके बयान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
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ईमानदारी का अभाव: असदी ने आरोप लगाया कि अमेरिका किसी भी समझौते को लेकर कभी ईमानदार नहीं रहा है।
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रणनीतिक जवाब: उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने कोई भी उकसावे वाली कार्रवाई की, तो ईरानी सेना उसका कड़ा और निर्णायक जवाब देने के लिए तैयार है।
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तेल की राजनीति: ईरानी कमांडर ने दावा किया कि अमेरिकी अधिकारियों के बयान केवल तेल की कीमतों को नियंत्रित करने और अपनी घरेलू स्थिति को सुधारने के लिए दिए जाते हैं।
ट्रंप का सख्त फैसला: "शर्तें स्वीकार्य नहीं"
इससे पहले व्हाइट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी प्रस्ताव को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि उसकी शर्तें अमेरिका के हितों के अनुकूल नहीं हैं।
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बिखरा हुआ नेतृत्व: ट्रंप ने कहा कि ईरान का नेतृत्व वर्तमान में एकजुट नहीं है, जिससे किसी ठोस समझौते पर पहुँचना मुश्किल हो रहा है।
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परमाणु कार्यक्रम पर 'नो कॉम्प्रोमाइज': ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु शक्ति नहीं बनने देगा। उन्होंने कहा कि "पागलों के हाथ में परमाणु हथियार" पूरी दुनिया, विशेषकर इजरायल और यूरोप के लिए बड़ा खतरा हैं।
क्या फिर भड़केगी जंग की आग?
यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब हाल ही में (8 अप्रैल 2026 को) एक अस्थायी युद्धविराम के बाद स्थिति कुछ शांत हुई थी। लेकिन अब बातचीत की मेज पर गतिरोध ने फिर से सैन्य टकराव की स्थिति पैदा कर दी है।
विवाद के मुख्य कारण:
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे संवेदनशील मार्ग, जिस पर ईरान अपना प्रभुत्व चाहता है।
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यूरेनियम संवर्धन: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद करे, जबकि ईरान इसे अपना संप्रभु अधिकार मानता है।
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वॉर पावर्स रेजोल्यूशन: ट्रंप ने इस कानून को असंवैधानिक बताते हुए विदेशी संघर्षों में अपनी सैन्य शक्तियों के प्रयोग को सही ठहराया है।


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