छावनी इलाके में जांच तेज, 29 बंगलों की जमीन पर उठे सवाल
जबलपुर। सदर बाजार स्थित मेहंदीबाग क्षेत्र में इन दिनों सेना और रक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे एक विशेष सर्वे ने स्थानीय रहवासियों के बीच बेचैनी पैदा कर दी है। सालों से इन इलाकों में रह रहे परिवारों को आशंका है कि इस प्रक्रिया के बाद उन्हें विस्थापित किया जा सकता है।
संयुक्त टीम द्वारा सघन ऑडिट और सर्वे
केंद्र सरकार द्वारा छावनी (कैंटोनमेंट) के नागरिक क्षेत्रों को स्थानीय नगर निकायों में शामिल करने की कवायद के बीच, सेना ने अपने अधिकार क्षेत्र वाली संपत्तियों पर निगरानी सख्त कर दी है।
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सर्वे टीम: आर्मी स्टेशन सेल, छावनी बोर्ड और रक्षा संपदा कार्यालय (DEO) की एक संयुक्त टीम मेहंदीबाग के 'पुराने अनुदान' (Old Grant) वाले बंगलों का सर्वे कर रही है। इसमें मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (MES) के अधिकारी भी शामिल हैं।
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प्रशासनिक तर्क: अधिकारियों का कहना है कि यह एक नियमित ऑडिट है और सुरक्षा कारणों से जमीनों का रिकॉर्ड अपडेट किया जा रहा है। टीम घर-घर जाकर नागरिकों को भूमि के स्वामित्व के बारे में जानकारी दे रही है।
29 बंगलों का भविष्य अधर में
जबलपुर छावनी क्षेत्र में कुल 29 ऐसे बंगले हैं जो पुराने अनुदान पर आधारित हैं।
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इनमें से अधिकांश में कई पीढ़ियों से नागरिक परिवार रह रहे हैं।
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कुछ बंगले जर्जर होकर ढह चुके हैं, जिन्हें आर्मी स्टेशन सेल ने अपने नियंत्रण में ले लिया है।
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जो बंगले अभी भी रिहायशी उपयोग में हैं, वहां रहने वाले लोगों को नोटिस या सर्वे की वजह से बेदखली का डर सता रहा है।
नेताओं और रहवासियों का विरोध
इस कार्रवाई पर स्थानीय राजनीति भी गरमा गई है। पूर्व छावनी बोर्ड उपाध्यक्ष अभिषेक चिंटू चौकसे और युवा कांग्रेस नेता राहुल रजक ने इस सर्वे का कड़ा विरोध किया है।
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आरोप: नेताओं का कहना है कि पीढ़ियों से बसे हुए परिवारों को सर्वे के नाम पर मानसिक रूप से डराया जा रहा है, जो कि न्यायसंगत नहीं है।
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मांग: स्थानीय प्रतिनिधियों का तर्क है कि जब सरकार छावनी क्षेत्रों को नागरिक निकायों में विलय करने की बात कर रही है, तो ऐसे समय में सेना की इस सक्रियता से आम जनता में गलत संदेश जा रहा है।


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