वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था दिखा रही दमदार प्रदर्शन
मुंबई: वैश्विक अस्थिरता और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूती का लोहा मनवा रही है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की नवीनतम शोध रिपोर्ट के अनुसार, बाहरी चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की जीडीपी (GDP) विकास दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह रिपोर्ट दर्शाती है कि घरेलू मांग और मजबूत आर्थिक नीतियां देश को प्रगति की दिशा में अग्रसर रख रही हैं।
घरेलू खपत: ग्रामीण और शहरी मांग में निरंतरता
एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष (FY26) में भारत की विकास दर 7.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष का मानना है कि कृषि क्षेत्र में सुधार और ग्रामीण आय बढ़ने से गांवों में खपत काफी मजबूत हुई है। वहीं, त्योहारी सीजन के बाद से शहरों में भी खरीदारी की रफ्तार तेज बनी हुई है। सरकार द्वारा दिए जा रहे राजकोषीय प्रोत्साहनों ने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मांग को बढ़ाकर आर्थिक वृद्धि को एक ठोस आधार प्रदान किया है।
बैंकिंग सेक्टर: ऋण वितरण में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
अर्थव्यवस्था में बढ़ती मांग का सबसे सकारात्मक असर बैंकिंग क्षेत्र पर दिख रहा है। आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ (ऋण वृद्धि) पिछले साल के 11% से बढ़कर अब 16.1% के प्रभावशाली स्तर पर पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2026 के दौरान कुल 29.5 लाख करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में यह तेजी बरकरार रहेगी, जबकि पूरे वर्ष के लिए औसत ऋण वृद्धि 13 से 14 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है।
कच्चे तेल का गणित: अर्थव्यवस्था पर असर और चुनौतियां
रिपोर्ट में कच्चे तेल की कीमतों और अर्थव्यवस्था के अंतर्संबंधों का भी विश्लेषण किया गया है। वर्तमान में मई 2026 में तेल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं। एसबीआई के अर्थशास्त्रियों का आकलन है कि यदि तेल की कीमतों में 10 डॉलर की वृद्धि होती है, तो देश का चालू खाता घाटा (CAD) 35 आधार अंक बढ़ सकता है और जीडीपी में करीब 0.25% की कमी आ सकती है। हालांकि, 100 डॉलर प्रति बैरल के औसत मूल्य को ध्यान में रखते हुए ही आगामी वर्ष के लिए 6.6% की विकास दर का अनुमान लगाया गया है।
भविष्य की राह: चुनौतियों के बीच मजबूत भारत
एसबीआई की यह रिपोर्ट पुष्टि करती है कि यद्यपि कच्चा तेल और वैश्विक तनाव महंगाई के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं, लेकिन भारत की आंतरिक अर्थव्यवस्था इन झटकों को सहने के लिए पूरी तरह सक्षम है। बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती और बढ़ती घरेलू मांग भारत को वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं की कतार में बनाए रखेगी। मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और आपूर्ति श्रृंखला को सुव्यवस्थित रखना भविष्य की आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होगा।


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