भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) अक्सर सार्वजनिक मंचों से यह संदेश देता रहा है कि टीम इंडिया में एंट्री का रास्ता केवल और केवल घरेलू क्रिकेट की पिचों से होकर गुजरता है। खुद बोर्ड ने भी साफ किया था कि खिलाड़ियों को भारतीय टीम का टिकट तभी मिलेगा जब वे घरेलू टूर्नामेंट्स में अपना लोहा मनवाएंगे। इसी कड़े रुख के कारण पिछले रणजी सीजन में रोहित शर्मा, विराट कोहली, शुभमन गिल और रवींद्र जडेजा जैसे स्थापित दिग्गज भी अपनी-अपनी राज्य की टीमों के लिए खेलते नजर आए थे। लेकिन हाल ही में घोषित हुई टेस्ट टीम के बाद बीसीसीआई की कथनी और करनी पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

रणजी के सूरमाओं की अनदेखी से हैरान क्रिकेट प्रेमी

अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले एकमात्र टेस्ट मैच के लिए जब मुख्य चयन समिति ने भारतीय टीम का ऐलान किया, तो क्रिकेट जगत दंग रह गया। रणजी ट्रॉफी (2025-26) के पूरे सीजन में बल्ले और गेंद से रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को टीम में चुनना तो दूर, उनके नाम पर गंभीरता से विचार तक नहीं किया गया। रणजी ट्रॉफी को देश का सबसे प्रतिष्ठित फर्स्ट क्लास टूर्नामेंट माना जाता है, और नियमतः इसके टॉप परफॉर्मर्स राष्ट्रीय टीम के सबसे बड़े दावेदार होते हैं। इसके बावजूद चयनकर्ताओं ने इस सीजन के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है।

जम्मू-कश्मीर के हीरो आकिब नबी को नहीं मिला इनाम

रणजी ट्रॉफी (2025-26) में जम्मू-कश्मीर के 29 वर्षीय दाएं हाथ के तेज गेंदबाज आकिब नबी ने अपनी रफ्तार और स्विंग से सबको हैरान किया था। अपनी टीम को इतिहास में पहली बार रणजी चैंपियन बनाने वाले नबी ने इस सीजन के 10 मैचों में रिकॉर्ड 60 विकेट चटकाए। उन्होंने सात बार एक पारी में 5 या उससे ज्यादा विकेट लेने का कारनामा किया, जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 24 रन देकर 7 विकेट रहा। वे सेमीफाइनल और फाइनल जैसे बड़े मुकाबलों में 'प्लेयर ऑफ द मैच' रहे।

भारतीय पिचों पर किसी तेज गेंदबाज द्वारा ऐसा जादुई प्रदर्शन करने के बाद पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान समेत कई दिग्गजों को उम्मीद थी कि आकिब नबी को अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट टीम में मौका मिलेगा। अब तक 41 प्रथम श्रेणी मैचों में 156 विकेट ले चुके इस गेंदबाज को बाहर रखना प्रशंसकों के गले नहीं उतर रहा है।

950 रन बनाने वाले रविचंद्रन स्मरण भी टीम से बाहर

गेंदबाजी के अलावा बल्लेबाजी में भी चयनकर्ताओं का रवैया हैरान करने वाला रहा। कर्नाटक के खब्बू बल्लेबाज रविचंद्रन स्मरण इस रणजी सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे थे। स्मरण ने महज 9 मैचों की 14 पारियों में तीन बार नाबाद रहते हुए 950 रन ठोक दिए, जिसमें 4 शानदार शतक और 3 अर्धशतक शामिल थे। उनका बेस्ट स्कोर नाबाद 227 रन रहा। इतने भारी-भरकम स्कोर के बावजूद इस युवा बल्लेबाज को भारतीय टेस्ट टीम में जगह नहीं दी गई।

13 साल से डेब्यू का इंतजार कर रहे अभिमन्यु ईश्वरन

इसी तरह बंगाल के 30 वर्षीय अनुभवी बल्लेबाज अभिमन्यु ईश्वरन की कहानी भी बेहद निराशाजनक रही है। पिछले 13 सालों से घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगा रहे ईश्वरन ने 113 प्रथम श्रेणी मैचों में 27 शतकों की मदद से 8,381 रन बनाए हैं। उन्हें कई बार भारतीय दल में बैकअप बल्लेबाज के तौर पर शामिल तो किया गया, लेकिन कभी अंतिम एकादश (प्लेइंग इलेवन) में डेब्यू करने का मौका नहीं मिला। दूसरी तरफ, उनके बाद आए कई जूनियर खिलाड़ी आईपीएल के ग्लैमर और प्रदर्शन के दम पर भारत के लिए डेब्यू कर चुके हैं। चयन समिति के इस दोहरे मापदंड के बाद अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या टीम इंडिया में सिलेक्शन के लिए रणजी ट्रॉफी के प्रदर्शन की अहमियत वाकई खत्म होती जा रही है?