अवैध रेत खनन पर आधी रात छापा, विधायक ने नदी में पहुंचकर पकड़ी मशीनें
बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में बहने वाली मिंगाचल नदी के सीने को चीरकर किए जा रहे अवैध रेत खनन के खिलाफ बीती रात एक बड़ी और औचक कार्रवाई सामने आई है। बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात करीब एक बजे स्थानीय विधायक विक्रम मंडावी ने अपनी टीम के साथ मिंगाचल नदी में चल रहे कथित अवैध रेत खदान स्थल पर अचानक धावा बोल दिया। आधी रात को जनप्रतिनिधि के इस औचक निरीक्षण से नदी के भीतर भारी पोकलेन मशीनों की मदद से अंधाधुंध रेत निकाल रहे सिंडिकेट और संबंधित प्रशासनिक विभागों में हड़कंप मच गया है।
रात के अंधेरे में नदी के भीतर चल रहा था खूनी खेल
विधायक के औचक निरीक्षण के दौरान नदी के तटीय और जल क्षेत्र में कई भारी-भरकम चैन माउंटेन मशीनें, हाईवा, टिप्पर और दर्जनों ट्रैक्टर अवैध रूप से रेत लोड करते और परिवहन करते रंगे हाथों पाए गए। बताया जा रहा है कि नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी वैध रॉयल्टी और अनुमति के इस कीमती खनिज की सरेआम चोरी की जा रही थी। विधायक विक्रम मंडावी ने मौके की नजाकत को देखते हुए आधी रात को ही फोन पर खनिज विभाग के आला अफसरों और स्थानीय पुलिस प्रशासन को तलब किया। उन्होंने अधिकारियों को जमीनी हकीकत दिखाते हुए अवैध गतिविधियों को तुरंत बंद कराने और सभी वाहनों को जब्त करने के कड़े निर्देश दिए।
राजस्व को चपत और पर्यावरण को भारी नुकसान
स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि इस क्षेत्र में लंबे समय से रेत का यह अवैध धंधा फल-फूल रहा था। माफियाओं द्वारा बेखौफ होकर किए जा रहे इस कृत्य से न केवल शासन को मिलने वाले लाखों रुपये के सरकारी राजस्व (रॉयल्टी) का चूना लग रहा था, बल्कि नदी के प्राकृतिक बहाव और आसपास के जलस्तर व पर्यावरण पर भी इसका बेहद प्रतिकूल और विनाशकारी प्रभाव पड़ रहा है। विधायक की इस अचानक हुई दबिश के बाद से रेत के अवैध कारोबार से जुड़े रसूखदारों और बिचौलियों में हड़कंप का माहौल है।
विभागीय मिलीभगत और प्रशासनिक निगरानी पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे मामले के बेनकाब होने के बाद क्षेत्र में अवैध खनन की निगरानी करने वाले महकमों और उनकी कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठने लगी हैं। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि रात के सन्नाटे में इतनी बड़ी-बड़ी मशीनों को नदी में उतारकर बड़े पैमाने पर रेत का उत्खनन करना स्थानीय स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों की मूक सहमति या जानकारी के बिना मुमकिन ही नहीं है। इस घटना के बाद से खनिज और राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका को लेकर भी क्षेत्र में चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं।
वाहनों की हो रही है नंबरों से जांच, कड़ी कार्रवाई की तैयारी
विधायक के कड़े रुख के बाद आधी रात को ही मौके पर पहुंची पुलिस और खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने वहां मौजूद सभी संदिग्ध वाहनों, ट्रैक्टरों और पोकलेन मशीनों को अपने नियंत्रण में ले लिया है। फिलहाल, जब्त की गई गाड़ियों के चेसिस और रजिस्ट्रेशन नंबरों के जरिए उनके मालिकों का पता लगाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की बारिकी से पड़ताल की जा रही है और जांच रिपोर्ट सामने आते ही पर्यावरण अधिनियम और चोरी की धाराओं के तहत जिम्मेदार लोगों के खिलाफ बिना किसी दबाव के सख्त से सख्त दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


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