इस्राइल-अमेरिका पर हिजबुल्ला का हमला, ट्रंप को भी घेरा; कहा- जीत हमारी हुई
बेरूत। पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों के बीच हिजबुल्ला के शीर्ष नेता शेख नईम कासिम ने अमेरिका और इस्राइल की रणनीतियों पर तीखा प्रहार किया है। उनका दावा है कि ईरान और क्षेत्र के अन्य विद्रोही संगठनों को मिटाने का अमेरिकी-इस्राइली मंसूबा पूरी तरह पस्त हो चुका है। कासिम ने जोर देकर कहा कि लेबनान में इस्राइल द्वारा की जा रही सैन्य कार्रवाई को अमेरिका का पूरा शह प्राप्त है। उन्होंने रेखांकित किया कि इस टकराव के बाद पश्चिम एशिया अब एक ऐसे नए युग की तरफ बढ़ रहा है, जहाँ अमेरिकी-इस्राइली योजनाओं को शिकस्त झेलनी पड़ी है। मध्य अशूरा परिषद में बोलते हुए उन्होंने कहा कि तमाम पाबंदियों और नुकसान के बाद भी ईरान पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर बनकर उभरा है और वह अपने क्षेत्रीय वजूद से कभी पीछे नहीं हटेगा।
सैन्य कार्रवाई की छूट वाले युद्धविराम प्रस्तावों पर हिजबुल्ला का रुख
हिजबुल्ला प्रमुख ने उन सभी शांति प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें इस्राइल को अपनी सैन्य गतिविधियां जारी रखने की परोक्ष अनुमति दी गई हो। कासिम का मानना है कि ऐसे समझौते असल में युद्धविराम नहीं, बल्कि हमले जारी रखने का एक नया बहाना हैं। उन्होंने अतीत का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि हिजबुल्ला द्वारा नियमों का पालन किए जाने के बावजूद इस्राइल ने हमेशा समझौतों को तोड़ा है। संगठन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल उसी प्रस्ताव पर सहमत होगा जो पूरी तरह से सैन्य अभियानों पर रोक लगाने की पक्की गारंटी देता हो।
हिजबुल्ला की शर्तें और भविष्य की रणनीतिक मांगें
संगठन की मांग है कि एक वास्तविक युद्धविराम के तहत जल, थल और नभ तीनों मोर्चों से होने वाले सभी हमलों पर तुरंत पूर्ण विराम लगना चाहिए। इसके साथ ही लेबनान के भीतर रिहाइशी और अन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बनाना बंद किया जाए और इस्राइली सैनिक लेबनानी सीमाओं से पूरी तरह वापस लौटें। कासिम ने ईरान से मिल रहे मजबूत सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि तेहरान के लिए लेबनान की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी करना एक बड़ा और असरदार रणनीतिक कदम साबित हो सकता है।
अमेरिकी नेतृत्व की भूमिका और पश्चिम एशिया के बदलते समीकरण
कासिम ने अमेरिकी प्रशासन को इस जंग के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वाशिंगटन की मदद के बिना इस्राइल इस स्तर पर तबाही नहीं मचा सकता था। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप में इस युद्ध को तुरंत रुकवाने की क्षमता है, क्योंकि अगर अमेरिका कड़ा रुख अपनाए तो बेंजामिन नेतन्याहू उसकी बात को नजरअंदाज नहीं कर पाएंगे। हिजबुल्ला का यह कड़ा रुख ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी बातचीत चल रही है और तनाव घटाने के लिए 14 सूत्रीय समझौते पर काम हो रहा है। लेबनान में इस्राइली कार्रवाई को रोकना इस कूटनीति का मुख्य हिस्सा है, लेकिन हिजबुल्ला के तेवरों से साफ है कि शांति की राह अभी भी बेहद पेचीदा है।


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