डॉलर के सामने क्यों नहीं टिक पा रहा रुपया, विशेषज्ञों की राय
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार और विदेशी मुद्रा बाजार में जारी हलचल के बीच सोमवार, 22 जून को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली रूप से 4 पैसे टूटकर 94.36 के स्तर पर खुला। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता में सकारात्मक प्रगति के संकेतों से भारतीय मुद्रा को लगातार सहारा मिल रहा है। गौरतलब है कि पिछले कारोबारी सप्ताह के दौरान रुपया 0.8% की मजबूती के साथ 94.32 पर बंद हुआ था, जो बीते तीन महीनों में इसकी सबसे शानदार साप्ताहिक बढ़त रही। लगातार छह सत्रों की इस तेजी के दौरान रुपये ने कई महीनों के उच्चतम स्तर 94.18 को भी छुआ, जिससे पिछले महीने 97 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंचने के बाद इसमें एक बेहतरीन रिकवरी दर्ज की गई है।
कच्चे तेल में गिरावट और जियोपॉलिटिकल राहत
विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार, कच्चे तेल के दामों में आई नरमी और वाशिंगटन व तेहरान के बीच चल रही राजनयिक बातचीत के सकारात्मक नतीजों से रुपये की मजबूती को और बल मिल सकता है। वैश्विक बाजार में अगस्त डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड वायदा 1.7% फिसलकर $79.24 प्रति बैरल पर आ गया है। यह गिरावट तब देखने को मिली जब ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ हुई वार्ता में अच्छी प्रगति होने के संकेत दिए। यह बातचीत ईरानी अधिकारियों और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद आगे बढ़ी है। ईरान के इस सकारात्मक रुख से निवेशकों की वह चिंताएं दूर हुई हैं, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की चेतावनी और तेहरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रैट) को बंद करने की धमकी के बाद पैदा हुई थीं।
ग्लोबल रिस्क और घरेलू फ्लो के बीच फंसा रुपया
करेंसी रणनीतिकारों का मानना है कि भारतीय रुपया इस समय दो विपरीत ताकतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ जहां देश में लगातार हो रहा विदेशी निवेश (डेट इनफ्लो) और विदेशी मुद्रा जमा (फॉरेन करेंसी डिपॉजिट) रुपये को मजबूती दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना भारतीय मुद्रा के लिए चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि रुपया आने वाले समय में एक सीमित दायरे में कारोबार करता नजर आएगा। बाजार की अगली दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि घरेलू स्तर पर आने वाला पूंजी प्रवाह बाहरी भू-राजनीतिक दबावों और डॉलर की मजबूती पर कितना हावी हो पाता है।
तकनीकी स्तर और रुपये का भविष्य का रुख
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, तकनीकी नजरिए से देखें तो डॉलर के मुकाबले रुपये के लिए 94.00 से 94.20 का स्तर एक बेहद मजबूत सपोर्ट जोन के रूप में काम करेगा। इसके विपरीत, ऊपरी स्तरों पर 94.80 से 95.00 का दायरा इसके लिए तत्काल कड़े रेजिस्टेंस बैंड की तरह देखा जा रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से बढ़ते निवेश और कच्चे तेल की कीमतों के नियंत्रण में रहने के कारण फिलहाल रुझान रुपये की बढ़त की तरफ ही झुका हुआ है। यदि बाजार के फंडामेंटल्स इसी तरह मजबूत बने रहते हैं, तो आने वाले दिनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 94.00 से 93.80 के स्तर की तरफ भी कदम बढ़ा सकता है।


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