फडणवीस सरकार ने खोला विकास का खजाना, सड़क परियोजना को मिली मंजूरी
मुंबई: मुंबईकरों को ट्रैफिक की भारी समस्या से निजात दिलाने और यात्रा के समय को बेहद कम करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। महाराष्ट्र कैबिनेट की इंफ्रास्ट्रक्चर उप-समिति ने 1,722.40 करोड़ रुपये की लागत वाली एक नई और महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता वाली उप-समिति ने गुरुवार को इस परियोजना को हरी झंडी दिखाई, जिसे इससे पहले 17 जून को मुख्य सचिव की समिति ने भी अपनी मंजूरी दे दी थी। इस सड़क निर्माण का पूरा जिम्मा महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) को सौंपा गया है।
समय की होगी भारी बचत (वर्ली से फोर्ट सिर्फ 5 मिनट में)
यह नई सड़क कनेक्टिविटी मुंबई के दो प्रमुख हिस्सों के बीच की दूरी और सफर के समय को नाटकीय रूप से कम कर देगी:
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वर्ली से फोर्ट: इस 3.55 किलोमीटर लंबी सड़क के बन जाने से वर्ली से फोर्ट की यात्रा का समय 45 मिनट से घटकर मात्र 5 से 10 मिनट रह जाएगा।
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फोर्ट से वर्सोवा: इसी तरह, फोर्ट से वर्सोवा जाने में जहां अभी एक घंटे का लंबा समय लगता है, वह सफर घटकर केवल 15 से 20 मिनट का रह जाएगा।
वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक और सावरकर सी ब्रिज को जोड़ेगी सड़क
भौगोलिक रूप से यह बेहद महत्वपूर्ण पैच होगा, क्योंकि यह 3.55 किलोमीटर लंबी सड़क वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक के बांद्रा फोर्ट छोर को सीधे सावरकर सी ब्रिज से जोड़ने का काम करेगी। इससे पश्चिमी उपनगरों और दक्षिण मुंबई के बीच का संपर्क बेहद सुचारू हो जाएगा।
पुनर्वास, मछुआरों और पर्यावरण के लिए विशेष बजट
परियोजना के सुगम क्रियान्वयन के लिए सरकार ने प्रभावितों के मुआवजे और पर्यावरण का भी विशेष ध्यान रखा है:
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झुग्गी पुनर्वास: इस परियोजना के दायरे में आने वाली 40 झुग्गियों के पुनर्वास के लिए 50 करोड़ रुपये का मुआवजा और फंड तय किया गया है।
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मछुआरा समुदाय: स्थानीय मछुआरों के हितों की रक्षा और सहायता के लिए 20 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
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पर्यावरणीय उपाय: निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई और इको-फ्रेंडली उपायों के लिए अलग से 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मई 2028 तक पूरी होगी परियोजना
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरी सड़क परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर उप-समिति की मंजूरी के बाद अब इस पर तेजी से काम शुरू होगा और इसके मई 2028 तक पूरी तरह से बनकर तैयार होने की उम्मीद है।


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