अमेरिका में हाई-प्रोफाइल केस: पूर्व NSA जॉन बोल्टन ने दोष स्वीकार किया, अक्टूबर में होगी सजा पर सुनवाई
वॉशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने गोपनीय सरकारी दस्तावेजों को अवैध रूप से अपने पास रखने के मामले में संघीय अदालत में अपना गुनाह कबूल कर लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में इस महत्वपूर्ण पद पर रहे 77 वर्षीय बोल्टन ने मैरीलैंड की जिला अदालत में यह दोष स्वीकार किया। इस मामले में बोल्टन और अमेरिकी न्याय विभाग के बीच एक समझौता भी हुआ है, जिससे उनकी संभावित जेल की सजा की अवधि कम हो सकती है, हालांकि सजा पर अंतिम निर्णय अदालत द्वारा ही लिया जाएगा। इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बोल्टन की आलोचना की है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जानें क्या हैं जॉन बोल्टन पर लगे आरोप
बोल्टन पर सरकारी सेवा के दौरान तैयार किए गए अपने निजी नोट्स, डायरियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों को अवैध रूप से अपने पास रखने के कुल 18 आरोप लगाए गए थे। जांच के मुताबिक, उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अपने दैनिक कामकाज के करीब 1,000 से अधिक पन्नों के गोपनीय दस्तावेजों को अनधिकृत रूप से अपने पास रखा था। इन दस्तावेजों में से कुछ को उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों के साथ भी साझा किया था, जिसे अमेरिकी कानून के तहत एक गंभीर सुरक्षा चूक माना गया है।
न्याय विभाग के साथ समझौता और संभावित सजा
अदालती नियमों के अनुसार इस तरह के अपराध के लिए अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल का प्रावधान है, लेकिन न्याय विभाग के साथ हुए समझौते के तहत बोल्टन को कुछ राहत मिल सकती है। इस समझौते के मुताबिक, बोल्टन 22.5 लाख अमेरिकी डॉलर का जुर्माना भरने और अपनी सरकारी पेंशन छोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं। इसके साथ ही उन्हें जांच अधिकारियों के पूछताछ सत्रों में शामिल होना होगा और 100 घंटे की सामुदायिक सेवा करनी होगी। इस समझौते में उनकी जेल की सजा को अधिकतम 5 साल तक सीमित रखने का सुझाव दिया गया है, जिस पर अदालत आगामी 28 अक्टूबर को अपना अंतिम फैसला सुनाएगी।
दस्तावेजों की लीक और ट्रंप से रिश्तों में खटास
जांच में यह बात सामने आई है कि बोल्टन ने कुछ संवेदनशील दस्तावेज अपनी पत्नी और बेटी को ईमेल के जरिए भेजे थे। हालांकि, ये दस्तावेज उनके परिवार से आगे किसी और तक नहीं पहुंचे, लेकिन पद छोड़ने के बाद बोल्टन का निजी ईमेल खाता ईरान के एक हैकर समूह के निशाने पर आ गया था, जिससे इस गोपनीय डेटा के लीक होने का खतरा पैदा हो गया था। गौरतलब है कि वर्ष 2019 में पद से हटने के बाद बोल्टन ने एक किताब लिखी थी, जिसमें उन्होंने ट्रंप की नीतियों की कड़ी आलोचना की थी, जिसके बाद से ही दोनों नेताओं के बीच संबंध काफी खराब हो गए थे।


सरकार से संवाद की पहल, सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखी शर्त
समाजवादी पार्टी की महिला नेता सीमा राजभर पर बलिया में मुकदमा दर्ज, बढ़ीं मुश्किलें
शिवसेना के बागी सांसदों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, सुनवाई स्वीकार कर जारी किया नोटिस
जयशंकर ने QUAD मंच से क्या-क्या कहा? हिंद-प्रशांत, सुरक्षा और साझेदारी पर दिए अहम संदेश
'चड्डी-बनियान गैंग' फिर एक्टिव! रात में चोरी की वारदातों से लोगों में डर
रोजगार और परीक्षाओं पर राहुल गांधी का वार, पेपर लीक को लेकर सरकार पर साधा निशाना
भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट की एंट्री, अर्जी पर सुनवाई से बढ़ी उम्मीदें
अनियमितताओं पर शिकंजा, नगर निगम ने शुरू की बिल्डिंग नक्शों की जांच
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर विरोध करने पहुंचे दंपति हिरासत में, पुलिस ने बताई वजह
भोपाल में कांग्रेस दफ्तर पर घेराव की तैयारी, पुलिस ने भाजपा नेताओं को रोका