'इतनी बड़ी हेराफेरी बिना बड़े लोगों के संभव नहीं'— राम मंदिर चढ़ावा मामले में प्रियंका गांधी का बड़ा बयान
अयोध्या। श्री राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल चुका है। इस घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यह मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि देश-विदेश के करोड़ों राम भक्तों की धार्मिक भावनाओं और अटूट आस्था से जुड़ा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभु श्री राम के चरणों में अर्पित किया जाने वाला दान श्रद्धालुओं की परम श्रद्धा का प्रतीक है और इसमें किसी भी प्रकार की हेराफेरी या धांधली को बेहद गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जाना चाहिए।
धार्मिक आस्था और निष्पक्ष जांच की मांग
प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी अपने संदेश में कहा कि धर्म, आस्था और विश्वास के नाम पर की जाने वाली कोई भी चोरी या गड़बड़ी समाज के नैतिक ताने-बाने को गहरी चोट पहुंचाती है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की अत्यंत निष्पक्ष, गहन और पारदर्शी जांच कराने की पुरजोर मांग की है ताकि इस मामले से जुड़े सच को किसी भी स्तर पर दबाया या छुपाया न जा सके। उनका मानना है कि जब तक जांच पूरी तरह स्पष्ट नहीं होगी, तब तक लोगों के मन में संशय बना रहेगा।
सुरक्षा चूक और बड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
कांग्रेस सांसद ने जांच की दिशा और उसकी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए यह आशंका जताई कि क्या इतने बड़े पैमाने पर की गई हेराफेरी सिर्फ निचले स्तर के छोटे कर्मचारियों के बूते संभव है। उन्होंने कहा कि घटना के वक्त सीसीटीवी कैमरों का बंद होना और चढ़ावे की राशि गायब होना कई बड़े सवाल खड़े करता है। इसकी तह तक जाना बेहद जरूरी है कि क्या इसमें केवल छोटे कर्मचारी ही शामिल हैं या फिर इसके पीछे किसी उच्च स्तर पर बैठे लोगों का हाथ है, जिनकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
पारदर्शिता की आवश्यकता और बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आस्था से जुड़े ऐसे संवेदनशील मामलों में महज औपचारिकता के लिए की गई सीमित या दिखावे की कार्रवाई से जनता का विश्वास बहाल नहीं किया जा सकता। यदि जांच में किसी की भी संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के सख्त कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। दूसरी तरफ, इस चोरी के मामले में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज होने के बाद से ही सियासी पारा चढ़ गया है, जहां विपक्ष लगातार प्रशासनिक मुस्तैदी और जवाबदेही पर सवाल दाग रहा है, वहीं जांच एजेंसियां मिले सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई में जुटी हुई हैं।


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