उद्धव ठाकरे ने क्यों दिया 'भाजपा-मुक्त राम' का नारा? जानिए उनके बयान की बड़ी बातें
मुंबई। महाराष्ट्र के राजनीतिक रणक्षेत्र में एक बार फिर हिंदुत्व और अयोध्या का मुद्दा पूरी तरह गरमा गया है। शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अयोध्या के ऐतिहासिक राम मंदिर के दान में हुए कथित गबन के मामले को मुख्य हथियार बनाते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर बेहद तीखा और चौतरफा हमला बोला है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने संगीन आरोप लगाया कि भाजपा ने हमेशा करोड़ों सनातनी हिंदुओं की अगाध धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है और अब चंदा चोरी के आरोपों ने उनके विश्वास को पूरी तरह तोड़ दिया है। उन्होंने घोषणा की कि भगवान राम को किसी एक राजनीतिक दल के चंगुल से मुक्त कराने के लिए उनकी पार्टी जल्द ही देशव्यापी 'भाजपा-मुक्त राम' आंदोलन का शंखनाद करेगी, जिसने राज्य की सियासत में एक नया वैचारिक विवाद खड़ा कर दिया है।
विपक्षी दलों को तोड़ने की नीति और असली बनाम नकली हिंदुत्व की परिभाषा
यवतमाल-वाशिम संसदीय क्षेत्र की इस विशाल आक्रोश रैली में हुंकार भरते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि असली हिंदुत्व वह है जो संपूर्ण मानवता, करुणा और न्याय सिखाता है, परंतु वर्तमान सत्ताधारी दल का हिंदुत्व केवल पवित्र धार्मिक स्थलों को लूटने और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाला छद्म हिंदुत्व है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि जब भी जनता बेरोजगारी, अनियंत्रित महंगाई और त्रस्त किसानों जैसे बुनियादी व जमीनी मुद्दों पर जवाब मांगती है, तब भाजपा मुख्य विमर्श से ध्यान भटकाने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके विपक्षी राजनीतिक दलों को असंवैधानिक तरीके से तोड़ने का काम शुरू कर देती है। ठाकरे ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस विभाजनकारी राजनीति को कतई स्वीकार नहीं करेगी।
भगवान राम पर एकाधिकार का विरोध और 'भाजपा-मुक्त राम' अभियान
उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में तार्किक रुख अपनाते हुए रेखांकित किया कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम संपूर्ण सृष्टि और ब्रह्मांड के हैं, वे किसी एक राजनीतिक संगठन की बपौती या निजी संपत्ति नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट बैंक की खातिर दशकों तक प्रभु राम के नाम का राजनीतिकरण किया गया, और अब मंदिर निर्माण के पावन कोष में हुई करोड़ों की वित्तीय हेरफेर के प्रमाण सामने आने के बाद भाजपा की बची-खुची राजनीतिक नैतिकता भी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। कांग्रेस और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर उनकी पार्टी इस महाघोटाले के खिलाफ न सिर्फ विधिक लड़ाई लड़ेगी, बल्कि 'भाजपा-मुक्त राम' अभियान के तहत जन-जन को जागरूक करने के लिए सड़कों पर उतरकर बड़ा जनांदोलन खड़ा करेगी।
चंदा चोरी मामले में अब तक की बरामदगी और कानूनी कार्रवाई की स्थिति
इस राजनीतिक घमासान की पृष्ठभूमि में अगर अयोध्या के मूल मामले के कानूनी पहलुओं को देखें तो श्रद्धालुओं की आस्था की गाढ़ी कमाई के दान में हुए गबन के मामले ने पूरे देश के प्रशासनिक महकमे में खलबली मचा रखी है। इस पूरे वित्तीय धोखाधड़ी कांड में जांच एजेंसियों और पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक गिरफ्तार किए जा चुके सभी आठ मुख्य आरोपियों को अदालत द्वारा शुक्रवार को कड़ी न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। सरकारी वकीलों और विधिक विंग के अनुसार, जांच दल ने अब तक आरोपियों के पास से 79.85 लाख रुपये की नकद व अन्य संपत्तियों की रिकवरी (बरामदगी) सुनिश्चित कर ली है। चूंकि इस मामले की गहन फॉरेंसिक और बैंकिंग तफ्तीश अभी भी निरंतर जारी है, इसलिए आने वाले दिनों में कुछ अन्य बड़े नामों के खुलासे और नए विधिक मोड़ों की प्रबल संभावना जताई जा रही है।


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