ज्येष्ठ पूर्णिमा पर दुर्लभ संयोग! जरूर करें ये उपाय, मिलेगा मां लक्ष्मी का आशीर्वाद
हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. इसे जेठ पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत, स्नान और दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. इस साल की ज्येष्ठ पूर्णिमा बेहद खास है क्योंकि इस दिन मूल नक्षत्र और शुक्ल योग का मिलाजुला संयोजन देखने को मिलेगा. उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, इस दिन कुछ उपाय करना बेहद लाभदायक रहेगा.
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 29 जून को तड़के 3 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी. इस तिथि का समापन 30 जून को सुबह 5 बजकर 26 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून दिन सोमवार को मनाई जाएगी. ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त अच्छा है. ब्रह्म मुहूर्त का समय 04 बजकर 06 मिनट से लेकर 04 बजकर 46 मिनट तक है. यह समय स्नान के लिए बड़ा ही शुभ रहेगा.
ज्येष्ठ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
ज्येष्ठ पूर्णिमा का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन व्रत रखकर भगवान सत्यनारायण की विधि-विधान से पूजा करने से घर-परिवार में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. मान्यता है कि संध्या समय माता लक्ष्मी की आराधना कर उन्हें प्रिय नैवेद्य अर्पित करने से धन-धान्य, वैभव और समृद्धि में वृद्धि होती है. वहीं चंद्रदेव को अर्घ्य देने से मानसिक तनाव कम होता है, मन स्थिर रहता है और आत्मविश्वास और मनोबल में भी बढ़ोतरी होती है.
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर जरूर करें ये उपाय
1. ज्येष्ठ पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा के बाद खीर में मिश्री मिलाकर भोग लगाएं. मान्यता है कि इससे घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है.
2. पूर्णिमा की रात चंद्रमा को जल, दूध, अक्षत और सफेद पुष्प अर्पित करने की परंपरा है. मान्यता है कि इस पूजन से मन को शांति, सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक सुकून प्राप्त होता है.
3. पूर्णिमा की सुबह घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक प्रज्वलित करना बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है और वातावरण में सकारात्मकता और मंगलमय ऊर्जा का संचार बढ़ता है.
4. पूर्णिमा के पावन अवसर पर भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन शिवलिंग पर बेलपत्र और पुष्प अर्पित करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्तों को जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.
5. ज्येष्ठ पूर्णिमा को दान, सेवा और पुण्य कर्मों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन जरूरतमंदों की सहायता और अन्नदान से सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.


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