गोंगपा के पूर्व जिलाध्यक्ष मुश्किल में, 15 करोड़ की मांग के आरोप में FIR के निर्देश
छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) के पूर्व जिला अध्यक्ष देवरावेन भलावी की कानूनी मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं। आदिवासी समाज की कृषि भूमि के क्रय-विक्रय (खरीदी-बिक्री) से उपजे एक बड़े विवाद में कथित तौर पर 15 करोड़ रुपये की मोटी रकम की अड़ीबाजी (जबरन वसूली), जान से मारने की धमकी देने और आपराधिक दबाव बनाने के संगीन आरोपों पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए देवरावेन भलावी सहित कुल चार नामजद आरोपियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए हैं। न्यायालय के इस कड़े निर्देश के बाद स्थानीय कुंडीपुरा थाना पुलिस ने विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत प्रकरण पंजीकृत कर मामले की विस्तृत वैधानिक जांच शुरू कर दी है, साथ ही पुलिस प्रशासन को एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपनी स्टेटस रिपोर्ट (प्रतिवेदन) अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
न्यायालय ने फरियादियों की याचिका पर दिया आदेश, इन कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत दर्ज हुआ केस
इस पूरे मामले में कानूनी पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रफीक अंसारी के अनुसार, माननीय न्यायालय ने माल्हनवाड़ा निवासी मुख्य फरियादी अल्फाज शाह उर्फ गोलू और उनके साथी समीर खान की ओर से दायर की गई आपराधिक याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह ऐतिहासिक आदेश पारित किया।
अदालत के निर्देश पर कुंडीपुरा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ नवप्रवर्तित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर और गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:
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धारा 308(2): जबरन वसूली (Extortion) करने या उसके लिए गंभीर भय पैदा करने के प्रयास से संबंधित।
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धारा 318(2) व 319(2): धोखाधड़ी (Cheating), जालसाजी और दूसरे का रूप धारण कर ठगी करने के प्रयास के तहत।
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धारा 351(3): पीड़ित और उसके परिवार को जान से मारने या गंभीर क्षति पहुंचाने की आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation) देने के आरोप में।
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सहपठित धारा 61: इस पूरे कृत्य को एक सुनियोजित साजिश और आपराधिक षड्यंत्र के तहत अंजाम देने के लिए। इस मामले में मुख्य आरोपी देवरावेन भलावी के अलावा, बिजौरी निवासी आजाद कुरैशी, गुलाबरा निवासी मोहिद खान और माल्हनवाड़ा निवासी मुबीन शाह को सह-आरोपी बनाया गया है।
16 एकड़ आदिवासी भूमि का सौदा और लोकायुक्त अधिकारी बनकर 15 करोड़ मांगने का सनसनीखेज आरोप
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भूमि की वैध खरीदी: अदालत में दायर मुख्य याचिका के तथ्यों के अनुसार, यह पूरा विवाद माल्हनवाड़ा क्षेत्र में स्थित लगभग 16 एकड़ की एक बेशकीमती कृषि भूमि से जुड़ा हुआ है। फरियादी अल्फाज शाह ने इस आदिवासी वर्ग की भूमि को मध्य प्रदेश शासन के नियमानुसार जिला कलेक्टर की उचित व विधिक अनुमति प्राप्त करने के बाद पूरी तरह कानूनी तरीके से खरीदा था।
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लोकायुक्त का डर और अड़ीबाजी: पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जैसे ही इस बड़ी भूमि रजिस्ट्री की जानकारी आरोपियों को हुई, उन्होंने फरियादी को घेरना शुरू कर दिया। आरोपियों ने खुद को राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक संगठन 'लोकायुक्त' का बड़ा अधिकारी बताते हुए पीड़ित पर केस दर्ज कराने और जेल भेजने का मानसिक दबाव बनाया।
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आंदोलन की धमकी: इस फर्जीवाड़े के जरिए आरोपियों ने मामले को रफा-दफा करने के एवज में 15 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी। साथ ही यह खुली धमकी भी दी गई कि यदि इतनी बड़ी रकम उन्हें नहीं दी गई, तो वे आदिवासी समाज को गुमराह करके गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के बैनर तले फरियादी की जमीन पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर देंगे और जमीन पर कब्जा नहीं होने देंगे।
दोनों पक्षों की ओर से हुई थी ताबड़तोड़ प्रेस कॉन्फ्रेंस, अब पुलिस करेगी दूध का दूध और पानी का पानी
यह हाई-प्रोफाइल मामला उस समय पहली बार जनमानस और मीडिया की सुर्खियों में आया था, जब पीड़ित अल्फाज शाह और समीर खान ने छिंदवाड़ा में एक प्रेस वार्ता (पत्रकार वार्ता) का आयोजन कर इस पूरे ब्लैकमेलिंग रैकेट और कॉल रिकॉर्डिंग्स के घटनाक्रम का सार्वजनिक खुलासा किया था। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के ठीक बाद, सियासी गलियारों में मचे हड़कंप के बीच आरोपी पक्ष ने भी आनन-फानन में एक जवाबी प्रेस वार्ता बुलाई थी। उस दौरान आरोपियों ने अपने ऊपर लगे सभी वित्तीय और आपराधिक आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक राजनीतिक साजिश बताया था और अपना पक्ष रखा था। हालांकि, अब इस मामले में सीधे न्यायालय ने हस्तक्षेप करते हुए पुलिस को दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए विधिवत एफआईआर और साक्ष्यों की जांच के कड़े आदेश दे दिए हैं।
पार्टी से पहले ही हो चुका है निष्कासन, अब जेल जाने की नौबत
छिंदवाड़ा: इस गंभीर वसूली कांड के सामाजिक और राजनीतिक मोर्चे पर तूल पकड़ने के तुरंत बाद ही गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने कड़ा संज्ञान लिया था। संगठन की छवि को बचाने के लिए गोंगपा आलाकमान ने देवरावेन भलावी को तत्काल प्रभाव से छिंदवाड़ा जिला अध्यक्ष के पद से बर्खास्त कर दिया था और प्राथमिक सदस्यता रद्द करते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित (Expel) कर दिया था। अब पद छिनने के बाद न्यायालय के इस ताजा और कड़े कानूनी हंटर ने देवरावेन भलावी के लिए जेल जाने के रास्ते खोल दिए हैं, जिससे जिले के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं एक बार फिर बेहद तेज हो गई हैं।


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