भारत का बेहद खूबसूरत गांव है मोराची चिंचोली, जहां आप एक साथ कई मोर-मोरनी को नाचते हुए देख सकते हैं। इसके अलावा यह एक बेस्ट पिकनिक स्पॉट है।  भारत में ऐसे कई गांव हैं, जो अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और अनोखी परंपरा के लिए जाने जाते हैं। प्राकृतिक नजारों के साथ गांव में पशु-पक्षियों को देखना काफी सुहावना लगता है। अक्सर शहरों में रहते हुए पशु-पक्षियों को हम टीवी पर ही देख पाते हैं, खासकर जब मोर को। एक साथ हजारों को मोर-मोरनी को देखना वाकई खूबसूरत नजारे से कम नहीं। भारत में एक ऐसा ही गांव हैं, जहां हजारों मोर एक साथ देखे जाते हैं। यह गांव मोरों की वजह से देशभर में प्रसिद्ध है।

पुणे से 50 किलोमीटर दूर यह एक ऐसा गांव है जहां पर करीब 2500 मोर रहते हैं। इस गांव का नाम है 'मोराची चिंचोली' यह गांव ग्रामीण महाराष्ट्र में बसे आकर्षक स्थान में एक है। अगर आप गांव की प्राकृतिक नजारों को मिस करते हैं और मोर-मोरनी को नाचता हुआ देखना पसंद करते हैं तो मोराची चिंचोली जरूर घूमने का प्लान जरूर बनाए। यह गांव पारंपरिक संस्कृति के साथ एक सच्चे और आदर्श गांव को प्रदर्शित करता है।

बेस्ट पिकनिक स्पॉट है मोराची चिंचोली

मोराची चिंचोली एक मराठी शब्द है, जिसका मतलब मोरों का गांव और इमली के पेड़। इस गांव में आप मोर चलते-फिरते कहीं भी देख सकते हैं। कभी छत के ऊपर तो कभी खेतों में। बारिश के मौसम में इस गांव का माहौल बेहद खूबसूरत होता है। हरे-भरे खेतों में मोर-मोरनी को आसानी से नाचते हुए देखा जा सकता है। अगर आपको यह नजारा रोमांचक लगता है तो इस गांव में एक जरूर घूमने आए। इस गांव को लेकर ऐसा कहा जाता है कि यहां बाजीराव की सेना रुकी थी और तब उन्होंने यहां इमली के कई सारे पेड़ लगाए थे। इमली की वजह से यहां मोर खींचे चले आए और यहीं के हो के रह गए। हालांकि, स्थानीय लोगों के बीच यह एक बेस्ट पिकनिक स्पॉट माना जाता है। महाराष्ट्र के लोग मोराची चिंचोली में पिकनिक मनाने और वीकेंड पर आना पसंद करते हैं।

पीकॉक सेंचुरी है आकर्षण का केंद्र

भारत में पशु-पक्षियों को लेकर नियम काफी सख्त कर दिए गए हैं। यही नहीं भारत की राष्ट्रीय पक्षी है मोर, और  पिछले कुछ सालों से इसकी संख्या में काफी गिरावट आई है, लेकिन इस गांव में इतने सारे मोर होने की वजह से लोग आश्चर्य में पड़ जाते हैं। यही नहीं इतने सारे मोर होने की वजह से यह गांव पीकॉक सेंचुरी में तब्दील हो चुका है। वहीं मयूर बाग पीकॉक सेंचुरी में मोर-मोरनी को देखने के अलावा पर्यटक तांगा सवारी, कैम्पिंग, टेंट आदि का भी लुत्फ उठाते हैं। अगर वीकेंड या फिर कुछ दिनों की छुट्टियों के लिए किसी शांत जगह की तलाश कर रहे हैं तो उसके लिए मोराची चिंचोली गांव बेस्ट है। खास बात है कि इस पीकॉक सेंचुरी की रखवाली गांव वाले ही करते हैं। वहीं यहां आने पर मोर-मोरनी को पकड़ना या फिर शिकार करना पूरी तरह से वर्जित है। सुरक्षा कर्मी इस बात का ध्यान रखते हैं कि आने वाले टूरिस्ट ऐसा ना करें।

कैसे पहुंचे मोराची चिंचोली गांव

मोराची चिंचोली गांव पहुंचने के लिए आप ट्रेन या फिर हवाई जहाज दोनों साधन चुन सकते हैं। इसके लिए आपको सबसे पहले पुणे पहुंचना होगा। पुणे हवाई अड्डा से मोराची चिंचोली गांव 48 किलोमीटर दूर है, जबकि पुणे जंक्शन से 52 किलोमीटर। पुणे पहुंचने के बाद आपको यहां से मोराची चिंचोली के लिए बस सेवा आसानी से मिल जाएंगे। लोकल बस के जरिए गांव तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।