नई दिल्ली| जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई नेता कन्हैया कुमार और गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी आज कांग्रेस का हाथ थामेंगे। जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मौजूदगी में दोनों को पार्टी की सदस्यता दिलाई जाएगी। कन्हैया और जिग्नेश के साथ उनके कुछ और साथी भी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। इन दोनों के ऊपर देशभर में युवाओं को कांग्रेस से जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

क्या कांग्रेस के लिए फायदेमंद होंगे कन्हैया और जिग्नेश?
कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवानी के पार्टी में आने से पहले कांग्रेस के कई धुरंधर नेताओं ने पार्टी का हाथ छोड़ दिया है। मौजूदा समय में भी कई ऐसे नेता हैं कांग्रेस पार्टी में जो नाराज चल रहे हैं, इन सबके बीच कन्हैया और जिग्नेश का पार्टी में आना कितने फायदेमंद होता है, ये देखना दिलचस्प होने वाला है। हालांकि माना यही जा रहा है कि कन्हैया और जिग्नेश की प्राथमिकता युवाओं को कांग्रेस से जोड़ने और राहुल गांधी को मोदी के विकल्प के तौर पर प्रस्तुत करने की होगी।

इन नेताओं के 'हाथ' छोड़ने से कमजोर हुई टीम राहुल
अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की चीफ रहीं सुष्मिता देव ने हाल ही में 'हाथ' छोड़कर टीएमसी का दामन थाम लिया है। टीएमसी ने उनको राज्यसभा भी भेजा है। उससे पहले यूपी में प्रमुख ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले जितिन प्रसाद ने भी कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी को अपना लिया था। अब यूपी की योगी सरकार में उनको कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। राहुल गांधी के बेहद करीबी और दिग्गज कांग्रेसी नेता रहे माधव राव सिंधिया के पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया पहले ही बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। इतना ही नहीं, वह जब बीजेपी में आए थे तो मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिर गई थी और बीजेपी ने फिर से सरकार बनाया था। आज ज्योतिरादित्य सिंधिया मोदी कैबिनेट में मंत्री हैं। इन युवा नेताओं के साथ छोड़ने से कांग्रेस में राहुल की टीम कमजोर हो गई है।