श्राद्ध पक्ष का महीना पितृपक्ष प्रारंभ हो चुका है। ये महीना पितरों के प्रति प्रेम और श्रद्दा को प्रकट करने का होता है। ऐसा माना जाता है कि इन दिनों हमारे पूर्वज किसी ना किसी रूप में धरती पर वापस आते हैं। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों के लिए पूजा-पाठ करते हैं और उनसे अपनी गलतियों से क्षमा मांगते हैं। श्राद्ध के दिनों में दान-पुण्य किया जाता है और ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है। कहते हैं कि ऐसा करने से पूर्वज खुश होते हैं औप आपको सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते है। इस बार पितृपक्ष 20 सितंबर से शुरू हुआ है जो कि 6 अक्टूबर तक रहेगा।
श्राद्ध का महीना शुरू हो चुका है अगर आप साथ के बारे में जानते हैं तो आपको इस बात की जानकारी आप को होगी कि कई लोगों के द्वारा यह कहा जाता है कि श्राद्ध में हमें किसी भी नई वस्तु को खरीदना या बेचना नहीं चाहिए ऐसा करना श्राद्ध के समय गलत माना जाता है। पितृ मावस के दौरान करीब 10 दिनों तक कोई भी नई चीज जैसे, कपड़े, बर्तन, गाड़ी सामान नहीं खरीदना जाता। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इससे अशुभ माना गया है और ऐसा करने से पितृ व पूर्वज क्रोधित हो जाते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से हमारे पितर हमसे नाराज हो जाते है। माना जाता है कि श्राद्ध के महीने में हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं इसीलिए हम श्राद्ध की पूजा करते हैं परंतु किसी चीज को खरीदने और बेचना अशुभ होता है ऐसा किसी शास्त्र में नहीं लिखा हुआ है ना ही आज तक पाया गया है परंतु फिर भी लोग इस धारणा को मानते चले आ रहे हैं। कई लोग मानते हैं कि यदि हम श्राद्ध के महीने में कोई चीज खरीदते हैं तो वह हमारे पूर्वजों को अर्पित हो जाती है। साथ ही कई लोगों का यह भी मानना है कि ऐसा करने से हमारे पितर हमसे नाराज हो जाते है।


 
जैसे कि हमने आपको उपरोक्त बताया कि ऐसी धारण है कि श्राद्ध पक्ष में जब कोई व्यक्ति नई चीज़ खरीदता है तो वह पितरों के निमित्त होती है, पितर प्रेत के रूप में उस चीज़ को स्वीकार करते हैं। तो साथ ही साथ ये भी माना जाता है कि श्राद्ध कर्म में सिर्फ पितरों की पूर्ण श्रद्धा भाव से सेवा-आराधना करनी चाहिए। इस दौरान कभी अपने भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए किसी प्रकार की नई चीज़ न खरीदें। मगर बताया जाता है कि ऐसा धारणाओं को सही माना जाए इसका तथ्यात्मक रूप से कहीं जिक्र नहीं मिलता।

 
इन कार्यों को करने से बचें

पितृपक्ष किसी गलत कार्य को करना तो दूर उसके बारे में सोचना भी अशुभ होता है इससे हमारे पितर हमसे नाराज हो जाते हैं इसीलिए इस समय हमें किसी भी बुरे कार्य के बारे में नहीं सोचना चाहिए ना ही करना चाहिए। इस समय में पितर हमारे घर पर आते है और पूर्वजों की तिथि पर पितरों का तर्पण करना चाहिए. ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मांगलिक कार्यो को करने से बचें |

इसके अलावा श्राद्ध पक्ष में किसी तरह के मांगलिक कार्यों को नहीं करना चाहिए, जैसे मुंडन, शादी, उपनयन संस्कार, नींव पूजन तथा ग्रह प्रवेश आदि कार्य। मगर कुछ लोगों का कहना है इस दौरान कपड़े, गहने, वाहन आदि चीज़ों की खरीददारी नहीं की जा सकती है, मगर बता दें ऐसा नहीं है ऐसा कुछ करने में किसी तरह की कोई मनाही नहीं होती। कुछ ज्योतिष मान्यताओं की मानें जब पितर श्राद्ध के समय घर आते हैं तो वे नईं चीजों को देखकर प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए कहा जाता है कि नईचीजों की खरीदारी आर्थिक संपन्नता को दर्शाती है और अपने बच्चों की तरक्की को देखकर पूर्वज प्रसन्न होते हैं।

 
पित्र पक्ष में बन रहे है शुभ योग

इस बार पितृपक्ष में कई शुभ योग बन रहे है। पित्र पक्ष में 7 सर्वार्थ सिद्धि योग, दो रवि योग, एक त्रिपुष्कर योग बन रहा है। तो 13 सितंबर को इंदिरा एकादशी के दिन रविपुष्य योग भी बन रहा है। इसके अलावा इसी श्राद्ध में विश्वकर्मा पूजन भी श्रेष्ठ रहने वाला है। जिस कारण मांगलिक कार्य को छोड़कर कपड़े, वाहन, गहने आदि चीजों की खरीदारी की जा सकती है। क्योंकि इस बार पितृपक्ष में काफी शुभ योग बन रहे हैं तो आप इस समय खरीदारी कर सकते हैं। आप मांगलिक कार्यों को छोड़कर अन्य सभी कार्य आराम से कर सकते हैं क्योंकि श्राद्ध के समय कई सारे ऑफर अभी मिलते हैं तो आप आराम से सामान की खरीदारी भी कर सकते हैं और ऑफर का फायदा भी उठा सकते हैं क्योंकि श्राद्ध में समान को खरीदने का कोई तथ्यात्मक बात सामने नहीं आई है तो आप बिना शंका के चीजें खरीद सकते हैं।