समस्त नागरिकों को नि:शुक्ल विधिक सेवा व विधिक सलाह प्राप्त करने के लिए 

'' न्याय सबसे लिए हैंÓÓ न्याय पाने का सभी को समान अधिकार है, आपको अवगत कराया जाता है कि यदि आप अपना प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत करना चाहते हैं, या आपका कोई प्रकरण किसी न्यायालय में लंबित है, तो घबराइये नहीं आपकी गरीबी आपको न्याय दिलाने में आड़े नहीं आएगी, अब आपके प्रकरणों में तहसील स्तरीय न्यायालय से उच्च न्यायालय तक न्याय दिलाने जाने हेतु तहसील-उपखण्डीय विधिक संवा समितियां,जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व उच्च न्यायालय विधिक सेवा समितियां कार्य कर रही हैं।

कौन-कौन व्यक्ति विवादों में संबंधित विधिक सेवा-विधिक सलाह पाने के हकदार हैं:-

1. वह व्यक्ति जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य है।

2. वह व्यक्ति हो मानव दुव्र्यवहार या बेगार का सताया हुआ है।

3. वह स्त्री या बालक है।

4. वह व्यक्ति जो मानसिक रुप से अस्वस्थ या अन्यभा असमर्थ है।

5. वह व्यक्ति जो अनपेक्षित अभाव, जैसे बहुविनाश, जातीय हिंसा, जातीय अत्याचार, बाढ़, सूखा, भूकंप, औद्योगिक विनाशद की दशाओं के अधीन सताया हुआ है, या

6. वह व्यक्ति जो कोई औद्योगिक कर्मकार है, या

7. वह व्यक्ति जो अभिरक्षा में है, जिसके अंतर्गत अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम 1956 के अंतर्गत किसी संरक्षण गृह में या किशोर न्याय अधिनियम, 1986 के अंतर्गत किसी किशोर गृह में या मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 के अंतर्गत किसी मन:चिकित्सीय अस्पताल या मन:चिकित्सीय परिचर्या गृह में अभिरक्षा में रखा गया व्यक्ति भी है, या

8. ऐसा व्यक्ति जिसका विवाद उच्चतम न्यायालय से भिन्न किसी अन्य न्यायालय के समक्ष है और जिसकी समस्त स्त्रोतों से वार्षिक आय 1,00,000/- रुपए(अंकन एक लाख रुपए) से अधिक न हो विधिक सेवा पाने का पात्र होगा।

विधिक सेवा एवं सलाह किन-किन रूपों में प्राप्त की जा सकेंगी: 

1. कोर्ट फीस, आदेशिका फीस, साक्षियों तथा पेपर बुक के व्यय, वकील फीस और कानूनी कार्यवाहियों के संबंध में देय समस्त खर्च।

2. कानूनी कार्यवाहियों में वकील उपलब्ध कराना।

3. कानूनी कार्यवाहियों के निर्णयों, आदेशों, साक्ष्य की टिप्पणियों तथा अन्य दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतिलिपियां उपलब्ध कराना।

4. कानूनी कार्यवाहियों में पेपर बुक तैयार करना, जिसमें दस्तावेजों के मुद्रण-टंकण तथा अनुवाद के खर्च सम्मिलित हैं।

5. कानूनी दस्तावेजों का प्रारूपण कराना।

6. किसी कानूनी मामले में कानूनी सलाह देना।

 नोट:- यदि विधिक सहायता प्राप्त व्यक्ति के पक्ष में न्यायालय को डिक्री या कोई आदेश पारित करते हुए खर्चे या अन्य आर्थिक लाभ प्रदान करता है तो विधिक सहायता प्राप्त व्यक्ति को समस्त खर्च, प्रभार तथा व्यय की राशि जो उसे विधिक सेवा प्रदान करने में दी गई है वापिस लौटाना होगी।

किन-किन न्यायालयों में विधिक सेवा दी जा सकती है:-

1. सभी प्रकार के न्यायालयों में विधिक सेवा दी जा सकती है, (न्यायालय का अभिप्राय दीवानी, फौजदारी तथा माल जिसमें सभी अधिकरण व अन्य प्राधिकरण आदि से है)

अत: इच्छुक पात्र व्यक्ति अपना आवेदन तहसील स्तर पर अध्यक्ष तहसील विधिक सेवा समिति, जिला स्तर पर सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण , उच्च न्यायालय स्तर पर सचिव उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति को दे सकते हैं, विधिक परामर्श हेतु आप जिले में (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण) पदस्त जिला विधिक सहायता अधिकारी से सम्पर्क करें और अन्य विधिक परामर्श हेतु आप सचिव मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से भी संपर्क कर सकते हैं।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण न्याय सेवा सदन, जिला न्यायालय परिसर, भोपाल(म.प्र.)