विश्व की एक मात्र उत्तर प्रवाह मान क्षिप्रा नदी के पास बसी सप्तपुरियों में से एक भगवान श्रीकृष्‍ण की शिक्षा स्थली अवं‍तिका अर्थात उज्जैन को राजा महाकाल और विक्रमादित्य की नगरी कहा जाता है। यहां तीन गणेशजी विराजमान हैं चिंतामन, मंछामन और इच्छामन। यहां पर ज्योतिर्लिंग के साथ दो शक्तिपीठ हरसिद्धि और गढ़कालिका है और 84 महादेव के साथ ही यहां पर देश का एक मात्र अष्ट चिरंजीवियों का मंदिर है। यह मंगलदेव की उत्पत्ति का स्थान भी है और यहां पर नौ नारायण और सात सागर है। यहां पर माता पार्वती द्वारा लगाया गया सिद्धवट है। श्रीराम और हनुमान ने उज्जैन की यात्रा की थी। यहां के कुंभ पर्व को सिंहस्थ कहते हैं। राजा विक्रमादित्य ने ही यहीं से विक्रमादित्य के कैलेंडर का प्रारंभ किया था और उन्होंने ही इस देश को सर्वप्रथम बार सोने की चिढ़िया कहकर यहां से सोने के सिक्के का प्रचलन किया था। महाभारत की एक कथानुसार उज्जैन स्वर्ग है। यहां के शमशान को भी तीर्थ कहते हैं जिसका नाम है चक्र तीर्थ। यहां के शमशान को तीर्थ माना जाता है जिसे चक्र तीर्थ कहते हैं।
श्मशान, ऊषर, क्षेत्र, पीठं तु वनमेव च,

पंचैकत्र न लभ्यते महाकाल पुरदृते।- (अवन्तिका क्षेत्र माहात्म्य 1-42)

यहां पर श्मशान, ऊषर, क्षेत्र, पीठ एवं वन- ये 5 विशेष संयोग एक ही स्थल पर उपलब्ध हैं। यह संयोग उज्जैन की महिमा को और भी अधिक गरिमामय बनाता है। ऐसा संयोग और कहीं नहीं है। यहां ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ एक साथ है।


उज्जैन में 3 श्मशान घाट प्रमुख है:-

1. क्षिप्रा तट पर चक्रतीर्थ घाट
2. मंगलनाथ मंदिर के समीप ओखलेश्वर घाट

3. त्रिवेणी स्थित श्मशान घाट
चक्र तीर्थ :

1. चक्रतीर्थ उज्जैन : चक्रतीर्थ उज्जैन का सबसे प्रमुख और प्राचीन श्मशान घाट है। क्षिप्रा नदी के किनारे यह सुंदर, साफ स्वच्छ और एकांत वातावरण में स्थित चक्र तीर्थ की महिमा पुराणों में मिलती है। उज्जैन में चक्रतीर्थ नामक स्थान और गढ़कालिका का स्थान तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है। उज्जैन में काल भैरव और विक्रांत भैरव भी तांत्रिकों का मुख्य स्थान माना जाता है। यह देश में कुछ ही स्थान तांत्रिकों के हैं जिसमें से यह एक है।

2. पांच प्रमुख श्मशान : देश में 5 सबसे महत्वपूर्ण श्मशान माने जाते हैं। 1.कामाख्‍या का श्मशान (असम), 2.तारा‍पीठ का श्मशान (कोलकाता), 3.रजरप्पा श्मशान, 4.नलखेड़ा बगलामुखी श्मशान (मध्यप्रदेश), 5.त्र्यंबकेश्वर का श्मशान (महाराष्ट्र)।

3. अन्य चक्रतीर्थ : उज्जैन क्षिप्रा नदी के तट पर चक्रतीर्थ, गोमती नदी के तट पर नैमिषारण्य का चक्रतीर्थ, अमरकंटक में चक्रतीर्थ, दक्षिण में कर्नाटक की तुंगभद्रा पर चक्रतीर्थ है। चक्रतीर्थ के नाम से देश में कई चक्रतीर्थ है परंतु उज्जैन में श्मशान को चक्रतीर्थ कहते हैं।

सिद्धवट है मुक्ति कर्म का प्रमुख स्थान : उज्जैन में सिद्धवट को चार प्रमुख प्राचीन और पवित्र वटों और मुक्ति कर्म के स्थानों में से एक माना जाता है। प्रयाग (इलाहाबाद) में अक्षयवट, मथुरा-वृंदावन में वंशीवट, गया में गयावट जिसे बौधवट भी कहा जाता है और यहां उज्जैन में पवित्र सिद्धवट हैं। सिद्धवट को शक्तिभेद तीर्थ के नाम से जाना जाता है। तीर्थदीपिका में पांच वटवृक्षों का वर्णिन मिलता है। स्कंद पुराण अनुसार पार्वती माता द्वारा लगाए गए इस वट की शिव के रूप में पूजा होती है। इसी जगह पर पिंडदान तर्पण आदि किया जाता हैं।