नई दिल्ली। मुसबीत की घड़ी में जो आपका साथ दे वह सच्चा दोस्त होता है। भारत कोरोना महामारी के इस दौर में अपने पड़ोसियों के लिए इसी सच्चे दोस्त की भूमिका निभा रहा है। आबादी के लिहाज से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश होने के बावजूद भारत लगातार अपने जरूरतमंद पड़ोसियों को कोरोना वैक्सीन भेज रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 'वैक्सीन मैत्री' का नाम दिया था। भारत की इस दरियादिली की दुनियाभर में तारीफ हो रही है। अब खुद विश्व स्वास्थ्य संगठन के चीफ ट्रेड्रोस अधानोम भारत के कायल हो गए हैं और उन्होंने पीएम मोदी को शुक्रिया भी कहा है। 
डब्ल्यूएचओ चीफ ने अपने ट्वीट में लिखा है, 'ग्लोबल कोविड-19 रिस्पॉन्स को लगातार समर्थन देने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया। मिलकर काम करने, ज्ञान साझा करने से ही हम इस वायरस को रोक सकते हैं और जिंदगियां बचा सकते हैं। इससे पहले ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने भी वैक्सीन की पहली खेप मिलने के बाद भारत का शुक्रिया अदा किया था और संजीवनी बूटी ले जाने वाले भगवान हनुमान से तुलना की थी। उन्होंने कहा था कि भारत से वैक्सीन पाकर ब्राजील सम्मानित महसूस कर रहा है। महामारी के वक्त भारत ने नेबरहुड फर्स्ट की नीति अपनाते हुए सबसे पहले भूटान और मालदीव को वैक्सीन भेजी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने शुक्रवार को बताया कि भारत अपने पड़ोसी देशों को प्राथमिकता देते हुए उन्हें सहायता के तौर पर कोरोना वैक्सीन उपलब्ध करा रहा है। भारत ने इस अभियान की शुरुआत 20 जनवरी को ही कर दी थी जिसके तहत पहले दिन भूटान को कोरोना वैक्सीन की 1.5 लाख खुराक, जबकि मालदीव को एक लाख खुराक उपलब्ध कराई गईं थी। इसके बाद गुरुवार को नेपाल को 10 लाख, जबकि बांगल्देश को 20 लाख कोरोना वैक्सीन की खेप भेजी जा चुकी है। इस अभियान के तहत शुक्रवार को म्यांमार को 15 लाख, मॉरीशस को एक लाख और सेशल्स को कोरोना वैक्सीन की 50 हजार खुराक भेजी गई हैं। उन्होंने बताया कि श्रीलंका और अफगानिस्तान से नियामक संबंधी मंजूरी मिलने के बाद इन्हें भी कोरोना वैक्सीन की खेप भेजी जाएगी। इसके अलावा अनुबंध के तहत सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, मोरक्को, बंगलादेश और म्यांमार को भी कोरोना वैक्सीन की खेप भेजने पर काम किया जा रहा है। कोरोना महामारी के दौरान भारत ने बीते साल बड़ी मात्रा में कई देशों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, रेमडेसिविर और पैरासिटामॉल जैसी दवाइयां भेजी थीं। इसके अलावा डायग्नोस्टिक किट, वेंटिलेटर, मास्क, दस्ताने और अन्य मेडिकल सामान की आपूर्ति भी की गई थी।