बूचड़खानों पर शिकंजा: शुभेंदु सरकार ने जारी किया सख्त नोटिस
कोलकाता:पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित भारतीय जनता पार्टी सरकार ने पशु क्रूरता पर लगाम लगाने और नियमों को सख्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने वर्ष 1950 के बंगाल कानून और कलकत्ता उच्च न्यायालय के पुराने आदेशों का हवाला देते हुए एक नया नोटिस जारी किया है। इस नए फरमान के तहत अब राज्य में बिना अनिवार्य 'फिटनेस प्रमाण पत्र' के किसी भी गाय या भैंस का वध करना पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। ममता बनर्जी के 15 साल के लंबे शासन के बाद सत्ता परिवर्तन के साथ ही प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में पशु वध को लेकर अब पुरानी व्यवस्था नहीं चलेगी और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
प्रमाण पत्र के लिए तय की गई कड़ी शर्तें
सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, पशुओं के वध के लिए फिटनेस प्रमाण पत्र प्राप्त करना एक जटिल प्रक्रिया होगी। यह प्रमाण पत्र केवल तभी जारी किया जा सकेगा जब संबंधित नगरपालिका के अध्यक्ष या पंचायत समिति के अध्यक्ष और सरकारी पशु चिकित्सक लिखित रूप में इस बात पर सहमत हों कि पशु वध के योग्य है। इसके लिए पशु की आयु 14 वर्ष से अधिक होना अनिवार्य है। साथ ही, यह भी प्रमाणित करना होगा कि वह पशु अब काम करने या प्रजनन के लायक नहीं रहा है, या फिर किसी ऐसी गंभीर बीमारी, चोट अथवा शारीरिक अक्षमता से ग्रस्त है जिसका उपचार संभव नहीं है। इन सभी शर्तों के पूरा होने पर ही वध की अनुमति मिल सकेगी।
सार्वजनिक स्थानों पर वध और खुले मांस पर रोक
नए नियमों के मुताबिक, अब पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक रूप से या खुले स्थानों पर पशु वध की अनुमति बिल्कुल नहीं होगी। पशुओं का वध केवल उन्हीं वधशालाओं (बूचड़खानों) में किया जा सकेगा जो नगरपालिका द्वारा तय या अधिकृत की गई हैं। इस नियम को लागू करने के पीछे सरकार का उद्देश्य स्वच्छता बनाए रखना और धार्मिक व सामाजिक संवेदनाओं का सम्मान करना है। यदि कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो उसे छह महीने तक की जेल की सजा, 1000 रुपये का जुर्माना या फिर दोनों का सामना करना पड़ सकता है।
अपील करने की व्यवस्था और प्रशासनिक फेरबदल
सरकार ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अपील का प्रावधान भी रखा है। यदि किसी पशु के लिए फिटनेस प्रमाण पत्र देने से इनकार किया जाता है और पशु मालिक को लगता है कि यह निर्णय गलत है, तो वह 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार के समक्ष अपनी अपील दायर कर सकता है। शुभेंदु अधिकारी सरकार का यह निर्णय राज्य की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अवैध वधशालाओं और पशु तस्करी को रोकने के लिए सरकार कुछ और कड़े कानून पेश कर सकती है।


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