डिजिटल इंडिया की रफ्तार तेज, UPI लेनदेन 228 अरब के पार
नई दिल्ली। भारत में छोटे लेनदेन के लिए यूपीआई का चलन तेजी से बढ़ा है। इंडिया डिजिटल पेमेंट्स 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, यूपीआई के जरिये 2025 में 228.5 अरब लेनदेन दर्ज किए। कुल लेनदेन मूल्य बढ़कर 299.74 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस बीच, औसत लेनदेन आकार लगातार घट रहा है, जो इस बात का संकेत है कि अब छोटी खरीदारी में भी यूपीआई का चलन बढ़ रहा है। व्यापारिक लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। व्यक्ति-से-व्यापारी (पीटूएम) भुगतान 34 फीसदी बढ़कर 143.82 अरब हो गया। यूपीआई क्यूआर कोड की संख्या बढ़कर 73 करोड़ से अधिक हो गई है, जबकि पॉइंट-ऑफ-सेल टर्मिनल की संख्या 1.14 करोड़ से अधिक पहुंच गई है। जहां यूपीआई छोटे भुगतान में अग्रणी बना हुआ है, वहीं क्रेडिट कार्ड का उपयोग बड़े लेनदेन में बढ़ रहा है। 2025 में क्रेडिट कार्ड लेनदेन 27 फीसदी बढ़कर 5.69 अरब हो गया, जबकि डेबिट कार्ड के उपयोग में 23 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
भारत बनेगा दूसरा बड़ा सौर ऊर्जा बाजार
भारत 2026 तक दूसरा बड़ा सौर ऊर्जा बाजार बनने की राह पर है। भारत ने मात्र 14 महीनों में 50 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता जोड़कर अब तक की सबसे तेज वृद्धि हासिल की है। देश का सौर ऊर्जा उत्पादन 150 गीगावाट तक पहुंच गया है। पहले 50 गीगावाट तक पहुंचने में 11 साल लगे थे।
आज से भुना सकेंगे सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड
आरबीआई ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2019-20 सीरीज-पांच के लिए समयपूर्व मोचन (प्रीमैच्योर रिडेम्पशन) कार्यक्रम घोषित कर दिया है। निवेशक 15 अप्रैल 2026 को अपने बॉन्ड समय से पहले भुना सकेंगे। इसे 15 अक्तूबर 2019 को जारी किया गया था।
पेटीएम के स्वामित्व ढांचे में हुआ बदलाव
पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशन्स में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर 50.3 फीसदी हो गई। इसके साथ ही यह बहुलांश भारतीय स्वामित्व एवं नियंत्रण वाली कंपनी बन गई। इसमें म्यूचुअल फंड कंपनियों की बड़ी भूमिका रही।
10 फीसदी तक बढ़ सकता है निजी कर्मचारियों का वेतन
नौकरी छोड़ने की दर बढ़ने की चिंताओं के बीच भारतीय कंपनियां वित्त वर्ष 2026-27 में अपनी भर्ती रणनीति को अधिक संतुलित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। जीनियस एचआरटेक के अनुसार, अब कंपनियों का फोकस मझोले स्तर की भर्तियों पर अधिक रहेगा। वेतन वृद्धि औसतन 5 से 10 फीसदी रहने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 49 फीसदी कंपनियां मझोले स्तर के कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही हैं। कार्यबल विस्तार को लेकर रुख मिला-जुला है। करीब 28 फीसदी संस्थान भर्ती 10-15 फीसदी बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, जबकि 43 फीसदी कंपनियां सीमित वृद्धि के पक्ष में हैं। 46 फीसदी कंपनियां 10 फीसदी तक वेतन बढ़ा सकती हैं। नए श्रम कानूनों के बाद 57 फीसदी कंपनियां अपने वेतन ढांचे में बदलाव की योजना बना रही हैं। इन कर्मचारियों को होगा फायदा: वेतन वृद्धि का सबसे अधिक लाभ मध्यम-सीनियर स्तर के कर्मचारियों को मिलने की उम्मीद है। इनका हिस्सा 48 फीसदी तक हो सकता है। इसके मुकाबले जूनियर और सीनियर स्तर के कर्मचारियों की वेतन वृद्धि क्रमशः 26 फीसदी और 22 फीसदी रहने का अनुमान है।
आईएमएफ का भारत पर भरोसा 6.5% विकास दर का अनुमान
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत की आर्थिक वृद्धि पर सकारात्मक अनुमान जताते हुए कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2026-27 में 6.5 फीसदी रफ्तार से बढ़ सकती है। वृद्धि अनुमान में बढ़त को मजबूत घरेलू प्रदर्शन और बाहरी कारकों से समर्थन मिला है। इसके बूते भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बना रहेगा। आईएमएफ के अनुसार, 2025 में बेहतर आर्थिक प्रदर्शन का असर आगे भी दिखेगा। भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ में कमी से निर्यात को राहत मिली है। इससे पश्चिम एशिया के तनाव से उत्पन्न नकारात्मक प्रभाव कुछ हद तक संतुलित हुए हैं।युद्ध ने वैश्विक वृद्धि की धीमी: आईएमएफ ने कहा, यदि पश्चिम एशिया का संघर्ष सीमित अवधि के लिए रहता है, तो विश्व अर्थव्यवस्था की वृद्धि में मामूली नरमी आ सकती है। 2026 में वैश्विक वृद्धि दर 3.1 फीसदी और 2027 में 3.2 फीसदी रहने का अनुमान है।


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