अस्पताल अंधेरे में डूबा, छिंदवाड़ा में टॉर्च की रोशनी में हुआ मरीजों का इलाज
छिंदवाड़ा: मानसून से पहले बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लंबे समय से मेंटेनेंस और मरम्मत के नाम पर बिजली कटौती की जा रही थी। बिजली विभाग का दावा था कि ट्रांसफॉर्मर, बिजली लाइन और अन्य उपकरणों की जांच के बाद बारिश के मौसम में लोगों को ट्रिपिंग और अघोषित कटौती से परेशानी नहीं होगी। लेकिन छिंदवाड़ा में तेज हवा के शुरुआती असर के साथ ही विभाग के इन दावों की हवा निकल गई। बिजली व्यवस्था लड़खड़ाने का सबसे बड़ा और गंभीर असर जिला अस्पताल पर देखने को मिला।
अस्पताल में छाया अंधेरा, मरीजों की बढ़ी परेशानी
अस्पताल परिसर में अचानक बिजली गुल होते ही कई वार्ड और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं अंधेरे में डूब गईं। अचानक हुए इस वाकये से मरीजों के परिजन घबरा गए, जबकि अस्पताल स्टाफ स्थिति को संभालने की कोशिशों में जुट गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ समय के लिए अस्पताल में ऐसा माहौल बन गया था, जहां सामान्य चिकित्सा कार्य करना भी एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा था। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह रही कि आपातकालीन स्थिति (इमरजेंसी) के लिए रखा गया इन्वर्टर बैकअप सिस्टम भी तुरंत चालू नहीं हो सका।
मोबाइल फ्लैशलाइट के भरोसे डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ
जिला अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, ऐसे में बिजली गुल होना मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मुद्दा बन जाता है। बिजली जाने के बाद बैकअप न मिलने के कारण डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट और बेहद सीमित रोशनी में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। ऑपरेशन थिएटर, इमरजेंसी वार्ड, आईसीयू और पैथोलॉजी जांच जैसी सेवाएं पूरी तरह बिजली पर निर्भर रहती हैं, जहां बैकअप सिस्टम का फेल होना मरीजों की जान को खतरे में डालने जैसा है। इस गंभीर लापरवाही पर अस्पताल प्रबंधन ने फिलहाल खुलकर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है।
बिजली विभाग के मेंटेनेंस के दावों पर उठे सवाल
हर साल बारिश से पहले बिजली विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर मेंटेनेंस अभियान चलाकर घंटों बिजली कटौती की जाती है। आम जनता इस उम्मीद में यह परेशानी झेलती है कि बारिश में निर्बाध बिजली मिलेगी। लेकिन छिंदवाड़ा की इस घटना ने रखरखाव के इन दावों की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब महीनों से मेंटेनेंस चल रहा था, तो मानसून की पहली तेज हवा भी यह व्यवस्था क्यों नहीं झेल पाई?
अभी मानसून का मौसम पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है और इस तरह की अव्यवस्था सामने आने से प्रशासन की तैयारियों की पोल खुल गई है। अब देखना यह होगा कि बिजली विभाग और अस्पताल प्रबंधन इस लापरवाही से क्या सबक लेता है।


असम में जलप्रलय जैसे हालात, 50 लोगों की मौत, ऊपरी जिलों में भारी तबाही
US बेस के पास धमाकों के बाद हाई अलर्ट, वेस्ट बैंक हिंसा ने बढ़ाई बेचैनी
वार्ता का पहला दौर खत्म, इस्तीफे की मांग पर CJP और सरकार आमने-सामने
21 कर्मचारियों की बर्खास्तगी पर मचा बवाल, जेपी अस्पताल में तनावपूर्ण माहौल
अनुकंपा नियुक्ति मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, विवाहित बेटी के पक्ष में फैसला
समुद्री सीमा विवाद ने फिर बढ़ाया तनाव, चीन-फिलीपींस के बीच वॉटर कैनन बना वजह
रेल मंडल में स्काउट्स-गाइड्स की गतिविधियां तेज, टेस्टिंग कैंप का शुभारंभ
दिल्ली में प्रदर्शन का असर, इंटरनेट सेवा पर रोक और कई मेट्रो स्टेशन बंद
प्रदर्शन विवाद पर बढ़ी कानूनी हलचल, CJI को लिखे पत्र में रखी गई अहम दलीलें
काजल अग्रवाल ने सुनाया अनोखा फैन मोमेंट, टैटू दिखाने की हरकत ने किया हैरान