राजस्थान रॉयल्स बिक्री विवाद में नए आरोप, प्रक्रिया पर उठे सवाल
जयपुर: आईपीएल की प्रमुख फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स (आरआर) के मालिकाना हक को लेकर छिड़ा विवाद अब गहराता नजर आ रहा है। मित्तल परिवार और अदार पूनावाला द्वारा इस टीम को खरीदने के आधिकारिक ऐलान के बाद अमेरिका के काल सोमानी ग्रुप ने एक चौंकाने वाला दावा पेश किया है। सोमानी ग्रुप का कहना है कि उन्होंने राजस्थान रॉयल्स के लिए लगाई गई अपनी बोली को कभी वापस नहीं लिया था, बल्कि उन्हें जानबूझकर इस पूरी बिक्री प्रक्रिया से बेदखल किया गया है। इस दावे के सामने आने के बाद राजस्थान रॉयल्स के सौदे की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
रिकॉर्ड डील का दावा और प्रक्रिया पर सवाल
इस वर्ष की शुरुआत में काल सोमानी ग्रुप और राजस्थान रॉयल्स के बीच 1.63 बिलियन अमेरिकी डॉलर में एक बड़ी हिस्सेदारी खरीदने पर सहमति बनी थी, जिसे आईपीएल 2026 के बाद पूर्ण होना था। हालांकि, हाल ही में लक्ष्मी एन. मित्तल और आदित्य मित्तल ने अदार पूनावाला के साथ मिलकर मनोज बदाले के समूह से टीम खरीदने का नया समझौता कर लिया। सोमानी ग्रुप के निवेशकों, जिनमें रॉब और जॉर्डन वॉल्टन जैसे दिग्गज शामिल हैं, ने एक संयुक्त बयान जारी कर अपनी गहरी निराशा व्यक्त की है। उनका तर्क है कि छह महीने की इस लंबी प्रक्रिया में वे शुरू से ही सबसे प्रमुख बोलीदाता के रूप में मौजूद थे और उनके पास खेल जगत के निवेश का व्यापक वैश्विक अनुभव था, फिर भी उन्हें स्वामित्व से दूर रखा गया।
फंडिंग के दावों पर विवाद और सोमानी ग्रुप की सफाई
मीडिया में ऐसी खबरें आई थीं कि सोमानी ग्रुप के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को जरूरी फंडिंग जुटाने में समस्याओं का सामना करना पड़ा था, जिसके कारण यह समझौता सिरे नहीं चढ़ पाया। इन रिपोर्टों का पूरी तरह खंडन करते हुए सोमानी ग्रुप ने स्पष्ट किया है कि उनके पास सौदे के लिए पर्याप्त वित्त उपलब्ध था और वे स्वामित्व हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार थे। ग्रुप का आरोप है कि उनकी ओर से ईमानदारी और पेशेवर मानकों का पालन करने के बावजूद जो परिणाम सामने आया है, वह निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की भावना के अनुकूल नहीं है। उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्होंने अपनी मर्जी से कदम पीछे नहीं खींचे थे, बल्कि उन्हें प्रक्रिया से बाहर किया गया।
राजस्थान रॉयल्स के नए मालिकाना हक का समीकरण
सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान रॉयल्स के मौजूदा मालिकों ने सोमानी ग्रुप द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में कुछ कमियां पाई थीं, जिसके कारण उनकी बोली को दरकिनार कर दिया गया। नए समझौते के अनुसार, अब मित्तल परिवार के पास इस फ्रेंचाइजी की लगभग 75 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि अदार पूनावाला करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी के मालिक बनेंगे। बदाले और अन्य मौजूदा निवेशकों के पास अब केवल सात प्रतिशत का छोटा हिस्सा शेष रहेगा। इस बड़े बदलाव के बीच सोमानी ग्रुप द्वारा उठाए गए सवालों ने क्रिकेट और कॉर्पोरेट जगत में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या यह पूरी चयन प्रक्रिया वाकई पारदर्शी थी।


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