मुरैन: मुरैना नगर निगम की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक उदासीनता के कारण शहर के आम नागरिकों की सुरक्षा एक बार फिर दांव पर लग गई है। वार्ड क्रमांक 40 के अंतर्गत आने वाले गादीपाल क्षेत्र की पार्षद वाली गली के मुख्य चौराहे पर लंबे समय से घुटनों तक गंदा पानी भरा हुआ है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस जलभराव के बीच सीवर चेंबर के ढक्कन भी पूरी तरह खुले पड़े हैं, जिससे यहाँ से गुजरने वाले वाहनों और राहगीरों के लिए हर पल एक बड़ा खतरा बना रहता है। इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय लोगों में नगर निगम के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।

पलटते-पलटते बची बच्चों से भरी स्कूल वैन, बाल-बाल बची मासूमों की जान

इस प्रशासनिक अनदेखी का एक बेहद डरावना रूप मंगलवार सुबह उस समय देखने को मिला जब बच्चों से भरी एक स्कूल वैन इस जलमग्न रास्ते से गुजर रही थी। सड़क पर अत्यधिक पानी भरा होने के कारण चालक को खुला हुआ सीवर चेंबर दिखाई नहीं दिया, जिससे वैन का एक पहिया सीधे चेंबर के भीतर धंस गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गाड़ी का संतुलन बिगड़ते ही वह पलटने की कगार पर पहुंच गई थी, लेकिन गनीमत रही कि समय रहते वाहन को संभाल लिया गया और उसमें सवार सभी मासूम बच्चे सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र के अभिभावकों में दहशत का माहौल है।

सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद भी नगर निगम ने साधी चुप्पी

स्थानीय नागरिकों ने अत्यंत निराशा व्यक्त करते हुए बताया कि इस गंदगी, जलभराव और खुले सीवरों की समस्या के समाधान के लिए लगभग एक महीने पहले ही प्रदेश सरकार की प्रतिष्ठित सीएम हेल्पलाइन पर भी औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद नगर निगम के अधिकारियों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया और न ही धरातल पर कोई सुधार कार्य शुरू कराया गया। लंबे समय से गंदा पानी जमा रहने के कारण पूरे क्षेत्र में असहनीय बदबू फैल चुकी है और मच्छरों का प्रकोप अत्यधिक बढ़ने से स्थानीय निवासियों पर महामारी और डेंगू जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आने का खतरा मंडरा रहा है।

बुजुर्गों और स्कूली बच्चों की मुश्किलें बढ़ीं, उग्र आंदोलन की चेतावनी

इस बदहाल रास्ते के कारण सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। राहगीरों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए अब कई किलोमीटर का लंबा चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि बुजुर्गों के लिए इस कीचड़ और गंदे पानी के बीच से निकलना सीधे तौर पर शारीरिक चोट को आमंत्रण देने जैसा हो गया है। स्थानीय समाजसेवियों और नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम प्रशासन ने तुरंत हरकत में आकर सीवर चेंबरों को बंद नहीं किया और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की, तो वे निगम कार्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन शुरू करने के लिए विवश होंगे।