विजय की श्रद्धांजलि पोस्ट पर उठे सवाल, TVK ने रखा अपना पक्ष
नई दिल्ली। तमिलनाडु की सियासत से उठा एक विवाद इन दिनों देश के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। मुख्यमंत्री थलपति विजय द्वारा 'मुल्लिवैक्काल स्मृति दिवस' को लेकर किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट ने राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी एक नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। इस पोस्ट के सामने आने के बाद से ही विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं।
भावुक संदेश से शुरू हुआ सियासी घमासान
इस पूरे विवाद की शुरुआत 18 मई को हुई, जब मुख्यमंत्री विजय ने वर्ष 2009 के मुल्लिवैक्काल घटनाक्रम की याद में एक भावुक पोस्ट साझा किया। अपने इस संदेश में उन्होंने श्रीलंकाई तमिल समुदाय के अधिकारों की वकालत की और युद्ध के पीड़ितों के प्रति अपनी गहरी एकजुटता प्रकट की। हालांकि, इस पोस्ट के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक विश्लेषकों और विरोधी दलों ने इसके अपने-अपने मायने निकालने शुरू कर दिए।
भाजपा का पलटवार और कांग्रेस को घेरा
इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय नेता अमित मालवीय ने विपक्षी खेमे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का यह पोस्ट परोक्ष रूप से लिट्टे (LTTE) प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरण को श्रद्धांजलि देने जैसा है, जिस संगठन पर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या का गंभीर आरोप है। भाजपा ने इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस की रहस्यमयी चुप्पी को लेकर भी कड़े सवाल खड़े किए हैं।
मुख्यमंत्री की पार्टी 'टीवीके' ने पेश की सफाई
विवाद को लगातार तूल पकड़ता देख मुख्यमंत्री विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया है। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री के इस संदेश का उद्देश्य किसी प्रतिबंधित संगठन या उसके नेता का महिमामंडन करना कतई नहीं था, बल्कि यह महज वर्ष 2009 के गृहयुद्ध में मारे गए हजारों बेकसूर तमिल नागरिकों के प्रति मानवीय संवेदना और श्रद्धांजलि थी। टीवीके ने इस बात को भी मजबूती से रेखांकित किया कि पूरे पोस्ट में कहीं भी प्रभाकरण के नाम का जिक्र नहीं किया गया था।
क्या है मुल्लिवैक्काल स्मृति दिवस का इतिहास?
पार्टी ने इस दिवस की पृष्ठभूमि समझाते हुए बताया कि हर साल 18 मई को दुनिया भर में रह रहे श्रीलंकाई तमिलों द्वारा 'मुल्लिवैक्काल स्मृति दिवस' के रूप में मनाया जाता है। यह वह दौर था जब श्रीलंकाई गृहयुद्ध के अंतिम दिनों में मुल्लिवैक्काल नामक स्थान पर भारी संख्या में आम नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। टीवीके के अनुसार, मुख्यमंत्री का संदेश केवल उन्हीं बेकसूर पीड़ितों की याद तक सीमित था और इसे किसी राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।


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