नई दिल्ली. संसद (Parliament) और विधानसभाओं (Legislative Assemblies) में महिलाओं (Women) को एक तिहाई आरक्षण (Reservation) के मामले में विपक्ष (Opposition) ओबीसी कोटा (OBC Quota) का पेच फंसाने की तैयारी कर रहा है। विपक्षी इंडिया ब्लॉक में शामिल सपा, राजद जैसे कुछ विपक्षी दलों ने कांग्रेस से सरकार के समक्ष इस आशय का मांग रखने का दबाव बना रहे हैं। कांग्रेस शुक्रवार को होने वाली अपनी कार्यसमिति की बैठक में इस मामले में निर्णय ले सकती है।

महिला आरक्षण अधिनियम में ओबीसी कोटा नहीं
गौरतलब है कि बीते लोकसभा चुनाव से ठीक पहले महिला आरक्षण के लिए पारित किए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में ओबीसी कोटे का प्रावधान नहीं किया गया है। विधेयक पर चर्चा के दौरान सपा, राजद जैसे कुछ दलों ने भी ओबीसी कोटा लागू करने की मांग की। तब सरकार ने संविधान में इस आशय की व्यवस्था न होने का हवाला दिया था। हालांकि कांग्रेस ने तब ओबीसी कोटे की मांग से दूरी बना ली थी। सपा के सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व ने सरकार के समक्ष आरक्षण में ओबीसी कोटा तय करने की मांग पर विचार का आश्वासन दिया है।

कार्यसमिति की अहम बैठक
अब जबकि सरकार ने बजट सत्र की 16 से 18 अप्रैल तक विस्तारित बैठक बुलाने के फैसले के बाद बुधवार को केबिनेट की बैठक में महिला आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयकों को मंजूरी मिल गई है, तब शुक्रवार को होने वाली कांग्रेस की कार्यसमिति की बैठक अहम हो गई है।
कांग्रेस के ही एक धड़े का मानना है कि राहुल गांधी की सामाजिक न्याय की राजनीति को मजबूती देने के लिए ओबीसी कोटे की मांग का व्यापक असर होगा।
अगर कांग्रेस की ओर से ओबीसी कोटे की मांग की गई तो संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को अतिरिक्त मशक्कत करनी होगी। सरकार अब तक कांग्रेस का समर्थन मिलने को लेकर निश्चिंत थी।